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Kanpur News: खानचंद्रपुर पहुंची आईआईटी विशेषज्ञों की टीम, पानी व मिट्टी के लिए 200 नमूने
Fri, 22 Aug 2025 01:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 22 Aug 2025 01:38 AM IST
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रनियां (कानपुर देहात)। औद्योगिक क्षेत्र रनियां के खानचंद्रपुर में गुरुवार को तीन माह बाद क्रोमियम की मात्रा जांचने के लिए दिल्ली आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम पहुंचीं। टीम ने गांव के लोगों से स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ ही मिट्टी, पानी के अलग-अलग जगह से 200 नमूने लिए। सभी नमूनों को आईआईटी के विशेषज्ञ जांच के लिए दिल्ली की प्रयोगशाला ले गए हैं। अब मिट्टी और पानी में कितना क्रोमियम है, इसकी जांच करेंगे।
दिल्ली आईआईटी के रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में टीम खानचंद्रपुर पहुंची। टीम में उनके साथ अरमेंद्र गुप्ता, महाराणा शिवराज, तनिष्क, दिव्यांशु आदि विशेषज्ञ शामिल रहे। प्रोफसर डॉ. पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि आने से पहले उन्होंने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी दी। जिस पर विभाग के अनुश्रवण सहायक आशीष कुमार भी पहुंचे। इसके बाद टीम खानचंदपुर, शिवनाथपुरवा, रनियां, उमरन सहित डंप स्थल पहुंची। यहां पर पानी को देखा और मिट्टी की जांचने के लिए कई जगह खुदाई की।
टीम ने इन स्थानों से मिट्टी के 65 व पानी के 135 नमूने लिए हैं। इसके बाद आईआईटी की टीम ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण टीम को ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। बता दें कि खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग पर 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप था। इससे भूजल में क्रोमियम घुल गया और पानी दूषित हो गया था। इधर 90 हजार मीट्रिक हजार टन कचरा उठाकर निस्तारित कर दिया गया है। अब केवल 5 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा पड़ा है। जिसे निस्तारित होना शेष है। रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि समय-समय पर खानचंदपुर गांव में क्रोमियम युक्त पानी और मिट्टी का नमूने संकलित कर प्रयोगशाला भेजा गया है। इससे क्रोमियम की मात्रा जांची जा रही है। गुरुवार को लिए गए मिट्टी व पानी के नमूने जांच के लिए आईआईटी दिल्ली की प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
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पेड़ों और तनों से लिए जा चुके नमूने
खानचंद्रपुर में लगे पुराने हरे पेड़ों में समाहित क्रोमियम का पता लगाने के लिए आईआईटी दिल्ली और जर्मन यूनिवर्सिटी की पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम ने फरवरी माह में तनों व जड़ के नमूने लिए थे। टीम में शामिल आईआईटी दिल्ली व जर्मनी के जेना स्थित फैंडरिच सिचलर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रोफेसर थास्टन, डॉ. मार्कस व सहयोगी कैलोरील ने तीन रुक कर करीब 300 नमूने लिए थे।
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ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से रिसर्च कर रही टीम
खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग पर डंप क्रोमियम से दूषित हुए भूजल को शुद्ध करने व वातावरण को हरा भरा करने के लिए आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी काम कर रही है। टीम ने ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से रिचर्स कर 60 फीट गहरी बोरिंग कराई। इसके बाद ट्रीटमेंट कर पानी पीने योग्य पाया गया था।
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दिल्ली आईआईटी के रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में टीम खानचंद्रपुर पहुंची। टीम में उनके साथ अरमेंद्र गुप्ता, महाराणा शिवराज, तनिष्क, दिव्यांशु आदि विशेषज्ञ शामिल रहे। प्रोफसर डॉ. पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि आने से पहले उन्होंने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी दी। जिस पर विभाग के अनुश्रवण सहायक आशीष कुमार भी पहुंचे। इसके बाद टीम खानचंदपुर, शिवनाथपुरवा, रनियां, उमरन सहित डंप स्थल पहुंची। यहां पर पानी को देखा और मिट्टी की जांचने के लिए कई जगह खुदाई की।
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टीम ने इन स्थानों से मिट्टी के 65 व पानी के 135 नमूने लिए हैं। इसके बाद आईआईटी की टीम ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण टीम को ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। बता दें कि खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग पर 95 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप था। इससे भूजल में क्रोमियम घुल गया और पानी दूषित हो गया था। इधर 90 हजार मीट्रिक हजार टन कचरा उठाकर निस्तारित कर दिया गया है। अब केवल 5 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा पड़ा है। जिसे निस्तारित होना शेष है। रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि समय-समय पर खानचंदपुर गांव में क्रोमियम युक्त पानी और मिट्टी का नमूने संकलित कर प्रयोगशाला भेजा गया है। इससे क्रोमियम की मात्रा जांची जा रही है। गुरुवार को लिए गए मिट्टी व पानी के नमूने जांच के लिए आईआईटी दिल्ली की प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
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पेड़ों और तनों से लिए जा चुके नमूने
खानचंद्रपुर में लगे पुराने हरे पेड़ों में समाहित क्रोमियम का पता लगाने के लिए आईआईटी दिल्ली और जर्मन यूनिवर्सिटी की पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम ने फरवरी माह में तनों व जड़ के नमूने लिए थे। टीम में शामिल आईआईटी दिल्ली व जर्मनी के जेना स्थित फैंडरिच सिचलर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रोफेसर थास्टन, डॉ. मार्कस व सहयोगी कैलोरील ने तीन रुक कर करीब 300 नमूने लिए थे।
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ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से रिसर्च कर रही टीम
खानचंद्रपुर में मटियामऊ मार्ग पर डंप क्रोमियम से दूषित हुए भूजल को शुद्ध करने व वातावरण को हरा भरा करने के लिए आईआईटी दिल्ली की रामानुजन फैकल्टी काम कर रही है। टीम ने ई-माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी से रिचर्स कर 60 फीट गहरी बोरिंग कराई। इसके बाद ट्रीटमेंट कर पानी पीने योग्य पाया गया था।