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एचबीटीआई से सेना को भेजी फर्जी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:26 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : amarujala
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हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआई) ने आगरा कैंट (सेना) को स्टोन ब्लास्ट से संबंधित कंसल्टेंसी की फर्जी रिपोर्ट दी है। इसका खुलासा सत्यापन से हुआ है। रिपोर्ट पर सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष, प्रभारी और टेक्निकल असिस्टेंट के हस्ताक्षर फर्जी मिले हैं।
पूरे मामले में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। कहा गया कि शिक्षक ने कंसल्टेंसी की पूरी फीस हड़प ली और फर्जी रिपोर्ट बनाकर भेज दी।अक्तूबर 2014 को आगरा कैंट ने गोला बारूद की क्षमता जानने के लिए एचबीटीआई कानपुर को कंसल्टेंट नियुक्त किया था। इसके अंतर्गत बारूद को पत्थरों और चट्टानों के बीच रखा जाता है। बारूद फंटने पर पत्थर को हुई क्षति के आकलन से उसकी क्षमता नापी जाती है। इसे स्टोन ब्लास्ट कहते हैं।
एचबीटीआई को स्टोन ब्लास्ट की रिपोर्ट देने के लिए कंसल्टेंट बनाया गया था। स्टोन ब्लास्ट के तीन सैंपल भेजे गए थे। इसकी रिपोर्ट भी आगरा कैंट को उपलब्ध करा दी। डेढ़ माह पहले आगरा कैंट ने सत्यापन रिपोर्ट तलब की तो उसमें सभी के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
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तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. डी परमार, लैब प्रभारी डॉ. पृथ्वीपति और टेक्निकल असिस्टेंट महावीर सिंह ने जुलाई में कंसल्टेंसी रिपोर्ट को फर्जी करार दिया। साफ कहा कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। किसी दूसरे व्यक्ति ने हस्ताक्षर बनाकर रिपोर्ट भेज दी। इस तरह की रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं है। जिस डेट में कंसल्टेंसी रिपोर्ट भेजी गई, उस डेट में कंसल्टेंसी का काम बंद चल रहा था। रिपोर्ट का डिस्पैच नंबर भी फर्जी है। कंसल्टेंसी से संबंधित मामले में उचित कार्रवाई की सिफारिश प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा और निदेशक से की गई है।
कब क्या हुआ
आगरा कैंट ने 25 सितंबर 2014 को कंसल्टेंसी का डिमांड ड्राफ्ट भेजा।
आगरा कैंट ने 1 अक्तूबर 2014 को एचबीटीआई कानपुर को कंसल्टेंसी दी।
18 अक्तूबर 2014 को ही कंसल्टेंसी रिपोर्ट बनाकर एचबीटीआई ने आगरा कैंट को भेजी।
वर्ष 2015 में कंसल्टेंसी रिपोर्ट का सत्यापन फिर एचबीटीआई आया।
रिपोर्ट की गड़बड़ी से बच्ची की हो चुकी मौत
केडीए की विकास नगर स्थित सिग्नेचर सिटी में भी कंसल्टेंसी का विवाद सामने आया था। कंसल्टेंसी एचबीटीआई ने दी थी लेकिन पूरा काम एक एजेंसी ने किया। लापरवाही में ही गड्ढे खुले रहे, जिसमें गिरकर एक बच्ची (खुशी) की मौत हो गई थी। इस मामले की छानबीन हुई। आरोपियों के नाम भी सामने आए लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
a 16 जुलाई (डिस्पैच नंबर 348) और 31 जुलाई (डिस्पैच नंबर 441) 2016 की सत्यापन रिपोर्ट को एचबीटीआई ने फर्जी करार दिया।
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पूरे मामले में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। कहा गया कि शिक्षक ने कंसल्टेंसी की पूरी फीस हड़प ली और फर्जी रिपोर्ट बनाकर भेज दी।अक्तूबर 2014 को आगरा कैंट ने गोला बारूद की क्षमता जानने के लिए एचबीटीआई कानपुर को कंसल्टेंट नियुक्त किया था। इसके अंतर्गत बारूद को पत्थरों और चट्टानों के बीच रखा जाता है। बारूद फंटने पर पत्थर को हुई क्षति के आकलन से उसकी क्षमता नापी जाती है। इसे स्टोन ब्लास्ट कहते हैं।
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एचबीटीआई को स्टोन ब्लास्ट की रिपोर्ट देने के लिए कंसल्टेंट बनाया गया था। स्टोन ब्लास्ट के तीन सैंपल भेजे गए थे। इसकी रिपोर्ट भी आगरा कैंट को उपलब्ध करा दी। डेढ़ माह पहले आगरा कैंट ने सत्यापन रिपोर्ट तलब की तो उसमें सभी के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
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तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. डी परमार, लैब प्रभारी डॉ. पृथ्वीपति और टेक्निकल असिस्टेंट महावीर सिंह ने जुलाई में कंसल्टेंसी रिपोर्ट को फर्जी करार दिया। साफ कहा कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। किसी दूसरे व्यक्ति ने हस्ताक्षर बनाकर रिपोर्ट भेज दी। इस तरह की रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं है। जिस डेट में कंसल्टेंसी रिपोर्ट भेजी गई, उस डेट में कंसल्टेंसी का काम बंद चल रहा था। रिपोर्ट का डिस्पैच नंबर भी फर्जी है। कंसल्टेंसी से संबंधित मामले में उचित कार्रवाई की सिफारिश प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा और निदेशक से की गई है।
कब क्या हुआ
आगरा कैंट ने 25 सितंबर 2014 को कंसल्टेंसी का डिमांड ड्राफ्ट भेजा।
आगरा कैंट ने 1 अक्तूबर 2014 को एचबीटीआई कानपुर को कंसल्टेंसी दी।
18 अक्तूबर 2014 को ही कंसल्टेंसी रिपोर्ट बनाकर एचबीटीआई ने आगरा कैंट को भेजी।
वर्ष 2015 में कंसल्टेंसी रिपोर्ट का सत्यापन फिर एचबीटीआई आया।
रिपोर्ट की गड़बड़ी से बच्ची की हो चुकी मौत
केडीए की विकास नगर स्थित सिग्नेचर सिटी में भी कंसल्टेंसी का विवाद सामने आया था। कंसल्टेंसी एचबीटीआई ने दी थी लेकिन पूरा काम एक एजेंसी ने किया। लापरवाही में ही गड्ढे खुले रहे, जिसमें गिरकर एक बच्ची (खुशी) की मौत हो गई थी। इस मामले की छानबीन हुई। आरोपियों के नाम भी सामने आए लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
a 16 जुलाई (डिस्पैच नंबर 348) और 31 जुलाई (डिस्पैच नंबर 441) 2016 की सत्यापन रिपोर्ट को एचबीटीआई ने फर्जी करार दिया।