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Kanpur News: एआई से डबिंग इंडस्ट्री के कलाकारों के सामने चुनौती
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कानपुर। डबिंग इंडस्ट्री निश्चित ही खतरे में हैं। एआई डबिंग आर्टिस्ट को नुकसान पहुंचा रहा है। कलाकारों के सामने खुद को स्थापित करने की चुनौती है जिसके लिए उनको काफी मेहनत करने की जरूरत है। यह बात महाभारत में मैं समय हूं...की आवाज देने वाले वॉइस आर्टिस्ट एवं लेखक हरीश भिमानी ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने माना कि एआई वहीं कारगर है जहां भावनात्मक उतार चढ़ाव कम हैं। इसलिए जिस आर्टिस्ट ने मेहनत की, उसको एआई के दौर में भी खूब काम मिलेगा।
बीआर चोपड़ा की महाराभारत में शुरुआती संवाद मैं समय हूं और आज महाभारत की अमर कथा सुनाने जा रहा हूं....में अपनी आवाज देने वाले हरीश कहते हैं कि जिस आवाज ने लोगों के दिलों में अपनी पहचान बनाईं उसके लिए पहली पसंद दिलीप कुमार थे। बाद में सहमति बनी एक ऐसी आवाज हो जिसे अपने अंदाज में ढाला जा सके। हरीश कहते हैं ऑडिशन के दौरान बीआर चोपड़ा, डॉ. राही मासूम रजा और पं. नरेंद्र शर्मा ने उनकी आवाज पर काफी काम किया। पहले इसे किरदार के रूप में दिखाने की कोशिश थी लेकिन फिर तय हुआ कि केवल आवाज पर ही काम होगा।
जब पहली बार रिकार्डिंग की तो नहीं लगा था कि 40 साल बाद भी लोग मुझे मेरे इस काम से ही जानेंगे। हरीश कहते हैं कि मैंने करीब 28 हजार से अधिक रिकार्डिंग की है लेकिन आज भी लोग मुझे केवल मैं समय हूं से ही जानते हैं। कभी-कभी लगता है कि एक किरदार इतना हावी हुआ कि मेरी बाकी की मेहनत छिप गई। हरीश कहते हैं कि अब जो पौराणिक सीरियल बनते हैं, उनमें रिसर्च वर्क नहीं होता। पहले के समय में एक एक किरदार, उनके कपड़ों पर कई दिनों तक रिसर्च चलती थी। उन्होंने बताया कि महाभारत में अर्जुन के किरदार के लिए पहली पसंद राज बब्बर थे लेकिन शो को समय पर खत्म करना था और उनकी डेट नहीं मिली, इस कारण वह किरदार फिरोज खान को मिला।
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हरीश ने विद्यार्थियों को बताए आवाज के मायने
फोटो::::
कानपुर। वॉइस आर्टिस्ट हरीश भिमानी ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को प्रभावी वाणी, आवाज की कला और भारतीय संस्कृति में ध्वनि के महत्व से परिचित कराया। विश्वविद्यालय में आयोजित दो कार्यक्रमों में उन्होंने वॉइस आर्ट, एंकरिंग, डबिंग, विज्ञापन, रेडियो और टेलीविजन में अवसरों के साथ आवाज के जरिये व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के गुर साझा किए।
श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक वाङ्मय शोधपीठ और इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में हरीश ने कहा कि आवाज केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व और अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाने का साधन है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में ‘स्वर, शास्त्र और समय : एक शाम हरीश भिमानी के साथ’ कार्यक्रम हुआ। भिमानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ध्वनि और स्वर का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, डॉ. वंदना पाठक, डॉ. मिठाई लाल, प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, अनिल कुमार गुप्त, डॉ. उमेश पालीवाल और डॉ. दिवाकर अवस्थी आदि मौजूद रहे।
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बीआर चोपड़ा की महाराभारत में शुरुआती संवाद मैं समय हूं और आज महाभारत की अमर कथा सुनाने जा रहा हूं....में अपनी आवाज देने वाले हरीश कहते हैं कि जिस आवाज ने लोगों के दिलों में अपनी पहचान बनाईं उसके लिए पहली पसंद दिलीप कुमार थे। बाद में सहमति बनी एक ऐसी आवाज हो जिसे अपने अंदाज में ढाला जा सके। हरीश कहते हैं ऑडिशन के दौरान बीआर चोपड़ा, डॉ. राही मासूम रजा और पं. नरेंद्र शर्मा ने उनकी आवाज पर काफी काम किया। पहले इसे किरदार के रूप में दिखाने की कोशिश थी लेकिन फिर तय हुआ कि केवल आवाज पर ही काम होगा।
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जब पहली बार रिकार्डिंग की तो नहीं लगा था कि 40 साल बाद भी लोग मुझे मेरे इस काम से ही जानेंगे। हरीश कहते हैं कि मैंने करीब 28 हजार से अधिक रिकार्डिंग की है लेकिन आज भी लोग मुझे केवल मैं समय हूं से ही जानते हैं। कभी-कभी लगता है कि एक किरदार इतना हावी हुआ कि मेरी बाकी की मेहनत छिप गई। हरीश कहते हैं कि अब जो पौराणिक सीरियल बनते हैं, उनमें रिसर्च वर्क नहीं होता। पहले के समय में एक एक किरदार, उनके कपड़ों पर कई दिनों तक रिसर्च चलती थी। उन्होंने बताया कि महाभारत में अर्जुन के किरदार के लिए पहली पसंद राज बब्बर थे लेकिन शो को समय पर खत्म करना था और उनकी डेट नहीं मिली, इस कारण वह किरदार फिरोज खान को मिला।
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हरीश ने विद्यार्थियों को बताए आवाज के मायने
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कानपुर। वॉइस आर्टिस्ट हरीश भिमानी ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को प्रभावी वाणी, आवाज की कला और भारतीय संस्कृति में ध्वनि के महत्व से परिचित कराया। विश्वविद्यालय में आयोजित दो कार्यक्रमों में उन्होंने वॉइस आर्ट, एंकरिंग, डबिंग, विज्ञापन, रेडियो और टेलीविजन में अवसरों के साथ आवाज के जरिये व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के गुर साझा किए।
श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक वाङ्मय शोधपीठ और इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में हरीश ने कहा कि आवाज केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व और अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाने का साधन है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में ‘स्वर, शास्त्र और समय : एक शाम हरीश भिमानी के साथ’ कार्यक्रम हुआ। भिमानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ध्वनि और स्वर का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, डॉ. वंदना पाठक, डॉ. मिठाई लाल, प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, अनिल कुमार गुप्त, डॉ. उमेश पालीवाल और डॉ. दिवाकर अवस्थी आदि मौजूद रहे।