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Kanpur News: बीस हजार में बनती थी हाईस्कूल की मार्कशीट, 50 हजार में बीए की डिग्री

Sun, 01 Mar 2026 02:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 02:39 AM IST
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A high school marksheet was made for twenty thousand rupees, a BA degree for 50 thousand rupees.
कानपुर। फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने के रेट और उसका कमीशन पूरी तरह से तय था। हाईस्कूल की मार्कशीट के लिए 20 हजार और बीए की डिग्री के लिए 50 हजार रुपये लिए जाते थे। यह जानकारी एसआईटी को बाबूपुरवा के ललित मोहन अवस्थी से पूछताछ में हुआ है। उसे बाबूपुरवा पुलिस ने छात्रा की फर्जी मार्कशीट बनाने के आरोप में शनिवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। आरोपी से पूछताछ में डिग्री बनाने वाले गिरोह से संबंध मिले हैं। एसआईटी पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर उससे और जानकारी जुटा सकती है।
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संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध संकल्प शर्मा ने बताया कि नौबस्ता की छात्रा अनुष्का द्विवेदी से बीए में दाखिला लेने के लिए बाबूपुरवा के ललित मोहन अवस्थी ने करीब 14 हजार रुपये लिए थे। छात्रा को दखिला नहीं मिला, जबकि आरोपी उसके रुपये भी नहीं लौटा रहा था। करीब दो वर्ष बाद उसने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की बीए की डिग्री उसे दे दी।
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यह इंटरनेट से निकाली गई कलर कॉपी थी। छात्रा ने जांच कराई तो वह फर्जी निकली। उसने डीसीपी दक्षिण दीपेंद्रनाथ चौधरी से शिकायत की। डीसीपी ने एसीपी बाबूपुरवा से जांच कराई, जिसमें आरोपी के तार फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा से जुड़े मिले। बाबूपुरवा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसको गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ललित मोहन अवस्थी से पूछताछ में रेट और कमीशन का पता चला है।
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वह ग्राहक और डिग्री बनाने वाले के बीच की कड़ी था। उसके खिलाफ और जानकारियां जुटाई जा रही हैं। किदवईनगर पुलिस ने कुछ दिन पहले शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि गैंग से जुड़े छतरपुर के मयंक भारद्वाज, हैदराबाद के मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद के विनीत, भोपाल के शेखू व शुभम दुबे की तलाश की जा रही है।

जेसीपी अपराध के मुताबिक एसआईटी की जांच में मंगलायतन यूनिवर्सिटी को दिए गए 40 नाम व इनरोल्मेंट नंबर सही मिले हैं। इनका रिकार्ड विश्वविद्यालय के पास है। आरोपियों के पास से मिली लगभग एक हजार डिग्रियों में से 40 मंगलायतन यूनिवर्सिटी के नाम से बनी थी। सुभारती विश्वविद्यालय के नाम पर बनी 10 मार्कशीट व डिग्रियों में से केवल तीन के नाम व इनरोल्मेंट संख्या सही मिली है।
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