अमर उजाला एक्सक्लूसिव: कोरोना काल के दौरान बंद कई ट्रेनों और बसों का संचालन अभी तक नहीं, यात्रियों को हो रही है परेशानी
अपने-अपने फायदे के लिए रेलवे और रोडवेज ने कोरोना के दौरान बंद कई ट्रेनों-बसों को अब तक संचालित नहीं किया है। इससे यात्रियों को बेहद परेशानी हो रही है। लखनऊ जाने वाले 35 हजार में से 20 हजार यात्री अभी भी परेशान हैं। वहीं, प्रयागराज रूट के आठ हजार दैनिक यात्री ट्रेनों से सफर नहीं कर पा रहे हैं।
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कोरोना का संक्रमण शुरू होने पर मार्च-2020 में संपूर्ण लॉकडाउन और उस दौरान उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण प्रभावित हुई परिवहन व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं आई है। रेलवे और रोडवेज ने अब तक पूरी क्षमता के साथ ट्रेनों व बसों का संचालन शुरू नहीं किया है। अब हालात सामान्य हैं। ऐसे में ट्रेनों और बसों का रूटों पर बहुत कम होना यात्रियों को अखर रहा है।
प्रयागराज और लखनऊ रूट पर मेमू और इंटरसिटी जैसी लोकल ट्रेनें बंद होने से दैनिक यात्री सबसे ज्यादा परेशान हैं। ट्रेनें न होने से नौकरीपेशा बसों या डग्गामार वाहनों से आनाजाना कर रहे हैं। इस समस्या को अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने शुक्रवार को प्रयागराज में रेलवे अफसरों के साथ हुई बैठक में भी उठाया था। बताया जा रहा है कि रेलवे ने अपने फायदे के लिए दैनिक यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। दरअसल, ये यात्री एमएसटी से आनाजाना करते हैं, जो सामान्य किराये से लगभग चार गुना तक सस्ती पड़ती है। इसीलिए कोरोना की आड़ में बंद ट्रेनों को अब तक नहीं चलाया जा रहा है।
लखनऊ की 11 में से दो जोड़ी मेमू ही चल रहीं, प्रयागराज इंटरसिटी बंद
कानपुर से लखनऊ जाने और आने के लिए कोरोना के पहले 11 जोड़ी मेमू ट्रेनें चलती थीं। इससे रोजाना औसतन 35 हजार यात्री आनाजाना करते थे। हर आधे से एक घंटे के लिए लखनऊ से कानपुर आने-जाने के लिए यात्रियों को मेमू मिल जाती थी। अब सिर्फ दो जोड़ी मेमू चलती हैं। इन दोनों मेमू और लंबी दूरी की अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्री आते-जाते हैं। करीब 20 हजार यात्री अभी भी परेशान हैं।
इसके पहले प्रयाग संगम एक्सप्रेस सुबह पौने 10 बजे है। यह फतेहपुर नहीं, बल्कि उन्नाव, रायबरेली के लालगंज, ऊंचाहार होकर चलती है। ऐसी कोई ट्रेन नहीं है, जिससे नौकरीपेशा लोग सुबह जाकर शाम को कानपुर लौट सकें। पहले प्रयागराज के लिए ट्रेन नंबर 22441/22442 कानपुर सेंट्रल से प्रयागराज तक चलती थी, जिसे बाद में बढ़ाकर चित्रकूट तक कर दिया गया था।
कानपुर से यह ट्रेन सुबह साढ़े छह बजे चलती थी। फतेहपुर सुबह पौने आठ बजे पहुंच जाती थी। दो मिनट बाद वहां से छूटकर प्रयागराज सुबह 9:45 बजे पहुंचती थी। इसके बाद ट्रेन 12:20 बजे चित्रकूट पहुंचती थी। वापसी में यह ट्रेन चित्रकूट से दोपहर 3:55 बजे और प्रयागराज से शाम 6:30 बजे छूटती थी। फतेहपुर से रात 8:20 बजे छूटती थी और रात 9:40 बजे कानपुर सेंट्रल आ जाती थी। अभी प्रयागराज जाने के लिए सुबह 5:25 बजे ब्रह्मपुत्र मेल डेली एक्सप्रेस है, लेकिन दिल्ली से आने की वजह से इतनी जगह ट्रेन में नहीं होती है कि कानपुर से यात्रा करने वाले करीब आठ हजार दैनिक यात्री इससे आनाजाना कर सकें।
कोरोना में बंद की गईं बसों को रोडवेज ने पूरी क्षमता के साथ चला तो दिया है, लेकिन दो रूट ऐसे हैं, जिन पर बसें 20 से 30 प्रतिशत तक कम हैं। इसकी बड़ी वजह सड़क का खराब होना है। रायबरेली रूट पर 25 प्रतिशत बसें कम कर दी गई हैं। अकेले किदवईनगर डिपो की रायबरेली रूट पर चलने वाली 32 बसों में से सिर्फ चार चल रही हैं। पहले इस रूट पर करीब 100 बसें चलती थीं, जो रायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुर, अमेठी, सुल्तानपुर जाती-आती थीं।
अब बमुश्किल 60 बसें चल रही हैं। इसके अलावा बांदा रूट पर चलने वाली करीब 70 बसों में 55 से 60 चल रही हैं। इस कारण इन यात्रियों का लोड ट्रेनों की तरफ शिफ्ट हुआ है। जबलपुर तक चलने वाली चित्रकूट एक्सप्रेस, कर्वी इंटरसिटी, कानपुर-मानिकपुर मेमू और बेतवा एक्सप्रेस में यात्री सफर कर रहे हैं। बसें कम होने से करीब दो हजार यात्री ट्रेनों या डग्गमार वाहनों की तरफ शिफ्ट हुए हैं।
कोरोना में बंद प्रयागराज इंटरसिटी अभी नहीं चालू हुई है। तमाम यात्रियों ने इसे बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में मंडल के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। कोशिश होगी कि सुबह नौकरीपेशा लोग समय से ट्रेन से अपनी यात्रा कर सकें। इस संबंध में रेलवे जल्द कोई फैसला लेगा। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, निदेशक, कानपुर सेंट्रल
कोरोना के बाद सभी रूटों पर बसों को बहाल कर दिया गया है। रायबरेली और बांदा रूट की सड़क बहुत खराब होने से बसें दोगुना समय लेती हैं। इसलिए इनके फेरे स्वत: कम हो जाते हैं। बस मालिक इन रूटों पर बसों का अनुबंध नहीं करा रहे हैं, क्योंकि सड़क खराब होने से बसें जल्दी खटारा हो रही हैं। - राजेश सिंह, एआरएम, झकरकटी बस अड्डा