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महिला प्रत्याशी के नाम है अनोखा रिकॉर्ड, सांसद, विधायक भी पीछे छूटे
ब्यूरो/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 27 Nov 2017 09:29 PM IST
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महिला प्रत्याशी
- फोटो : अमर उजाला
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नगरपालिका परिषद पुखरायां में वैसे तो कई प्रत्याशी सभासद पद पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन इनमें से एक प्रत्याशी के नाम अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वार्ड नम्बर 22 राधाकृष्ण कक्ष से चुनाव लड़ रहीं नसरीन अख्तर ने कानपुर देहात जिले में जो कर दिखाया, वो विधायक व सांसद तक नहीं कर पाए हैं।
नसरीन पिछले चार बार के चुनाव में सभासद पद हासिल कर चुकी हैं और इस बार वो पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं. गौरतलब है कि उन्होंने 1995 में पहला चुनाव जीता था और तब से आज तक उन्हें जीत ही हासिल हुई है।
पढ़ें:- राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में खामियों को लेकर दिए जांच के आदेश
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अगर कानपुर देहात जिले के सभी स्तर के चुनाव देखे जाएं तो आजतक ये कारनामा कोई भी प्रत्याशी नहीं कर पाया है, जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। बात करें अगर उनकी जीत के बारे में तो उन्होंने दो चुनावों में पुरुष प्रत्याशियों को मात दी है, माना जाता है उन्हें मोहल्ले के सभी वर्गों का जबरदस्त समर्थन हासिल है।
चूंकि नसरीन का जन्म इसी मोहल्ले में हुआ इसलिए लोगों का उनके प्रति लगाव भी है, अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए नसरीन बताती हैं कि मोहल्ले के लोगों के प्यार और सम्मान की आभारी हूं जो आजतक मुझमें विश्वास जता रहे हैं। मैं इसी तरह अपने मोहल्ले के लोगों के लिए दिनरात काम करती रहूंगी, चाहे जीत हासिल हो या नहीं।
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नसरीन पिछले चार बार के चुनाव में सभासद पद हासिल कर चुकी हैं और इस बार वो पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं. गौरतलब है कि उन्होंने 1995 में पहला चुनाव जीता था और तब से आज तक उन्हें जीत ही हासिल हुई है।
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अगर कानपुर देहात जिले के सभी स्तर के चुनाव देखे जाएं तो आजतक ये कारनामा कोई भी प्रत्याशी नहीं कर पाया है, जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। बात करें अगर उनकी जीत के बारे में तो उन्होंने दो चुनावों में पुरुष प्रत्याशियों को मात दी है, माना जाता है उन्हें मोहल्ले के सभी वर्गों का जबरदस्त समर्थन हासिल है।
चूंकि नसरीन का जन्म इसी मोहल्ले में हुआ इसलिए लोगों का उनके प्रति लगाव भी है, अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए नसरीन बताती हैं कि मोहल्ले के लोगों के प्यार और सम्मान की आभारी हूं जो आजतक मुझमें विश्वास जता रहे हैं। मैं इसी तरह अपने मोहल्ले के लोगों के लिए दिनरात काम करती रहूंगी, चाहे जीत हासिल हो या नहीं।
महिला प्रत्याशी
- फोटो : अमर उजाला
नसरीन आगे बताती हैं कि उन्होंने समाजसेवा और गरीब लोगों के अधिकारों के लिए राजनीति में प्रवेश किया। हमारे मोहल्ले की हालत बेहद खराब थी, मेन रोड से मोहल्ले में आने के लिए रिक्शेवाले तक तैयार नहीं होते थे।
मैंने चुनाव लड़ने का फैसला किया और सड़क के लिए आमरण अनशन किया। इस दौरान मुझे काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी लेकिन मैं सड़क बनवा के ही मानी। उसके बाद लगातार लोगों के लिए काम रही हूं।
नसरीन बताती हैं कि मेरे घर के दरवाजे पर ताला नहीं लगता, कोई भी कभी भी समस्या लेकर आ सकता है और मैं सदैव मदद के लिए तैयार रहती हूं और लोगों का यही आशीर्वाद मुझे विजयी बनाता है। गौरतलब है कि नसरीन अख्तर एक बार पुखरायां की वाइस चेयरमैन भी रह चुकी हैं।
मैंने चुनाव लड़ने का फैसला किया और सड़क के लिए आमरण अनशन किया। इस दौरान मुझे काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी लेकिन मैं सड़क बनवा के ही मानी। उसके बाद लगातार लोगों के लिए काम रही हूं।
नसरीन बताती हैं कि मेरे घर के दरवाजे पर ताला नहीं लगता, कोई भी कभी भी समस्या लेकर आ सकता है और मैं सदैव मदद के लिए तैयार रहती हूं और लोगों का यही आशीर्वाद मुझे विजयी बनाता है। गौरतलब है कि नसरीन अख्तर एक बार पुखरायां की वाइस चेयरमैन भी रह चुकी हैं।