{"_id":"695eae5227a55e1c1e031b8b","slug":"another-test-was-conducted-in-pal-purwa-with-blood-samples-taken-from-29-villagers-kanpur-news-c-220-1-sknp1003-136513-2026-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: पाल पुरवा में दूसरे भी हुई जांच, 29 ग्रामीणों के लिए रक्त नमूने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: पाल पुरवा में दूसरे भी हुई जांच, 29 ग्रामीणों के लिए रक्त नमूने
Thu, 08 Jan 2026 12:34 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:34 AM IST
विज्ञापन
रनियां(कानपुर देहात)। क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र खानचंद्रपुर में स्वास्थ्य विभाग लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहा है। एनजीटी के निर्देश पर विभाग ने जांच दायरा बढ़ाया है। खानचंद्रपुर से सटे पाल पुरवा में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को दूसरे दिन 29 लोगों के रक्त के नमूने लिए। टीम ने यहां दो दिन में कुल 55 नमूने लिए हैं।
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की 13 सदस्यीय टीम रनियां पीएचसी अधीक्षक विशाल भसीन के नेतृत्व में पाल पुरवा पहुंची। टीम ने घरों में जाकर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी जुटाई। सर्दी-खांसी के साथ मौसम को लेकर हो रही परेशानी के बारे में जानकारी की। हालांकि किसी ने टीम को किसी भी तरह की गंभीर समस्या नहीं बताई। कुछ गांव के ग्रामीणों ने खुजली की समस्या जरूरत बताई। टीम में मौजूद चिकित्सकों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करते हुए गांव में लगे हैंडपंप का पानी प्रयोग न करने की सलाह दी। इसके साथ ही साफ-सफाई रखने की सलाह दी।
टीम ने सुबह से लेकर देर शाम तक क्रोमियम जांच के लिए 29 लोगों के रक्त सैंपल लिए। सरवनखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार यादव ने बताया कि इस चरण में टीम की ओर से कुल 150 लोगों के नमूने लिए जाने हैं। टीम को 10 जनवरी तक नमूनों का लक्ष्य पूरा करना है। बुधवार को 29 नमूने लिए गए है। दो दिन में 55 नमूने लिए जा चुके है। सभी नमूने जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजे जाएंगे।
विज्ञापन
....................
खानचंद्रपुर, उमरन में यह है समस्या
रनियां औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े खानचंद्रपुर के मटियामऊ रोड पर सालों से क्रोमियम कचरा डंप रहने से यहां का भूजल दूषित हो गया। क्रोमियम कचरा निस्तारण में देरी से खानचंद्रपुर व उसके मजरा व पास के गांव उमरन का भूजल भी दूषित हो गया। इससे लोगों के शरीर में लाल दाने, खुजली आदि की पूर्व में परेशानियां हुईं। इसके बाद दूषित पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। स्थानीय प्रशासन द्वारा यहां लगे हैंडपंप बंद करा दिए गए हैं। गांव के लोगों को पाइप लाइन से टंकी के माध्यम से शुद्ध पानी मुहैया कराया जा रहा है। इधर कुछ ग्रामीण आज भी गांव में लगे हैंडपंप से पानी निकाल मवेशियों को नहलाने और कभी कभी उनके चारे में प्रयोग कर लेते हैं।
विज्ञापन
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की 13 सदस्यीय टीम रनियां पीएचसी अधीक्षक विशाल भसीन के नेतृत्व में पाल पुरवा पहुंची। टीम ने घरों में जाकर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी जुटाई। सर्दी-खांसी के साथ मौसम को लेकर हो रही परेशानी के बारे में जानकारी की। हालांकि किसी ने टीम को किसी भी तरह की गंभीर समस्या नहीं बताई। कुछ गांव के ग्रामीणों ने खुजली की समस्या जरूरत बताई। टीम में मौजूद चिकित्सकों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करते हुए गांव में लगे हैंडपंप का पानी प्रयोग न करने की सलाह दी। इसके साथ ही साफ-सफाई रखने की सलाह दी।
विज्ञापन
टीम ने सुबह से लेकर देर शाम तक क्रोमियम जांच के लिए 29 लोगों के रक्त सैंपल लिए। सरवनखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार यादव ने बताया कि इस चरण में टीम की ओर से कुल 150 लोगों के नमूने लिए जाने हैं। टीम को 10 जनवरी तक नमूनों का लक्ष्य पूरा करना है। बुधवार को 29 नमूने लिए गए है। दो दिन में 55 नमूने लिए जा चुके है। सभी नमूने जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजे जाएंगे।
विज्ञापन
....................
खानचंद्रपुर, उमरन में यह है समस्या
रनियां औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े खानचंद्रपुर के मटियामऊ रोड पर सालों से क्रोमियम कचरा डंप रहने से यहां का भूजल दूषित हो गया। क्रोमियम कचरा निस्तारण में देरी से खानचंद्रपुर व उसके मजरा व पास के गांव उमरन का भूजल भी दूषित हो गया। इससे लोगों के शरीर में लाल दाने, खुजली आदि की पूर्व में परेशानियां हुईं। इसके बाद दूषित पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। स्थानीय प्रशासन द्वारा यहां लगे हैंडपंप बंद करा दिए गए हैं। गांव के लोगों को पाइप लाइन से टंकी के माध्यम से शुद्ध पानी मुहैया कराया जा रहा है। इधर कुछ ग्रामीण आज भी गांव में लगे हैंडपंप से पानी निकाल मवेशियों को नहलाने और कभी कभी उनके चारे में प्रयोग कर लेते हैं।