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Kanpur: डॉ. कुमार विश्वास बोले- कानपुर के श्रोता गंभीर, इसलिए आज वही कविताएं सुनाऊंगा जो बहुत कम सुनी गईं हों
Tue, 19 Mar 2024 12:51 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:51 AM IST
सार
अमर उजाला और नगर निगम के सहयोग से टीएसएच में हुए कवि सम्मेलन में डॉ. कुमार विश्वास ने अनजान आयामों को छुआ। उनकी हर रचना पर तालियां बजी। चार और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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काव्य रंग कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मांग की सिंदूर रेखा तुमसे ये पूछेगी कल, यूं मुझे सिर पर सजाने का तुम्हें अधिकार क्या है, गर वो सब कुछ बचपना था, तो कहो फिर प्यार क्या है...। निजी जज्बातों को उकेरती डॉ. कुमार विश्वास की इस रचना ने सुनने वालों को एक लम्हे के लिए जैसे कहीं गुम कर दिया। फिर जैसे चैतन्य हुए तो सभागार तालियों से गूंज उठा। कवि की रचनाओं ने जिंदगी के कुछ अनजाने आयामों को भी छुआ था। अमर उजाला और नगर निगम के बैनर तले दि स्पोर्ट्स हब (टीएसएच) में रविवार शाम आयोजित इस कवि सम्मेलन में कविताओं के अलग-अलग रस बिखरे। श्रोता प्रेम रस से भावनाओं में बहे तो कभी हास्य रचनाओं ने उन्हें गुदगुदाया।
डॉ. कुमार विश्वास ने मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत अपने संघर्ष की कहानी से शुरू की। यह कहानी नए रचनाकारों के सबक भी थी। सधे हुए जुमलों को इस शोख अंदाज से अदा किया कि श्रोता खिलखिला उठे। द्वारिकाधीश का वृतांत सुनाकर गंभीर भी किया। दुष्यंत कुमार का शेर ‘मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान है...’ और अकबर इलाहाबादी का शेर ‘जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो’ भी सुनाया। सभागार में कुमार की हर बात पर तालियां बजीं और श्रोता उनके जादू में बंधते गए। उन्होंने अपनी रचना सुनाई बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़ेे सह नहीं पाया...।
इसके बाद मैं अपने गीत गजलों को उसी के नाम करता हूं, जहां हर दिन सिसकना है जहां हर रात गाना है। हार गया तन मन पुकारकर तुम्हें कितने एकाकी हैं प्यार कर तुम्हें...पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं। इस मौके पर महापौर प्रमिला पांडेय ने डॉ. कुमार विश्वास का गीत कोई दीवाना कहता है सुनाया तो लोगों ने जमकर ठहाके लगाए। डॉ. कुमार विश्वास ने मंच का संचालन भी किया।
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सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है...
इस मौके पर लखनऊ की कवियत्री कविता तिवारी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की तो माहौल आध्यात्मिक हो गया। उन्होंने सुनाया सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है, ऐसा लगा तू मधुरम वीणा बजा रही है। इसके बाद श्लोक से मंत्र तक की यात्रा नामक कविता प्रस्तुत की। सिया तेरा अभिशापित है राम... सुनाकर भी खूब वाहवाही लूटी।
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डॉ. कुमार विश्वास ने मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत अपने संघर्ष की कहानी से शुरू की। यह कहानी नए रचनाकारों के सबक भी थी। सधे हुए जुमलों को इस शोख अंदाज से अदा किया कि श्रोता खिलखिला उठे। द्वारिकाधीश का वृतांत सुनाकर गंभीर भी किया। दुष्यंत कुमार का शेर ‘मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान है...’ और अकबर इलाहाबादी का शेर ‘जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो’ भी सुनाया। सभागार में कुमार की हर बात पर तालियां बजीं और श्रोता उनके जादू में बंधते गए। उन्होंने अपनी रचना सुनाई बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़ेे सह नहीं पाया...।
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इसके बाद मैं अपने गीत गजलों को उसी के नाम करता हूं, जहां हर दिन सिसकना है जहां हर रात गाना है। हार गया तन मन पुकारकर तुम्हें कितने एकाकी हैं प्यार कर तुम्हें...पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं। इस मौके पर महापौर प्रमिला पांडेय ने डॉ. कुमार विश्वास का गीत कोई दीवाना कहता है सुनाया तो लोगों ने जमकर ठहाके लगाए। डॉ. कुमार विश्वास ने मंच का संचालन भी किया।
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सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है...
