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Akhilesh Dubey case: अभी ध्वस्त नहीं होगा अखिलेश का मकान, हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाई
Sat, 30 Aug 2025 11:29 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Aug 2025 11:29 PM IST
सार
Kanpur News: अधिवक्ता अखिलेश दुबे के मकान के ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाई है।
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अखिलेश दुबे
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के भाई निखिलेश दुबे की याचिका पर हाईकोर्ट ने उनके मकान के ध्वस्तीकरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। निखिलेश को केडीए के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ दो सप्ताह में अपील करने और फिर चार सप्ताह में अपीलीय अधिकारी को उसका निस्तारण करने के निर्देश हाईकोर्ट ने दिए हैं।
अखिलेश दुबे को जेल भेजे जाने के बाद केडीए ने उसकी संपत्ति मकान नंबर 127/576 डब्ल्यू वन साकेतनगर जूही में बने मकान को ध्वस्त करने के आदेश किए थे। इसी आदेश के खिलाफ अखिलेश के भाई निखिलेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। केडीए की ओर से तर्क रखा गया कि आदेश के खिलाफ संभाग आयुक्त के सामने अपील करने का अधिकार निखिलेश को है। सीधे हाईकोर्ट आने का कोई औचित्य नहीं है। निखिलेश की ओर से तर्क रखा गया कि अपीलीय अधिकारी को अंतरिम राहत आवेदन पर जल्द विचार करने का निर्देश दिया जाए। अगर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो जाती है तो याचिका दाखिल करने का उद्देश्य ही बेकार हो जाएगा।
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अखिलेश दुबे को जेल भेजे जाने के बाद केडीए ने उसकी संपत्ति मकान नंबर 127/576 डब्ल्यू वन साकेतनगर जूही में बने मकान को ध्वस्त करने के आदेश किए थे। इसी आदेश के खिलाफ अखिलेश के भाई निखिलेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। केडीए की ओर से तर्क रखा गया कि आदेश के खिलाफ संभाग आयुक्त के सामने अपील करने का अधिकार निखिलेश को है। सीधे हाईकोर्ट आने का कोई औचित्य नहीं है। निखिलेश की ओर से तर्क रखा गया कि अपीलीय अधिकारी को अंतरिम राहत आवेदन पर जल्द विचार करने का निर्देश दिया जाए। अगर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो जाती है तो याचिका दाखिल करने का उद्देश्य ही बेकार हो जाएगा।
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अधिवक्ता अखिलेश दुबे
- फोटो : अमर उजाला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में कोई हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। हालांकि निखिलेश को अपीलीय अधिकारी के यहां स्टे अपील करने पर जल्द निस्तारण के निर्देश दिए हैं। स्थगन आवेदन के निस्तारण तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। संपत्ति पर कोई भी निर्माण, विकास कार्य या तीसरे पक्ष का हित सृजित करने पर भी रोक है।