फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   A river management plan is necessary in every district for a clean Ganga.

Kanpur News: स्वच्छ गंगा के लिए प्रत्येक जिले में नदी प्रबंधन योजना जरूरी

Sun, 14 Dec 2025 02:35 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Dec 2025 02:35 AM IST
विज्ञापन
A river management plan is necessary in every district for a clean Ganga.
कानपुर। गंगोत्री से गंगा सागर तक प्रत्येक जिले में गंगा की स्थिति में सुधार के लिए नदी प्रबंधन योजना जरूरी है। इसके साथ ही अन्य नदियों की हालत दुरुस्त करने के लिए भी यह योजना लागू होनी चाहिए। यह बात आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज के बैनर तले दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया वॉटर इम्पैक्ट समिट के समापन पर वैज्ञानिकों ने कहीं। दिल्ली के एफआईटीटी सभागार में हुए इस सम्मेलन में देश-विदेश के राजदूतों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों तथा अन्य आईआईटी, एनआईटी सहित प्रमुख संस्थानों के शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों ने भाग लिया।
विज्ञापन


समिट के दौरान देश की नदियों के सतत वैज्ञानिक और समग्र प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय चर्चाएं हुईं। समापन दिवस पर विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से कहा कि देश के प्रत्येक जिले में जिला नदी प्रबंधन योजना तैयार की जानी चाहिए। स्थानीय नदी-तंत्र को मजबूत किए बिना देश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। सम्मेलन में आइसलैंड और स्लोवेनिया के राजदूत तथा रायगढ़ के सांसद सुनील दत्तात्रेय तटकरे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विज्ञापन


उन्होंने जनप्रतिनिधि के दृष्टिकोण से जल प्रबंधन की चुनौतियों और आवश्यकताओं पर विचार व्यक्त किए। प्री-समिट सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के पूर्व महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने की। सी गंगा के संस्थापक और प्रमुख डॉ. विनोद तारे ने सम्मेलन की केंद्रीय थीम की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। इसके अलावा डॉ. एके गोसाइन, निदेशक डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के निदेशक सुरेश बाबू, लॉरा सस्टर्सिक ने नदी प्रबंधन के वैज्ञानिक, नीतिगत आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
विज्ञापन


बताया कि देश में जल प्रबंधन संबंधी नीतिगत दिशा तय करने वाले प्रमुख मंच के रूप में स्थापित आईडब्ल्यूआईएस की कई सिफारिशें पूर्व के संस्करणों में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अपनाई जा चुकी हैं। अंतिम दिन के पांचवें सत्र में आंध्रप्रदेश के डॉ. श्रीधर चेरुकुरी ने कहा कि हिमालयी नदियां वर्ष भर प्रवाही रहती हैं। मैदानों और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों से निकलने वाली नदियां मध्य, पश्चिम और दक्षिण में करोड़ों लोगों का जीवन-स्रोत हैं। इनका संरक्षण और उचित प्रबंधन वैज्ञानिक योजना से होगा। कार्यक्रम में सी गंगा के अध्यक्ष पूर्णेंदु बोस, डॉ. मनोज कुमार तिवारी, सन्मित आहूजा मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed