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अनोखा शोध: सड़े आलू से बनाई बायोप्लास्टिक, डिजाइन हैकाथॉन में पाया दूसरा स्थान
Tue, 10 Sep 2019 04:28 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 10 Sep 2019 04:28 PM IST
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छात्र रजत प्रताप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर स्थित डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड (एआईटीएच) के छात्र ने सड़े आलू से बायोप्लास्टिक (पॉलिथीन) तैयार की है। इस इनोवेशन को हाल ही में लखनऊ के उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन में आयोजित डिजाइन हैकाथॉन 2019 में दूसरा स्थान मिला है। छात्र को पांच हजार रुपये का इनाम दिया गया है।
इसे बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मनीष सिंह राजपूत की देखरेख में छात्र रजत प्रताप सिंह ने तैयार किया है। रजत ने बताया कि शोध में एक साल लगा। यह बायोप्लास्टिक हर तरह से प्रयोग में लाई जा सकती है। खास बात है कि जब इसका प्रयोग नहीं करना हो तो इसे मिट्टी में दबा सकते हैं।
मिट्टी में दबाने के बाद यह बायोप्लास्टिक पहले दिन से ही गलना शुरू हो जाएगी। इसे तैयार करने में सड़े आलू के साथ स्टार्च, साबुन कंपनियों से निकलने वाले वेस्ट प्लास्टिसाइजर के मिश्रण आदि का प्रयोग किया गया है। मनीष सिंह राजपूत ने बताया कि प्रयोग सफल हो चुका है। अब इसे पेटेंट कराने की तैयारी है।
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इसे बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मनीष सिंह राजपूत की देखरेख में छात्र रजत प्रताप सिंह ने तैयार किया है। रजत ने बताया कि शोध में एक साल लगा। यह बायोप्लास्टिक हर तरह से प्रयोग में लाई जा सकती है। खास बात है कि जब इसका प्रयोग नहीं करना हो तो इसे मिट्टी में दबा सकते हैं।
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मिट्टी में दबाने के बाद यह बायोप्लास्टिक पहले दिन से ही गलना शुरू हो जाएगी। इसे तैयार करने में सड़े आलू के साथ स्टार्च, साबुन कंपनियों से निकलने वाले वेस्ट प्लास्टिसाइजर के मिश्रण आदि का प्रयोग किया गया है। मनीष सिंह राजपूत ने बताया कि प्रयोग सफल हो चुका है। अब इसे पेटेंट कराने की तैयारी है।
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