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हाल-ए-उर्सला: चार साल के बच्चे को लेकर भटकती रही मां, नहीं मिला इलाज, दो डॉक्टरों के निलंबन की संस्तुति

Fri, 06 May 2022 12:08 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 06 May 2022 12:08 AM IST
सार

कानपुर के उर्सला अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। एक मां मासूम बेटे के इलाज के लिए भटकती रही उसे इलाज नहीं मिला। 

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Action against doctors for not treating the child
उर्सला अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में जिला अस्पताल उर्सला में गुरुवार को चार साल के मासूम रोगी के साथ हद दर्जे की संवेदनहीनता बरती गई। इससे डॉक्टरी पेशा ही शर्मसार हो गया। विधवा मां अपने चार साल के मासूम बच्चे को लेकर पागलों की तरह इधर से उधर भटकती रही। कभी एक्सरे तो कभी दूसरी जांच के लिए उसे दौड़ाया गया।
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जब एक्सरे कराकर आई तो बच्चे को देखने वाले डॉक्टर ही उठकर चले गए। दूसरे डॉक्टर ने देखा तो उपचार करने के बजाय कहा जाओ हैलट लेकर चली जाओ। महिला रोती बिलखती रही। मामला पता चलने पर उर्सला के निदेशक डॉ. सुशील प्रकाश ने दो वार्ड ब्वाय को तत्काल निलंबित कर दिया।
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दो डॉक्टरों, दो फार्मासिस्टों के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य से संस्तुति कर दी। दादानगर नायक कोठी की रहने वाली विधवा महिला अपने चार साल के बेटे अनुभव (4) को बेहोशी की हालत में लेकर गुरुवार दोपहर 1:57 बजे उर्सला इमरजेंसी पहुंची।
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बच्चे की हालत खराब थी। उसके ऊपर अल्मारी गिर गई थी। इससे उसे झटके आ रहे थे। डॉक्टर ने उसे भर्ती करने के बजाय कहा कि जाओ एक्सरे लाओ। उसे स्ट्रेचर भी नहीं दिया गया और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी उसके साथ गया। जब वह एक्सरे लाई तो जिस डॉक्टर ने देखा था, वह नहीं था।

उसे इधर से उधर दौड़ाया जाता रहा। महिला का सिर्फ रोगी पर्चा बना था। केस को रजिस्टर पर भी दर्ज नहीं किया गया। बाद में इमरजेंसी के दूसरे डॉक्टर ने उसे देखा और कहा कि जाओ हैलट चली जाओ। बाद में पुलिस ने बच्चे को जाकर हैलट में भर्ती कराया।

जानकारी मिलने पर अस्पताल निदेशक ने वार्ड ब्वाय एसएस तिवारी, धीरेंद्र को निलंबित कर दिया। डॉ. केएन कटियार, डॉ. प्रवीण सक्सेना तथा फार्मासिस्ट संजय और सत्येंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। निदेशक का कहना है कि बच्चे को पहले देखने वाले डॉक्टर कोर्ट केस में चले गए थे लेकिन बाहर जाने पर डॉक्टर को सूचित करना चाहिए था। इसके साथ ही ऑन कॉल डॉक्टर को बुलाना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया जो लापरवाही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बच्चा हैलट में भर्ती हो गया है। उसे झटके आ रहे थे। हालत स्थिर है।
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