'यश भारती पुरस्कार' को लेकर बड़ा खुलासा, ऐसे घिरे अखिलेश
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यूपी के सबसे बड़े 'रत्न' को लेकर भाजपा और सपा में तकरार शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश राज्य का सबसे बड़े पुरस्कार 'यश भारती' में बड़े खेल किए जाने की बात सामने आई है जिसे लेकर ये जंग छिड़ी है। भाजपा पूरी कोशिश में लगी है कि इसके जरिए सपा को घेरने का अच्छा मौका हाथ में है।
तो वहीं खुलासे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई हैं। आजमगढ़ में अपने फैसले को जायज ठहराते हुए उन्होंने कहा कि अब केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकारें हैं आप भी अपने लोगों को अवॉर्ड दे सकते हैं। इतना ही नहीं अखिलेश ने पेंशन की राशि पचास हजार रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये तक करने की मांग की।
मंत्रियों की सिफारिश पर इन्हें मिला रत्न
उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के राज में इस पुरस्कार को लेकर जमकर भाई-भतीजावाद हुआ। कहने का मतलब है कि अखिलेश सरकार ने केवल अपनों को ही इस पुरस्कार के लायक माना। तत्कालीन अखिलेश सरकार पर उंगलियां उठ रही है कि उसके शासन के दौरान (2012 से 2017) इस सम्मान को दोस्तों, अफसरों, नेताओं और घर वालों को रेवड़ियों की तरह बांटा गया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अखिलेश दौर में तकरीबन 200 लोगों को यह पुरस्कार दिया गया है जिनकी सिफारिश सीधे मुख्यमंत्री के कार्यालय से अखिलेश कैबिनेट के मंत्रियों व अफसरों ने की थी। इसके पीछे की वजह यश भारती सम्मान के तहत मिलने वाली 11 लाख रुपये की एकमुश्त पुरस्कार राशि और 50 हजार रुपये प्रति माह पेंशन के प्रावधान को माना जा रहा है।
ये बड़ा खुलासा इंडियन एक्सप्रेस ने किया है। एक आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी के आधार पर यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान यश भारती पुरस्कार पाने वालों में नेताओं के दोस्त, अफसर और समाजवादी पार्टी के छोटे-बड़े नेताओं के परिजन तक शामिल हैं।
मंत्रियों की सिफारिश पर इन्हें मिला रत्न
सूचना के अधिकार के जरिए मिली जानकारी के अनुसार कम से कम 21 लोगों को सीधे सीएम कार्यालय में आवेदन भेजने के बाद यश भारती पुरस्कार दिया गया था. इतना ही नहीं कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनकी सिफारिश समाजवादी पार्टी के नेताओं ने की थी. इनमें अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान, अखिलेश सरकार में मंत्री रहे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया जैसे नाम शामिल हैं. सम्मान पाने वाले कुछ लोगों ने खुद ही अपने नाम का प्रस्ताव भेजा.
सपा के ये नेता भी रत्न लूट में नहीं रहे पीछे
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समाजवादी पार्टी की पत्रिका समाजवादी बुलेटिन के कार्यकारी संपादक अशोक निगम, समाजवादी पार्टी के सांस्कृतिक सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव, दिवंगत एसपी नेता मुरलीधर मिश्रा के बेटे मणिन्द्र कुमार मिश्रा सहित कई नाम हैं जिन्हें यश भारती नवाजा गया है। इनमें दिवंगत कांग्रेसी नेता जगदीश मतानहेलिया की बेटी शिवानी मतानहेलिया भी शामिल थी.
मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया था यश भारती
मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया था यश भारती
यपी में इस रत्न को लाने वाले स्वंय अखिलेश यादव के पिता और यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव थे। इन्होंने 1994 में मुख्यमंत्री रहते हुए इस पुरस्कार वितरण की शुरुआत की थी। इस पुरस्कार वितरण में बड़ा झोल नजर आया तो योगी आदित्यनाथ सरकार यश भारती पुरस्कारों की समीक्षा करने में लग गई है।