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संवेदनहीनता : कैथेटर हटवाने के लिए चार घंटे तक तड़पता रहा बुजुर्ग
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इटावा। जिला अस्पताल में बुधवार को डॉक्टर व कर्मियों की संवेदनहीनता देखने को मिली। हृदय रोग से पीड़ित 75 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर हालत में जिला अस्पताल में कैथेटर हटवाने के लिए पहुंचा तो चिकित्सक व कर्मी बहाना बनाकर उसे कई घंटे इधर-उधर टहलाते रहे। चार घंटे बाद उसे यह कहकर मना कर दिया कि वह यहां भर्ती नहीं हुए थे। इससे पेशाब की नली में सूजन बढ़ गई। पिता को तड़पते देख पुत्र ने निजी अस्पताल में लेकर जाकर कैथेटर निकलवाई।
बेदालपुर्वा निवासी जगदीश (75) को रविवार को सीने में तेज दर्द होने पर परिजन आयुर्विज्ञान विवि सैफई लेकर आए थे। मंगलवार को तबीयत ठीक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें छुट्टी दे दी। वहीं, डॉक्टरों ने चलने-फिरने में दिक्कत होने पर कैथेटर लगाए रखा। बुधवार को उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। परिजन उन्हें लेकर सुबह साढ़े 10 बजे संयुक्त जिला अस्पताल आ गए। यहां का पर्चा बनवाने के बाद जब परिजनों ने उन्हें दिखाने का प्रयास किया तो पहले तो कर्मी उन्हें इधर-उधर टहलाते रहे। इस बीच जगदीश के पेशाब की नली में जलन के बाद सूजन बढ़ गई। इससे वह तेज दर्द से तड़पने लगे। पुत्र नरोत्तम राजपूत ने चिकित्सकों से कैथेटर हटवाने की गुहार लगाई। डॉक्टर ने कैथेटर यह कहकर निकालने से मना कर दिया कि आपने मेडिकल कालेज में इलाज करवाया था। इनको वहीं लेकर जाओ। पुत्र ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अंत में पुत्र ने निजी अस्पताल लेकर जाकर पिता की कैथेटर हटवाई।
जिला अस्पताल में सुबह से लेकर शाम तक रहता हूं। मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर कैथेटर नहीं हटाई गई है तो बड़ी लापरवाही की बात है। इस मामले में ड्यूटी डॉक्टर व कर्मियों से पूछताछ की जाएगी। जांच में लापरवाही मिलने पर संबंधित डॉक्टर व कर्मी को कड़ी चेतावनी दी जाएगी। जिससे भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो।
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- डॉ. एमएम आर्या, सीएमएस
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बेदालपुर्वा निवासी जगदीश (75) को रविवार को सीने में तेज दर्द होने पर परिजन आयुर्विज्ञान विवि सैफई लेकर आए थे। मंगलवार को तबीयत ठीक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें छुट्टी दे दी। वहीं, डॉक्टरों ने चलने-फिरने में दिक्कत होने पर कैथेटर लगाए रखा। बुधवार को उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। परिजन उन्हें लेकर सुबह साढ़े 10 बजे संयुक्त जिला अस्पताल आ गए। यहां का पर्चा बनवाने के बाद जब परिजनों ने उन्हें दिखाने का प्रयास किया तो पहले तो कर्मी उन्हें इधर-उधर टहलाते रहे। इस बीच जगदीश के पेशाब की नली में जलन के बाद सूजन बढ़ गई। इससे वह तेज दर्द से तड़पने लगे। पुत्र नरोत्तम राजपूत ने चिकित्सकों से कैथेटर हटवाने की गुहार लगाई। डॉक्टर ने कैथेटर यह कहकर निकालने से मना कर दिया कि आपने मेडिकल कालेज में इलाज करवाया था। इनको वहीं लेकर जाओ। पुत्र ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अंत में पुत्र ने निजी अस्पताल लेकर जाकर पिता की कैथेटर हटवाई।
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जिला अस्पताल में सुबह से लेकर शाम तक रहता हूं। मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर कैथेटर नहीं हटाई गई है तो बड़ी लापरवाही की बात है। इस मामले में ड्यूटी डॉक्टर व कर्मियों से पूछताछ की जाएगी। जांच में लापरवाही मिलने पर संबंधित डॉक्टर व कर्मी को कड़ी चेतावनी दी जाएगी। जिससे भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो।
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- डॉ. एमएम आर्या, सीएमएस