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झींझक में सत्यापन न होने से पांच सालों से अटका 492 आवासों का आवंटन

Mon, 31 Jan 2022 01:45 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 01:45 AM IST
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Allotment of 492 houses stuck for five years due to lack of verification in Jhinjhak
झींझक (कानपुर देहात)। लगरथा रोड पर इंटीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आइएचएसडीपी) के तहत करीब दस करोड़ की लागत से बनी कॉलोनी में पांच वर्ष बाद भी किसी गरीब को आवास नहीं मिल सका है। विभाग अभी सत्यापन प्रक्रिया में ही अटका है। वहीं, तैयार कॉलोनी की दीवारों का प्लास्टर टूट रहा है और रंग रोगन भी खराब हो गया है।
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नगरपालिका झींझक में वर्ष 2009 में नगरीय विकास अभिकरण उप्र की ओर से आइएचएसडीपी योजना में कॉलोनी निर्माण का काम शुरू हुआ था। करीब दस करोड़ की लागत से 492 आवासों की कॉलोनी, परिसर में एक लिवलीहुड सेंटर, एक कम्यूनिटी सेंटर, एक मार्केट व नलकूप का निर्माण शुरू कराया गया। वर्ष 2014 में कॉलोनी का कार्य पूर्ण होना था।
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समय पर बजट नहीं मिलने की वजह से काम सुस्त गति से हुआ और वर्ष 2016 में काम पूरा हो सका। कॉलोनी बनने के बाद नगर पालिका प्रशासन व डूडा मिलकर इन कॉलोनियों का पांच वर्ष बाद भी आवंटन नहीं कर सकी हैं। अभी विभागीय कार्रवाई पात्रों के चयन, उनकी सूची तैयार करने व सत्यापन में ही अटकी है।
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ऐसे में जिन लोगों ने आवास के लिए आवेदन किया है उनकी अपनी छत की आस टूट गई है। मौजूदा स्थिति यह है कि कॉलोनी परिसर की दीवारों का प्लास्टर टूट कर गिर रहा है। रंग रोगन भी खराब हो गया है।
कस्बा निवासी राघवेंद्र सिंह, मानचंद्र ने बताया कि कॉलोनी बनकर तैयार हुए कई वर्ष हो गए लेकिन किसी गरीब को आवास नहीं मिल सका है। घर की आस में झोपड़ी में या फिर कच्चे घरों में रहने वाले गरीब अधिकारियों तक दौड़ भाग करने के के बाद शांत होकर बैठ गए।

कॉलोनी में आवास आवंटन के लिए पात्रों की सूची तैयार की गई है। सत्यापन कार्य बाकी होने से अभी आवंटन नहीं हो सका है। अधिकारियों के निर्देश मिलने पर आवंटन की प्रक्रिया होगी। वहीं, कांशीराम कॉलोनी में अधिकतर आवासों का आवंटन हो चुका है। अन्य आवासों को आवंटित करने के लिए लाभार्थियों की और सूची डूडा कार्यालय भेजी गई है। अब चुनाव के बाद ही इसमें कुछ प्रगति की उम्मीद है। - पवन किशोर मौर्य, ईओ नगर पालिका झींझक
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