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Reality Check: पुलिस-प्रशासन से लेकर प्रदूषण विभाग तक के अफसरों की गाड़ियों का PUC नहीं, पढ़ें अमर उजाला पड़ताल

Wed, 22 Nov 2023 09:33 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 22 Nov 2023 09:33 AM IST
सार

Kanpur News: एआरटीओ प्रवर्तन ने कहा कि किसी भी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) यदि नहीं है, तो उसके खिलाफ 10 हजार रुपये के चालान होता है। किसी वाहन का यदि प्रमाण पत्र एक्सपायर हो गया है, तो एम परिवहन एप या पोर्टल पर एक्सपायरी डेट दिखाता है।

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Amar Ujala Reality Check, There is no PUC for the vehicles of officers from police administration to pollution
अधिकारियों की गाड़ियों का पीयूसी भी नहीं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सर्दी के मौसम में राजधानी दिल्ली से लेकर कानपुर तक वातावरण में प्रदूषण बढ़ा हुआ है। प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में एक वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है। यही वजह है कि सरकार ने वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) बनवाना अनिवार्य किया हुआ है। ऐसा नहीं करने पर आरटीओ की ओर से 10 हजार का चालान करने का नियम भी है।

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चौंकाने वाली बात तो यह है कि प्रदूषण को नियंत्रण करने वाले विभाग से लेकर पुलिस, प्रशासन, जीएसटी विभाग, नगर निगम से जुड़े सभी प्रमुख अधिकारियों के वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र लंबे समय से नहीं बने हैं। जिनके बने भी हैं, वे कई महीने से एक्सपायर हैं। इन सभी सरकारी विभागों में लगे वाहनों का संचालन प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
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ऐसे में अफसरों को लगता है कि जिस वाहन से वे चल रहे हैं, उसके पीयूसी की चिंता वाहन संचालक एजेंसी करेगी। जबकि एजेंसी मालिक इस गुररू में हैं कि उनके वाहन पर शहर के आलाधिकारी चल रहे हैं, तो इन वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत ही क्या है। इसी अनदेखी के चलते प्रदूषण रोकने को लेकर होने वाले प्रयास की धज्जियां उड़ रही हैं।

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प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने के लिए एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है
इन वाहनों के प्रदूषण की स्थिति बताने के पीछे वजह यह है कि जब आलाधिकारियों के वाहनों की यह स्थिति है, तो शहर में रोजाना दौड़ रहे करीब छह लाख वाहनों की स्थिति की पड़ताल कैसे होती होगी। वैसे शहर में अलग-अलग स्थानों पर आरटीओ की ओर से प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने के लिए एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। जहां से किसी भी वाहन के नंबर के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किसी वाहन का पीयूसी बना है या नहीं।

आम जनता तो चालान के डर से बनवा लेती है पीयूसी
प्रदूषण से जुड़े मामले को इस वजह से भी उठाया जा रहा है कि सरकारी विभाग के अधिकारी भी जागरूक हों, क्योंकि आम जनता तो चालान कटने के डर से अपने वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं। शहर की प्रथम नागरिक महापौर प्रमिला पांडेय, कानपुर के डीएम विशाख जी. से लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों की गाड़ियां भी बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) के चल रही हैं।

कुछ प्रमुख गाड़ियों में पीयूसी का स्थिति

  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित मिश्रा की गाड़ी (यूपी 32 एलएक्स 5690) का पीयूसी लंबे समय से बना ही नहीं है। इस विभाग की बाकी दो गाड़ियां भी बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के चल रही हैं।
  • महापौर प्रमिला पांडेय की गाड़ी (यूपी 78-बीजी 0756) की कार का पीयूसीसी 13 दिसंबर 22 को खत्म हो चुका है। इनकी गाड़ी की फिटनेस भी नहीं है।
  • पुलिस कमिश्नर डॉ. आरके स्वर्णकार की गाड़ी (यूपी 70 एजी 3590) का पीयूसी 5 जुलाई 2023 को एक्सपायर हो चुका है।
  • ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर नीलाब्जा चौधरी की गाड़ी (यूपी 78 बीजी 0444) का पीयूसी भी एक्सपायर हो चुका है।
  • ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी की गाड़ी (यूपी 78 बीजी 0918) का पीयूसी 23 जून एक्सपायर हो चुका है।
  • डीएम विशाख जी. की गाड़ी (यूपी 78 ईएक्स 4584) का पीयूसीसी नहीं है।
  • नगर आयुक्त जीएन शिवशरणप्पा की गाड़ी (यूपी 78-बीजी 0752) का पीयूसीसी 28 जनवरी 2023 को खत्म हो चुका है। फिटनेस भी नहीं है।
  • जीएसटी के अपर आयुक्त एसआईबी की गाड़ी (यूपी 78 बीजी 0981) का पीयूसीसी और इंश्योरेंस दोनों ही नहीं है।
  • जीएसटी सचल दल की गाड़ी (यूपी 32 ईजी 1627) का हाल भी अन्य अधिकारी जैसा है। न पीयूसीसी और न ही इंश्योरेंस।

ये अफसर भी बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट लिए चलते हैं

  • एसडीएम सदर अजय गौतम (यूपी 78 एचएफ 9214), एडीएम एफआर राजेश कुमार (यूपी 77 एक्स 0697) का पीयूसीसी 20 अगस्त को खत्म हो गया।

दोनों आरटीओ की गाड़ियों में मिला पीयूसी

  • आरटीओ प्रशासन राजेश सिंह की गाड़ी (यूपी 78 जीएन 9798) में तीन सितंबर 2024 तक और आरटीओ प्रवर्तन विदिशा सिंह की गाड़ी (यूपी 32 आरएन 3927) में पीयूसीसी एक अगस्त 2024 तक है।

इन वजहों से फैलता है प्रदूषण
सड़कों से उठने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं, औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकले वाला धुआं प्रमुख है। खुले में रखी निर्माण सामग्रियों रेत, बालू भी इसकी बड़ी वजह है।

पीयूसी बनवाने के ये है मानक

  • यदि वाहन का इंजन बीसए-4 है तो उसके लिए हर छह महीने में पीयूसी बनवाना पड़ता है।
  • यदि वाहन का इंजन बीसए-6 है तो उसके लिए हर एक साल में पीयूसी बनवाना पड़ता है।

अपील: माना गाड़ियां आउट सोर्सिंग की हैं, पर जिम्मेदारी आपकी भी
पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां छोड़ दें तो बाकी विभागों में गाड़ियां आउट सोर्सिंग पर लगी हैं। हालांकि जिम्मेदारी इन वाहनों से चलने वाले अफसरों की भी है। वे अपने वाहनों को हर लिहाज से दुरुस्त रखें।

किसी भी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) यदि नहीं है, तो उसके खिलाफ 10 हजार रुपये के चालान होता है। किसी वाहन का यदि प्रमाण पत्र एक्सपायर हो गया है, तो एम परिवहन एप या पोर्टल पर एक्सपायरी डेट दिखाता है। किसी ने लंबे समय से पीयूसी चेक नहीं कराया है, तो एनए यानि नॉट अप्लायड दिखाता है।  -मानवेंद्र सिंह एआरटीओ प्रवर्तन

डीएम बोले- पीयूसी बनवाना होगा अनिवार्य
वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनाए जाने के संबंध में जब जिलाधिकारी विशाख जी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसे लेकर वह एक आदेश जारी कर रहे हैं, जिसमें सभी वाहनों का पीयूसी बनवाना अनिवार्य होगा। कहा कि सभी सरकारी वाहनों की विशेष मॉनीटरिंग कराई जाएगी।

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