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गनीमत रही नहीं आई नींद, वर्ना हमेशा के लिए सो जाते
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 03 Apr 2017 11:50 PM IST
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कोल्ड स्टोरेज से अमोनिया गैस लीकेज से दूसरे दिन भी परेशान रहे लोग
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फतेहपुर के जहानाबाद कस्बे के गरिमा कोल्ड स्टोर में अमोनिया गैस रिसाव हादसे का शिकार होने से बचे बिहारी मजदूर अभी भी दहशतजदा हैं। उनकी आंखों में मौत का मंजर अभी भी बसा है। यही वजह है कि इन चश्मदीद गवाहों की रुह आपबीती सुनाते सुनाते कांपने लगती है। मजूदरों का कहना है कि जिस जगह बिल्डिंग भरभरा कर ढही, वहीं पर उनकी नींद पूरी होती थी। गनीमत रही कि हादसा जल्दी हो गया और वह बाल-बाल बच गए। अगर हादसा रात में होता तो वह जिंदगी से हाथ धो बैठते।
जिला मुख्यालय से 58 किलोमीटर दूर बसे एतिहासिक कस्बे के इस कोल्ड स्टोर में काफी संख्या में बिहारी मजूदर काम करते हैं। मजदूर कुमोद शर्मा ने बताया कि आलू की लोडिंग का काम सुबह हुआ था। शाम साढ़े सात बजे वह लोग हाथ पैर धोकर भोजन पकाने जा रहे थे तभी दक्षिण की दीवार ढह गई। इसके ढहने से अमोनिया गैस का पाइप फटा और दुर्गंध फैल गई। अमोनिया गैस फैलने की भनक लगते ही जो जैसी हालत में था, बाहर निकलने के जतन में जुट गए। उनके साथ दर्जन भर मजदूर कोल्ड स्टोर की दीवार फांद कर किसी तरह बाहर निकल सके। बकौल कुमोद, वह सभी लोग खाना पीना करने के बाद दक्षिण की दीवार के बगल में ही खुले में सोते थे। गनीमत रही कि हादसा जल्दी हो गया। अगर यह रात नौ बजे के बाद होता तो किसी की भी जान सलामत न बचती। यह दहशत की असर था कि आपबीती सुनाते सुनाते एक अन्य बिहारी मजदूर श्याम सुंदर कांपने लगा। जिसे कुमोद ने साहस बंधाते हुए सामान्य किया।
मलबे में अपनी बोरियां ढूंढते रहे किसान
गरिमा कोल्ड स्टोर ढहने की खबर पर आलू भंडारण करने वाले किसान सुबह ही मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबीं आलू की बोरियां देख किसानों के होश गुम हो गए। स्टोर के गेट पर किसानों की भीड़ लगी रही। अपनी अपनी बोरियां ढूंढने की कवायद करते रहे। किसानों ने स्टोर प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जहानाबाद क्षेत्र के इस कोल्ड स्टोर में पौ फटते ही वे किसान पहुंचने शुरू हो गए थे, जिनके आलू का भंडारण यहां था। मलबे में घुस कर किसान अपनी बोरियाें की पहचान कर रहे थे।
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जिला मुख्यालय से 58 किलोमीटर दूर बसे एतिहासिक कस्बे के इस कोल्ड स्टोर में काफी संख्या में बिहारी मजूदर काम करते हैं। मजदूर कुमोद शर्मा ने बताया कि आलू की लोडिंग का काम सुबह हुआ था। शाम साढ़े सात बजे वह लोग हाथ पैर धोकर भोजन पकाने जा रहे थे तभी दक्षिण की दीवार ढह गई। इसके ढहने से अमोनिया गैस का पाइप फटा और दुर्गंध फैल गई। अमोनिया गैस फैलने की भनक लगते ही जो जैसी हालत में था, बाहर निकलने के जतन में जुट गए। उनके साथ दर्जन भर मजदूर कोल्ड स्टोर की दीवार फांद कर किसी तरह बाहर निकल सके। बकौल कुमोद, वह सभी लोग खाना पीना करने के बाद दक्षिण की दीवार के बगल में ही खुले में सोते थे। गनीमत रही कि हादसा जल्दी हो गया। अगर यह रात नौ बजे के बाद होता तो किसी की भी जान सलामत न बचती। यह दहशत की असर था कि आपबीती सुनाते सुनाते एक अन्य बिहारी मजदूर श्याम सुंदर कांपने लगा। जिसे कुमोद ने साहस बंधाते हुए सामान्य किया।
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मलबे में अपनी बोरियां ढूंढते रहे किसान
गरिमा कोल्ड स्टोर ढहने की खबर पर आलू भंडारण करने वाले किसान सुबह ही मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबीं आलू की बोरियां देख किसानों के होश गुम हो गए। स्टोर के गेट पर किसानों की भीड़ लगी रही। अपनी अपनी बोरियां ढूंढने की कवायद करते रहे। किसानों ने स्टोर प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जहानाबाद क्षेत्र के इस कोल्ड स्टोर में पौ फटते ही वे किसान पहुंचने शुरू हो गए थे, जिनके आलू का भंडारण यहां था। मलबे में घुस कर किसान अपनी बोरियाें की पहचान कर रहे थे।
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