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आईआईटी कानपुर के नए निदेशक पर विवाद

Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
Kanpur
Kanpur Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के नए निदेशक पद पर प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना की नियु्क्ति पर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नए निदेशक की नियुक्ति का अनुमोदन नहीं किया है, फिर भी आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन एवं निदेशक की नियुक्ति पैनल समिति के सदस्य प्रोफेसर एम. आनंद कृष्णनन ने प्रोफेसर मन्ना के नाम का ऐलान कर दिया है। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की जाएगी।
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आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर संजय गोविंद धांडे का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उनकी जगह नया निदेशक चुनने की प्रक्रिया चल ही रही थी कि
चार अगस्त को हुई बीओजी की बैठक में आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना को नया निदेशक बनाने की घोषणा कर दी गई। इससे निदेशक की दौड़ में शामिल वरिष्ठ शिक्षकों में रोष फैल गया। उनका कहना है कि निदेशक के नियुक्ति पैनल में बीओजी चेयरमैन प्रोफेसर एम आनंद कृष्णनन, यूजीसी के वाइस चेयरमैन वेद प्रकाश, एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर एसएस मंथा, इन्फोसिस के गोपाल कूष्णनन व एक अन्य सदस्य को रखा गया था। इन सभी ने अनुभवी, पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ टीचर्स के आवेदन पर विचार नहीं किया। नियम, मानक को दरकिनार करते हुए सिर्फ 9 साल से प्रोफेसर के रूप में तैनात डॉ. इंद्रजीत मन्ना को नया निदेशक बनाने की फाइल आगे बढ़ा दी। यह फाइल राष्ट्रपति भवन पहुंच चुकी है, लेकिन राष्ट्रपति की मुहर नहीं लगी है। इससे पहले ही नियुक्ति समिति के सदस्य, बीओजी चेयरमैन ने उनके निदेशक बनने का ऐलान कर दिया। कुछ शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर एम आनंद कृष्णनन आईआईटी खड़गपुर से हैं। इसलिए जानबूझकर जूनियर मोस्ट को निदेशक बनाने की कवायद की है।
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सूत्रों के अनुसार आईआईटी कानपुर के निदेशक की दौड़ में इंडियन इंस्टीट्यूट साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसआर) भोपाल के निदेशक प्रोफेसर विनोद कुमार सिंह भी शामिल थे। वह प्रधानमंत्री की साइंटिफिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य हैं। भटनागर अवार्ड भी मिल चुका है। हावर्ड यूनिवर्सिटी के नोबेल पुरस्कार विजेता के साथ काम कर रहे हैं। फिर भी उनके आवेदन पर विचार नहीं हुआ है। मामले को लेकर बीओजी चेयरमैन से मोबाइल नंबर 09444051133 पर बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन मोबाइल नहीं उठा। बाद में राष्ट्रपति के अनुमोदन के बगैर नियुक्ति की घोषणा करने, नियमों की अनदेखी किए जाने को लेकर एसएमएस किया गया, इसका भी जवाब नहीं आ सका है।
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विरोध की वजह
राष्ट्रपति के अनुमोदन से पहले ही आईआईटी के नए निदेशक का ऐलान नियमों के खिलाफ है
10 साल तक पढ़ाने वाले प्रोफेसर या फिर अच्छा रिसर्च करने, पुरस्कार पाने वाले इस पद के योग्य। डॉ. मन्ना का प्रोफेसर पद पर सिर्फ नौ साल का अनुभव है
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