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Kanpur News: मित्र के दुख को अपना मानने वाला ही सच्चा दोस्त

Sun, 21 Sep 2025 02:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 02:00 AM IST
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A true friend is one who considers his friend's sorrow as his own.
आचार्य डा. सर्वेश द्विवेदी । - फोटो : संवाद
कानपुर। सनातन साहित्य संगम की ओर से जेके मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस शनिवार को आचार्य डॉ. सर्वेश द्विवेदी ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र के दुख को अपना माने। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में एक बार सुदामा ने महर्षि दुर्वासा से श्रापित चनों को खाकर मित्रता का धर्म निभाया और भगवान श्रीकृष्ण के हिस्से की दरिद्रता स्वयं ग्रहण कर ली।
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आचार्य सर्वेश ने कहा कि भगवान ने सुदामा को त्रैलोक्य की संपत्ति प्रदान की लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण से मिलकर सुदामा लौटे तो उन्हें प्रत्यक्ष कुछ नहीं मिला। इसके बावजूद सुदामा संतुष्ट दिखे और विचार किया कि यदि संपत्ति मिल जाती तो शायद मैं प्रभु को भूल जाता। यही कारण है कि श्रीकृष्ण ने उन्हें कुछ भी न देकर उनके प्रति बड़ा उपकार किया। सनातन साहित्य संगम के सचिव प्रसून चौहान ने बताया कि रविवार को मंदिर प्रांगण में हवन होगा और भंडारा किया जाएगा। कथा में परीक्षित उमाशंकर त्रिवेदी, दीप शिखा, डॉ. लक्ष्मी शंकर मिश्रा, उमा, विजय पाल, मीरा सिंह, आनंद सिंह, सुषमा चौहान, मंजू, उपासना, उर्मिला भदौरिया आदि रहीं।
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