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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्सः महिलाओं ने बुलंद की सशक्तीकरण की आवाज

Fri, 11 Jan 2019 01:52 PM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: gaurav gaurav Updated Fri, 11 Jan 2019 01:52 PM IST
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amar ujala aparajita event in kanpur women raised voice for empowerment
कानपुर में अपराजिता कार्यक्रम
समाज में बदलाव हुआ है लेकिन अभी कई बड़े बदलावों की जरूरत है। महिलाओं को सशक्त करने से पहले जरूरत है जागरुकता की। जागरुकता हर क्षेत्र में होनी चाहिए, फिर चाहे शिक्षा हो या कानून, सेहत हो या फिर अधिकारों की बात। जब तक महिलाएं जागरूक नहीं होंगी तब तक सशक्तीकरण की बात करना ठीक नहीं रहेगा। यह कहना है शहर की प्रबुद्ध वर्ग की महिलाओं का। वह गुरुवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत महिला सशक्तीकरण विषय पर आयोजित परिचर्चा में भाग लेने अमर उजाला कार्यालय कानपुर पहुंची थीं। अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ीं इन महिलाओं ने खुलकर विचार रखे।
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परिचर्चा में कैनरी लंदन की निदेशिका सरिता दुबे, मनोचिकित्सक डॉ. सुरभि सिंह, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिता मेहरोत्रा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बंदना शर्मा, सीनियर ऑडिटर नंदिता शर्मा, मार्केटिंग हेड अनीता अवस्थी, सब इंस्पेक्टर वर्षा श्रीवास्तव, आमोलिक कैटरर दीप्ति दुबे, वीएलसीसी की रानू अग्रवाल, कल्पा सेल्स की कामिनी अग्रवाल, बबिता अग्रवाल, पोरवाल बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक रिचा पोरवाल, एनजीओ हेड संध्या गुप्ता, पीएसआईटी की चेयरपर्सन निर्मला सिंह, काउंसलर सीमा जैन, अपोलो ग्रुप की सचिव ममता बुधौलिया, कॉलीवुड एकेडमी की दीपिका मेहरोत्रा, ज्ञानस्थली स्कूल, गोपाल नगर की प्रिंसिपल फाकेहा मजहर, होम मेकर रश्मि प्रेमी, लाफिंग बुद्धा एकेडमी की संध्या सिंह और उत्कर्ष एकेडमी की निदेशक अलका दीक्षित शामिल हुईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता काउंसलर सीमा जैन ने की। डॉ बंदना शर्मा ने सर्वाइकल कैंसर को लेकर जनजागरुकता बढ़ाने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने वैक्सीनेशन पर भी जोर दिया। नंदिता शर्मा ने विशाखा गाइडलाइन के कई सुझाव दिए। रश्मि प्रेमी ने पाठ्यक्रमों में बदलाव का सुझाव दिया ताकि बच्चे बचपन से ही अपने अधिकार जान सकें।
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मानसिक रूप से हों मजबूत

amar ujala aparajita event in kanpur women raised voice for empowerment
अपराजिता कार्यक्रम
महिलाएं सशक्त तभी होंगी जब वह मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। इसके लिए ऐसे कार्यक्रमों का होना जरूरी है जो महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से बताएं।- सरिता दुबे, निदेशिका, केनरी लंदन

आत्मविश्वास बेहद जरूरी
आत्मविश्वास की कमी महिलाओं को कमजोर बनाती हैं। महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाने के लिए प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन करना बेहद जरूरी है। -डॉ. सुरभि सिंह, मनोचिकित्सक

खुद को खुश रखना होगा
महिलाएं जान लें कि वह दूसरों को खुश रखने के लिए चाहे जितनी भी कोशिश कर लें लेकिन खुद को खुश रखने का काम उन्हें खुद ही करना पड़ेगा। खुद से अपनी पहचान करें तभी दूसरे आपको पहचानेंगे। -डॉ मोहिता मेहरोत्रा, दंत रोग विशेषज्ञ

स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हों
सर्वाइकल कैंसर तेजी से फैल रहा है। बहुत कम महिलाओं को यह पता होगा कि सर्वाइकल वैक्सीन आती है जो 9 से 14 साल तक की बच्चियों को लगे तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। ऐसे कई मुद्दों पर आगे भी चर्चा होनी चाहिए। -डॉ. बंदना शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ

कौशल विकास भी जरूरी
महिलाओं को अपराजिता बनाने के लिए सबसे जरूरी है स्वावलंबी होना। कौशल विकास कार्यक्रम से महिलाओं को काफी लाभ मिलेगा। -नंदिता शर्मा, सीनियर ऑडिटर   


खुद की पहचान बनाएं
जब महिलाएं खुद में सशक्त होंगी तभी वह दूसरों का सहारा बन सकती है। खुद की पहचान बनाएं। मानसिक रूप से मजबूती भी जरूरी है। -अनीता अवस्थी, मार्केटिंग हेड


अपनी मदद खुद करें
परिवार के प्रेशर को तब तक मानें जब तक आपको ठीक लगे। अगर आपके साथ गलत हुआ है तो बेझिझक आगे बढ़कर अपने लिए लड़ें। खुद की रुचि के अनुसार ही काम करें। ---वर्षा श्रीवास्तव, सब इंस्पेक्टर

