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UP: एनकाउंटर... फर्द लिखने में ऋषिकांत की मदद कर करीबी बना था अखिलेश दुबे, 100 करोड़ वाले डीएसपी की कहानी
Wed, 05 Nov 2025 03:28 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 05 Nov 2025 03:28 PM IST
सार
एनकाउंटर की फर्द लिखने में ऋषिकांत की मदद कर अखिलेश करीबी बन गया था। अखिलेश और ऋषिकांत की यह यारी करीब दो दशक पुरानी है। रत्तुपुरवा और संजय वन के पास बदमाशों के एनकाउंटर किए थे। इसके लिए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था।
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ऋषिकांत शुक्ला, सीओ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
निलंबित सीओ ऋषिकांत शुक्ला पर वर्दी की आड़ में अखिलेश के करीबी रहते हुए 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जुटाने का आरोप है। अखिलेश और ऋषिकांत की यह यारी करीब दो दशक पुरानी है। तब ऋषिकांत दरोगा थे और एनकाउंटर की फर्द लिखवाने के दौरान अखिलेश के संपर्क में आए थे।
अखिलेश इसी मदद के बाद ऋषिकांत का करीबी बन गया था। निलंबित सीओ ऋषिकांत शुक्ला वर्ष 1997 बैच के सब इंस्पेक्टर हैं। वह कानपुर में ही पले बढ़े हैं। वह यहां सर्वोदयनगर, शास्त्रीनगर, नवीन मार्केट, जूही चौकी प्रभारी भी रहे हैं। नौबस्ता, कोहना, काकादेव समेत कई थानों के थानाध्यक्ष रहे।
ऋषिकांत ने तैनाती के दौरान डी-टू गैंग के रफीक और बिल्लू को मुठभेड़ में मार गिराया था। पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी (जेल में हत्या हो चुकी) के शूटर अमित राय और चिंटू सिंह को वर्ष 2007 में किदवईनगर स्थित संजय वन के पास मुठभेड़ में मार गिराया था।
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अजय कंजा, तन्नू पासी, राजेश करिया, इरफान चिकना जैसे शातिरों को मुठभेड़ में मार गिराने के कारण हमेशा चर्चा में रहे। आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर सबइंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बनने के बाद वह तत्कालीन आईजी आलोक सिंह की क्राइम ब्रांच में भी तैनात रहे।
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अखिलेश इसी मदद के बाद ऋषिकांत का करीबी बन गया था। निलंबित सीओ ऋषिकांत शुक्ला वर्ष 1997 बैच के सब इंस्पेक्टर हैं। वह कानपुर में ही पले बढ़े हैं। वह यहां सर्वोदयनगर, शास्त्रीनगर, नवीन मार्केट, जूही चौकी प्रभारी भी रहे हैं। नौबस्ता, कोहना, काकादेव समेत कई थानों के थानाध्यक्ष रहे।
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ऋषिकांत ने तैनाती के दौरान डी-टू गैंग के रफीक और बिल्लू को मुठभेड़ में मार गिराया था। पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी (जेल में हत्या हो चुकी) के शूटर अमित राय और चिंटू सिंह को वर्ष 2007 में किदवईनगर स्थित संजय वन के पास मुठभेड़ में मार गिराया था।
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अजय कंजा, तन्नू पासी, राजेश करिया, इरफान चिकना जैसे शातिरों को मुठभेड़ में मार गिराने के कारण हमेशा चर्चा में रहे। आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर सबइंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बनने के बाद वह तत्कालीन आईजी आलोक सिंह की क्राइम ब्रांच में भी तैनात रहे।
हत्या को बना दिया था हादसा, दर्ज हुई थी रिपोर्ट
वह कानपुर देहात में भी तैनात रह चुके हैं। अकबरपुर कोतवाली प्रभारी रहने के दौरान हत्या के एक मामले की विवेचना में लापरवाही बरतने के प्रकरण में शासन के निर्देश के बाद सीबीसीआईडी जांच हुई थी। मृतक के पिता का आरोप था कि उनके बेटे की हत्या हुई थी इसके बावजूद हत्या के मामले को सड़क दुर्घटना में परिवर्तित कर दिया गया था। मामले में जांच के बाद सीबीसीआईडी के निरीक्षक ने ऋषिकांत के ऊपर अकबरपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वह कानपुर देहात में भी तैनात रह चुके हैं। अकबरपुर कोतवाली प्रभारी रहने के दौरान हत्या के एक मामले की विवेचना में लापरवाही बरतने के प्रकरण में शासन के निर्देश के बाद सीबीसीआईडी जांच हुई थी। मृतक के पिता का आरोप था कि उनके बेटे की हत्या हुई थी इसके बावजूद हत्या के मामले को सड़क दुर्घटना में परिवर्तित कर दिया गया था। मामले में जांच के बाद सीबीसीआईडी के निरीक्षक ने ऋषिकांत के ऊपर अकबरपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विधायक की पिटाई के बाद मांगी थी माफी
ऋषिकांत का विवादों से पुराना नाता है। वर्ष 2004 में सपा सरकार के कार्यकाल में उन्होंने बिजली कटौती का प्रदर्शन कर रहे विधायक सलिल विश्नोई पर जमकर लाठियां बरसाईं। विधायक का पैर तक टूट गया था। 17 साल बाद मामले में दोष सिद्ध होने के बाद ऋषिकांत समेत छह पुलिसकर्मियों को पूरे सदन के सामने माफी मांगी थी।
ऋषिकांत का विवादों से पुराना नाता है। वर्ष 2004 में सपा सरकार के कार्यकाल में उन्होंने बिजली कटौती का प्रदर्शन कर रहे विधायक सलिल विश्नोई पर जमकर लाठियां बरसाईं। विधायक का पैर तक टूट गया था। 17 साल बाद मामले में दोष सिद्ध होने के बाद ऋषिकांत समेत छह पुलिसकर्मियों को पूरे सदन के सामने माफी मांगी थी।