इस मौके पर लखनऊ की कवियत्री कविता तिवारी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की तो माहौल आध्यात्मिक हो गया। उन्होंने सुनाया सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है, ऐसा लगा तू मधुरम वीणा बजा रही है। इसके बाद श्लोक से मंत्र तक की यात्रा नामक कविता प्रस्तुत की। सिया तेरा अभिशापित है राम... सुनाकर भी खूब वाहवाही लूटी।
अब कूड़ा, फेंकने वाले और उसका घर साफ कर देते हैं...
इसके बाद बुलंदशहर के कुशल कुशलेन्द्र ने अबकी बार चार सौ पार, नारे की चुटकी लेते हुए सुनाया कि कैसे इसकी आड़ में पत्नी ने जेब से चार सौ रुपये पार कर दिए। राजनीतिक कटाक्ष- पहले कोई कूड़ा फेंके तो कूड़ा साफ करते थे। अब कूड़ा, फेंकने वाले और उसका घर तीनों साफ कर देते हैं, खूब पसंद किया गया। बाराबंकी के गजेंद्र प्रियांशु ने सुनाया साजन है जिनके घर में उनके दुख भगा गई होली, साजन हैं जिनके परदेश में उनके तन मा आग लगा गई होली। उनकी पांव बेचकर सफर खरीदे, सफर बेचकर राहें... भी खूब पसंद की गई।
इसके बाद बुलंदशहर के कुशल कुशलेन्द्र ने अबकी बार चार सौ पार, नारे की चुटकी लेते हुए सुनाया कि कैसे इसकी आड़ में पत्नी ने जेब से चार सौ रुपये पार कर दिए। राजनीतिक कटाक्ष- पहले कोई कूड़ा फेंके तो कूड़ा साफ करते थे। अब कूड़ा, फेंकने वाले और उसका घर तीनों साफ कर देते हैं, खूब पसंद किया गया। बाराबंकी के गजेंद्र प्रियांशु ने सुनाया साजन है जिनके घर में उनके दुख भगा गई होली, साजन हैं जिनके परदेश में उनके तन मा आग लगा गई होली। उनकी पांव बेचकर सफर खरीदे, सफर बेचकर राहें... भी खूब पसंद की गई।
मोहब्बत सिर्फ खर्चों की बड़ी लंबी कहानी है...
आगरा के हास्य कवि रमेश मुस्कान ने विकास दुबे की गाड़ी पलटने वाले मामले पर पुलिस की मौज ली। उन्होंने गीत सुनाया कि मोहब्बत सिर्फ खर्चों की बड़ी लंबी कहानी है, कभी पिक्चर दिखानी है कभी साड़ी दिलानी है। कानपुर के गुटखा पर व्यंग करते हुए कहा ये किसी ने रंग नहीं लगाया गुटखा थूका है।
आगरा के हास्य कवि रमेश मुस्कान ने विकास दुबे की गाड़ी पलटने वाले मामले पर पुलिस की मौज ली। उन्होंने गीत सुनाया कि मोहब्बत सिर्फ खर्चों की बड़ी लंबी कहानी है, कभी पिक्चर दिखानी है कभी साड़ी दिलानी है। कानपुर के गुटखा पर व्यंग करते हुए कहा ये किसी ने रंग नहीं लगाया गुटखा थूका है।