महिलाएं सब कुछ कर सकती
एक महिला ही सब कुछ कर सकती हैं। परिवार भी देख सकती है, बच्चों को और खुद को स्थापित भी कर सकती है। थोड़ा सा आत्मविश्वास बढ़ा लें तो सारी राह आसान हो जाएगी। --दीप्ति दुबे, आमोलिक कैटरर

शार्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम हों
कई महिलाओं, युवतियों को सेंटर में ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सके। अगर ऐसे शार्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन हो तो महिलाओं के लिए बेहतर होगा। ---रानू अग्रवाल, वीएलसीसी

घर संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी
जो महिलाएं घर भी संभालती हैं, वह भी खुद को कमजोर न माने। घर संभालना भी अपने आप में बड़ा काम है। समाज में बड़ा योगदान होममेकर का भी होता है। ---कामिनी अग्रवाल, कल्पा सेल्स

किसी भी उम्र से करें शुरूआत
काम शुरू करने की कोई उम्र नहीं होती है। मैं भी अपने बच्चों की जिम्मेदारियों को पूरा कर चुकी हूं। अब खुद को स्थापित करने के लिए प्रयासरत हूं।-बबिता अग्रवाल, कल्पा सेल्स  

 

दूसरों को भी सिखाया काम

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डेमो
एनजीओ के साथ जुड़ी। दरी बनाने का काम खुद भी सीखा और लड़कियों को सिखाया। बच्चे बड़े हो जाएं फिर से काम करूंगी। हर महिला यही सोच रखें तभी समाज का विकास होगा। ---रिचा पोरवाल, निदेशक, पोरवाल बिल्डटेक प्रा. लि.

हर क्षेत्र में जागरूकता जरूरी
कई स्कूलों में हाइजीन और छेड़छाड़ की घटनाओं के बारे में बताया। आज भी हर क्षेत्र में महिलाओं को जागरूकता की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जाए। ---संध्या गुप्ता, एनजीओ हेड

पाठ्यक्रम में हो बदलाव
मौजूदा वक्त में स्कूल के कोर्स में बदलाव की जरूरत आ गई है। शुरुआत से ही बच्चों को कानून और अधिकारों के बारे में बताया जाए। इतिहास और नागरिकशास्त्र की तरह ये भी कोर्स में शामिल हो। यह पढ़ाई बेटे और बेटियों दोनों के लिए जरूरी है। ---रश्मि प्रेमी, होममेकर  

घर से करें शुरुआत
महिलाओं या बेटियों को सशक्त करने की शुरूआत घर से ही करें। बेटी के जन्म के समय मुंह बनाने वाले अपने ही होते हैं। यहां बदलाव की जरूरत हैं। जब बेटी के जन्म पर हर घर में खुशी मनाई जाने लगे तब समझें समाज बदल रहा है। -निर्मला सिंह, चेयरपर्सन, पीएसआईटी

जिंदगी के फैसले खुद लें
जिंदगी के फैसले खुद लेने की आदत डालें। जिंदगी में काश शब्द की गुंजाइश न रखें। तभी तक काम करें जब तक आपका स्वास्थ्य इजाजत दे रहा हो। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी बेहद जरूरी है। ---सीमा जैन, काउंसलर

दृढ़ निश्चयी बनें
दृढ़ निश्चयी बनना बेहद जरूरी है। अगर कुछ मन में ठान लें तो उसे पूरा कर गुजरें। लड़के और लड़कियां दोनों ही समस्याएं झेलते हैं। ये आपके ऊपर हैं कि इसे कैसे सुलझाती हैं। ---ममता बुधौलिया, सचिव, अपोलो इंस्टीट्यूट

सेक्स एजूकेशन भी जरूरी
समाज में महिलाओं के प्रति बदलाव तो आया है। आज महिलाएं देश चला रहीं हैं। बच्चों को सेक्स एजूकेशन के बारे में बताना भी जरूरी हो गया है। ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहने चाहिए। -दीपिका मेहरोत्रा, कॉलीवुड एकेडमी

भेदभाव खत्म करें
हमेशा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात की जाती है। पहले तो इसी भेदभाव को खत्म करें। बेटी के साथ बेटों को भी पढ़ाओ जागरूक बनाओ। साथ ही दोनों को ही अच्छे संस्कार दिए जाएं। - फाकेहा मजहर, प्रिंसिपल, ज्ञानस्थली स्कूल, गोपाल नगर

ब्रिज कोर्स की हो शुरुआत
कानून और अधिकार की पाठशालाओं के लिए ब्रिज कोर्स की शुरूआत करें। समय-समय पर छात्र-छात्राओं को स्कूल में इसकी जानकारी दी जाएं। -संध्या सिंह, निदेशिका, लाफिंग बुद्धा अकादमी

कन्यादान न करने का लें संकल्प
आपकी बेटी कोई वस्तु नहीं है जिसका आप दान करेंगे। बेटियों को दान करना बंद करें। बेटियों का सम्मान उनको घर से मिलना शुरू होना चाहिए। उनके अधिकार उनको घर से ही बताएं जाएं। -अलका दीक्षित, निदेशिका, उत्कर्ष एकेडमी
 
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