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ट्रांस गंगा सिटी: आवंटियों को छह प्रतिशत ब्याज के साथ वापस होगी धनराशि
Sat, 03 Aug 2019 10:33 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 03 Aug 2019 10:33 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) में व्यावसायिक भूखंडों/संपत्तियों को अब ऑनलाइन नीलामी के जरिए आवंटित किया जाएगा। यूपीसीडा के लखनऊ स्थित मुख्यालय में हुई यूपीसीडा की बोर्ड बैठक में औद्योगिक भूखंडों की ई-नीलामी कराने पर सहमति बन गई।
साथ ही उन्नाव स्थित ट्रांसगंगा सिटी के आवासीय भूखंडों के आवंटियों को छह फीसदी ब्याज के साथ आवंटन के लिए जमा धनराशि वापस करने पर भी सहमति बनी है। उद्योग लगाने में देरी होने पर मिलने वाली समय विस्तारण की सालाना समयसीमा और शुल्क जमा करने में भी उद्यमियों को राहत देने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने सहमति जताई है।
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साथ ही उन्नाव स्थित ट्रांसगंगा सिटी के आवासीय भूखंडों के आवंटियों को छह फीसदी ब्याज के साथ आवंटन के लिए जमा धनराशि वापस करने पर भी सहमति बनी है। उद्योग लगाने में देरी होने पर मिलने वाली समय विस्तारण की सालाना समयसीमा और शुल्क जमा करने में भी उद्यमियों को राहत देने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने सहमति जताई है।
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बोर्ड बैठक में जिन प्रस्तावों पर सहमति बनी है, उन्हें शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही प्रस्ताव लागू हो जाएंगे। प्रदेश के अधिकतर विकास प्राधिकरणों में व्यावसायिक भूखंडों को ऑनलाइन नीलामी के जरिए बेचे जाने की व्यवस्था लागू है।
ई-नीलामी में प्रतिस्पर्धा के कारण भूखंडों की अच्छी कीमत मिलने से प्राधिकरणों की आय में खासा इजाफा हुआ है। आवास विकास परिषद में भी ई-नीलामी की व्यवस्था लागू की गई है। इसको देखते हुए यूपीसीडा में भी ई-नीलामी को लागू करने पर सहमति बनी।
ई-नीलामी में प्रतिस्पर्धा के कारण भूखंडों की अच्छी कीमत मिलने से प्राधिकरणों की आय में खासा इजाफा हुआ है। आवास विकास परिषद में भी ई-नीलामी की व्यवस्था लागू की गई है। इसको देखते हुए यूपीसीडा में भी ई-नीलामी को लागू करने पर सहमति बनी।
यूपीसीडा से भूखंड का आवंटन मिलने के बाद उद्यमियों को चार साल की निर्धारित समयसीमा के भीतर उद्योग लगाना पड़ता है। कई बार इस समयसीमा में उद्योग न लगने पर उद्यमी निर्धारित शुल्क जमाकर समयसीमा को साल-साल भर के लिए दो बार आगे बढ़वा सकते हैं।
उद्यमियों ने समयसीमा विस्तार को सालाना के बजाय छमाही-तिमाही करने और इसी आधार पर शुल्क लेने का सुझाव यूपीसीडा को दिया था। इसके बाद अब इसे कम करने पर फैसला हुआ है। हालांकि समयसीमा की किस्तें शासन की मंजूरी के बाद घोषित होंगी।
उद्यमियों ने समयसीमा विस्तार को सालाना के बजाय छमाही-तिमाही करने और इसी आधार पर शुल्क लेने का सुझाव यूपीसीडा को दिया था। इसके बाद अब इसे कम करने पर फैसला हुआ है। हालांकि समयसीमा की किस्तें शासन की मंजूरी के बाद घोषित होंगी।