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ओमिक्रॉन: 500 करोड़ ‘लॉक’, निर्यात ‘डाउन’, कोरोना की दो लहरों के बाद संभला उद्योग अब नए वैरिएंट की आहट से सहमा

Tue, 07 Dec 2021 02:56 PM IST
शिखा पांडेय अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 07 Dec 2021 02:56 PM IST
सार

चमड़ा उद्योग समेत दूसरे उद्योगों के नए साल के निर्यात आर्डर फंस गए हैं। दरअसल, दूसरे देशों में ओमिक्रॉन ने तेजी से पैर पसार लिए हैं। इस वजह से वहां के उद्यमी आर्डर लेने से कतराने लगे हैं।

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After two waves of Corona, industry is now stunned by the sound of a new variant
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बाद तेजी से संभल रहा उद्योग नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से एक बार फिर सहम गया है। चमड़ा, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर आदि उत्पादों का 500 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात आर्डर फंस गया है।
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अफ्रीकी देशों समेत दूसरे देश आर्डर फिलहाल आगे बढ़ाने लगे हैं। सबसे ज्यादा असर अफ्रीकी देशों से होने वाले कारोबार पर पड़ा है। वहीं जनवरी-फरवरी में तीसरी लहर आने की आशंका के बीच उद्यमी बड़ी पूंजी फंसाने से किनारा काटने लगे हैं।
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क्योंकि आशंका यह भी है कि आर्डर दूसरे देशों में भेज पाएंगे कि नहीं। इसके अलावा नए बाजार तलाशने की मुहिम को भी झटका लगा है। पिछले दो सालों में उद्योगों को कोरोना ने तगड़ा झटका दिया था। कोरोना की पहली लहर में हुए लॉकडाउन के चलते 40 दिन तक शहर के उद्योग बंद रहे थे।
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इसके बाद दूसरी लहर ने चमड़ा उद्योग को कई हजार करोड़ की चोट दी थी। धीरे-धीरे हालात सुधरे तो इस साल पूरे देश से अफ्रीकी देशों को 1,37,665 करोड़ का निर्यात हुआ था, जबकि कानपुर समेत पूरे प्रदेश से 21,532 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया है।

लेकिन अब ओमिक्रॉन का नया खतरा उद्योगों के लिए नई चुनौती बन रहा है। चमड़ा उद्योग समेत दूसरे उद्योगों के नए साल के निर्यात आर्डर फंस गए हैं। दरअसल, दूसरे देशों में ओमिक्रॉन ने तेजी से पैर पसार लिए हैं। इस वजह से वहां के उद्यमी आर्डर लेने से कतराने लगे हैं। उधर, आर्डर तैयार करने में उद्यमियों को भी बड़ी पूंजी फंसानी पड़ती। इस वजह से उद्यमी भी अब फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। 

इनका होता है निर्यात 
शहर से इंजीनियरिंग, फिनिश्ड लेदर, सब्जियां, शक्कर, दाल, प्लास्टिक के उत्पाद, जेम्स एंड ज्वैलरी, दवाएं, शेफ्टी शूज, टेक्सटाइल उत्पाद, हाथ से बने फाइबर उत्पाद, मशीनरी आइटम आदि निर्यात होते हैं। इनका होता है आयात पेट्रोलियम उत्पाद, कॉटन, आयरन आदि। 

चमड़ा उद्योग पर पड़ेगी दोहरी मार
ओमिक्रॉन के चलते 20 फीसदी का निर्यात पहले ही प्रभावित हो चुका है। एक जनवरी से एक हजार रुपये से ज्यादा कीमत वाले जूतों पर 12 फीसदी जीएसटी प्रस्तावित है। ऐसे में चमड़ा उद्योग की मुश्किलें और बढ़ना तय मानी जा रही हैं।

डायमंड के दाम तेज
दक्षिण अफ्रीका में हीरे की खदानें हैं। वहीं से दिल्ली, मुंबई, सूरत, कानपुर जैसे तमाम शहरों में डायमंड आता है। इनके दामों में भी 10-15 फीसदी की तेजी आ गई है। हालांकि कारोबार पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ा है।

ओमिक्रॉन पर हाल में आई आईआईआईटी की रिपोर्ट से उद्योग जगत में दहशत सी हो गई है। चीन से तमाम देशों ने संबंध खत्म करके कानपुर समेत देशभर के उद्यमियों को आर्डर दिए थे। नए हालात में आर्डर भेज पाने में संशय की स्थिति बन गई है। जनवरी-फरवरी में तीसरी लहर की आशंका के चलते कई उद्यमियों ने अपने विस्तार प्लान आगे बढ़ा दिए हैं। मैंने भी बड़ी मशीन लगाने का सोचा था। फिलहाल टाल दिया है। - सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए

दक्षिण अफ्रीका समेत सभी अफ्रीकी देशों को फिनिश्ड लेदर, सैडलरी व अन्य उत्पाद का निर्यात किया जाता है। कोरोना के नए वैरिएंट से 20 फीसदी कारोबार पर असर दिखने लगा है। निर्यात आर्डर फंस गए हैं। चमड़ा उद्योग के लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण है। क्रिसमस पर यूरोप और अमेरिका में सबसे ज्यादा माल भेजा जाता है। वहां के भी आर्डर फंस सकते हैं।- जफर फिरोज, आयात-निर्यात एक्सपर्ट

51 अफ्रीकी देशों को कानपुर समेत पूरे प्रदेश से अलग-अलग उत्पादों का निर्यात किया जाता है। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, केन्या आदि जगहों पर ज्यादा सप्लाई है। नए बाजार भी सरकार तलाश रही है। ऐसे में निर्यात बढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। - आलोक कुमार, संयोजक, फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन

डायमंड के रेट बढ़े हैं लेकिन अभी सराफा बाजार में ओमिक्रॉन का प्रभाव नहीं है। शहरियों और उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए। ताकि किसी भी चुनौती से सभी निपट सके। लोगों को नए वैरिएंट से सजग और सतर्क रहना होगा। - महेश चंद्र जैन, अध्यक्ष, उप्र सराफा एसोसिएशन
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