एचबीटीयू में एक और फर्जीवाड़ा: अधूरे दस्तावेजों पर दे दी नौकरी, अभ्यर्थी ने तय तिथि के बाद लगाए दस्तावेज
एचबीटीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। अभ्यर्थी ने इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन में आवेदन किया था और तय तिथि के बाद प्रमाणपत्र लगाया गया था।
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कानपुर में हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में हुई गड़बड़ी की जांच अभी जारी है। ऐसे में गणित विभाग में एक अभ्यर्थी को अधूरे दस्तावेज पर ही नौकरी देने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थी ने ईडब्ल्यूएस (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) का प्रमाण पत्र ही नहीं लगाया है। इतना ही नहीं आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी हुए प्रमाण पत्र को भी स्वीकार कर लिया गया।
एचबीटीयू में गणित के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए आवेदन निकला था, जिसमें अभ्यर्थियों को सभी दस्तावेज के साथ 31 अक्तूबर 2021 तक ऑनलाइन आवेदन करना था और छह नवंबर तक हार्डकॉपी कार्यालय पहुंचानी थी। इसमें एक अभ्यर्थी ने ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में आवेदन किया, लेकिन प्रमाणपत्र नहीं लगाया। दस्तावेज पूरा न होने के बावजूद एकेडमिक परफार्मेंस इंडेक्स (एपीआई) को पूर्ण मानते हुए उसे योग्य मान लिया गया।
इसके अलावा यूपी सरकार ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र का एक फार्मेट जारी किया है। एचबीटीयू ने भी उल्लेख किया था कि अभ्यर्थी को इसी फार्मेट में प्रमाणपत्र बनवाकर जमा करना है। इसके बाद भी अभ्यर्थी ने दूसरे फार्मेट में प्रमाणपत्र जमा किया। वह भी पांच फरवरी 2022 को जारी हुआ। नियमत: 31 अक्तूबर 2021 से पहले जारी किए गए प्रमाणपत्र को लगाया जाना चाहिए।
आखिरकार ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कैसे हुआ
एपीआई में स्क्रीनिंग कमेटी सारे दस्तावेज चेक करती है। इसके बावजूद किसी की भी नजर इस अधूरे आवेदन पर नहीं पड़ी। साथ ही जब अभ्यर्थी के पास प्रमाणपत्र नहीं था तो ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कैसे कर लिया गया।
एचबीटीयू में नियुक्तियों में गड़बड़ी की लगातार शिकायत मिल रही है। ऐसे में निश्चित ही भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो जाएगा। दोबारा मिली शिकायतों की गहनता से जांच करवाई जाएगी। -आशीष पटेल, प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री