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Kanpur News: सातवें मुकदमे से अखिलेश दुबे को मिल सकती है राहत
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कानपुर। भाजपा नेता रवि सतीजा से रंगदारी वसूलने के मामले में जेल भेजा गया अधिवक्ता अखिलेश दुबे एक के बाद एक मुकदमों में फंसता गया। छह मुकदमों में फंसने के बाद सातवें मुकदमे की तलवार भी अखिलेश पर लटक रही थी लेकिन जांच में कोई ठोस साक्ष्य न मिलने पर इस मुकदमे में अखिलेश को राहत मिलने की उम्मीद जग गई है हालांकि फाइनल रिपोर्ट अभी कोर्ट में दाखिल नहीं हुई है।
अखिलेश दुबे के खिलाफ अब तक कुल पांच एफआईआर दर्ज हुई हैं। एक बर्रा थाने में भाजपा नेता रवि सतीजा द्वारा, दूसरी किदवई नगर थाने में व्यापारी सुरेश पाल द्वारा, तीसरी किदवई नगर थाने में सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र कुमार द्वारा और चौथी कोतवाली में अधिवक्ता संदीप शुक्ला द्वारा झूठे मुकदमों में फंसाकर रंगदारी मांगने व धमकाने से संबंधित आरोपों में दर्ज हुई थी जबकि पांचवीं रिपोर्ट ग्वालटोली थाने में वक्फ की संपत्ति पर कब्जा करने के मामले में दर्ज हुई थी। इसके बाद होटल मालकिन रहीं प्रज्ञा त्रिवेदी ने डकैती के एक पुराने मुकदमे में कोर्ट से अग्रिम विवेचना की मांग की थी जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। अग्रिम विवेचना के दौरान इस मामले में भी अखिलेश का नाम सामने आया था। इस तरह अखिलेश के खिलाफ छठा मुकदमा भी दर्ज हो गया था। इनमें से रवि सतीजा, शैलेंद्र कुमार, संदीप शुक्ला और प्रज्ञा त्रिवेदी के मुकदमे में अखिलेश को जमानत मिल चुकी है लेकिन वक्फ की संपत्ति से संबंधित मुकदमे में हाईकोर्ट में जमानत याचिका लंबित है। वहीं सुरेश पाल के मुकदमे में अखिलेश की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस तरह से देखा जाए तो अभी अखिलेश की दो मुकदमों में जमानत मंजूर होनी बाकी है। इसी तरह वक्फ की संपत्ति पर कब्जे के मुकदमे को छोडक़र बाकी सभी मुकदमों में अखिलेश के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। वर्तमान में अखिलेश के खिलाफ अदालत में पांच मुकदमे लंबित हैं।
क्लासिक होटल की मालकिन रहीं प्रज्ञा त्रिवेदी को जूही थाने में दर्ज कराई गई एक एनसीआर पर कोर्ट से विवेचना कराए जाने का आदेश मिला था। इस मुकदमे में अखिलेश दुबे नामजद नहीं था बल्कि अनुज निगम और अखिलेश के साथी अधिवक्ता राजेश गुप्ता नामजद थे। हालांकि, विवेचना के दौरान अखिलेश दुबे का नाम भी सामने आने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन मुकदमे के मुख्य आरोपी अजय निगम की मौत हो चुकी है। ऐसे में संभव है कि विवेचक कोई ठोस साक्ष्य न जुटा पाए हों और इसी आधार पर विवेचना खत्म कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेजने की कवायद चल रही है।
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अखिलेश दुबे के खिलाफ अब तक कुल पांच एफआईआर दर्ज हुई हैं। एक बर्रा थाने में भाजपा नेता रवि सतीजा द्वारा, दूसरी किदवई नगर थाने में व्यापारी सुरेश पाल द्वारा, तीसरी किदवई नगर थाने में सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र कुमार द्वारा और चौथी कोतवाली में अधिवक्ता संदीप शुक्ला द्वारा झूठे मुकदमों में फंसाकर रंगदारी मांगने व धमकाने से संबंधित आरोपों में दर्ज हुई थी जबकि पांचवीं रिपोर्ट ग्वालटोली थाने में वक्फ की संपत्ति पर कब्जा करने के मामले में दर्ज हुई थी। इसके बाद होटल मालकिन रहीं प्रज्ञा त्रिवेदी ने डकैती के एक पुराने मुकदमे में कोर्ट से अग्रिम विवेचना की मांग की थी जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। अग्रिम विवेचना के दौरान इस मामले में भी अखिलेश का नाम सामने आया था। इस तरह अखिलेश के खिलाफ छठा मुकदमा भी दर्ज हो गया था। इनमें से रवि सतीजा, शैलेंद्र कुमार, संदीप शुक्ला और प्रज्ञा त्रिवेदी के मुकदमे में अखिलेश को जमानत मिल चुकी है लेकिन वक्फ की संपत्ति से संबंधित मुकदमे में हाईकोर्ट में जमानत याचिका लंबित है। वहीं सुरेश पाल के मुकदमे में अखिलेश की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस तरह से देखा जाए तो अभी अखिलेश की दो मुकदमों में जमानत मंजूर होनी बाकी है। इसी तरह वक्फ की संपत्ति पर कब्जे के मुकदमे को छोडक़र बाकी सभी मुकदमों में अखिलेश के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। वर्तमान में अखिलेश के खिलाफ अदालत में पांच मुकदमे लंबित हैं।
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क्लासिक होटल की मालकिन रहीं प्रज्ञा त्रिवेदी को जूही थाने में दर्ज कराई गई एक एनसीआर पर कोर्ट से विवेचना कराए जाने का आदेश मिला था। इस मुकदमे में अखिलेश दुबे नामजद नहीं था बल्कि अनुज निगम और अखिलेश के साथी अधिवक्ता राजेश गुप्ता नामजद थे। हालांकि, विवेचना के दौरान अखिलेश दुबे का नाम भी सामने आने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन मुकदमे के मुख्य आरोपी अजय निगम की मौत हो चुकी है। ऐसे में संभव है कि विवेचक कोई ठोस साक्ष्य न जुटा पाए हों और इसी आधार पर विवेचना खत्म कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेजने की कवायद चल रही है।
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