केडीए से 225 करोड़ के घोटाले की फाइल गायब

Kanpur Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। घोटालों का गढ़ बन चुके केडीए से अब जेके रेयान को फ्रीहोल्ड करने की फाइल गायब हो गई। इस चर्चित मामले में केडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ओएन सिंह और पूर्व नगर नियोजक नितिन मित्तल भी फंसे हैं। इधर, शासन से जांच का आदेश आने के बाद केडीए वीसी राम मोहन यादव ने फाइल अलमारी में सील करने का आदेश दिया था। हालांकि इससे पहले ही फाइल गायब हो गई। केडीए अफसर अब पूरा मामला दबाने में लगे हैं।
केडीए में बड़े-बड़े घोटालों से संबंधित फाइलें गायब होना आम बात है। इस मामले में ओएन सिंह और नितिन मित्तल पर फ्रीहोल्ड की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बरतने और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप है। दरअसल फ्रीहोल्ड होने के बाद संबंधित जमीन के मालिकों को करोड़ों रुपये की इस जमीन को खरीदने-बेचने का अधिकार मिल गया है। केडीए सूत्रों ने बताया शासन स्तर से शिकायत के बाद उपाध्यक्ष राम मोहन यादव ने संयुक्त सचिव सीपी त्रिपाठी को जेके रेयान से संबंधित अभिलेख आलमारी में सील करने का आदेश दिया था। त्रिपाठी के फाइलें मंगाने पर तहसीलदार डीडी वर्मा ने बल्क सेल के बाबू से संपर्क किया। सूत्रों के मुताबिक बाबू के पास अभिलेख नहीं मिले। सूत्रों का कहना है जेके रेयान को फ्रीहोल्ड करके करोड़ों के वारे-न्यारे करने के बाद मामला दबाने के उद्देश्य से उसी वक्त फाइल गायब कर दी गई थी।

यह है मामला
सत्तर के दशक में जेके कंपनी ने कपड़ा बनाने के लिए जाजमऊ में जेके रेयान नाम से मिल शुरू की थी। यह मिल औद्योगिक श्रेणी की 90.81 एकड़ (3,63,240 वर्ग मीटर) भूमि में है। नौ फरवरी 2011 को यह भूमि फ्रीहोल्ड करा ली गई। नियमत: औद्योगिक भूमि को फ्रीहोल्ड कराने के लिए शासन की अनुमति लेनी होती है लेकिन जेके रेयान के मामले में ऐसा नहीं हुआ। आरोप यह भी है फ्रीहोल्ड करते वक्त वर्तमान दर के मुताबिक 28 प्रतिशत अनिर्माण शुल्क देय था जो नहीं लिया गया। इस प्रकार करीब 225 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। छानबीन में यह भी सामने आया है कि जाजमऊ क्षेत्र जोन एक के अंतर्गत आता है जिसका अपना संयुक्त सचिव नामित है। हालांकि, नामित संयुक्त सचिव से फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री न कराकर इसे नगर नियोजक नितिन मित्तल से कराया गया।

उपाध्यक्ष ने किया जांच से किनारा
आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग तीन के उपसचिव ने 20 मार्च को तत्कालीन कमिश्नर के माध्यम से उपाध्यक्ष ओएन सिंह और नगर नियोजक नितिन मित्तल के खिलाफ अनियमतताओं के संबंध में आख्या मांगी थी। कमिश्नर ने वर्तमान उपाध्यक्ष राम मोहन यादव से आख्या मांगी। उन्होंने चार मई को भेजे जवाब में जेके रेयान के मामले में जांच से खुद को किनारे कर लिया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि ओएन सिंह और नितिन मित्तल के खिलाफ उपाध्यक्ष स्तर से जांच करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में इस प्रकरण में शासन स्तर से जांच किया जाना उचित होगा। उन्होंने कहा इस संबंध में अगर केडीए से किसी सूचना अथवा अभिलेख की आवश्यकता होगी तो वह उपलब्ध कराया जाएगा।

इन घोटालों की फाइलें हुई गायब
रानीगंज औद्योगिक क्षेत्र
यहां की सत्तर एकड़ से अधिक जमीन मेसर्स सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स (प्राइवेट) लिमिटेड को पट्टे पर दी गई थी। कंपनी के दिवालिया होने पर कोर्ट के आदेश पर जमीन नीलाम करा दी। अब यहां 177 प्लाट पर छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां चल रही हैं लेकिन केडीए से किसी का नक्शा पास नहीं है। फैक्ट्री मालिकों का कहना है उनके पास नक्शे की मूल प्रति है जबकि केडीए के पास न नक्शा है न ले आउट और साइट प्लान।
पनकी की फर्जी रजिस्ट्रियां
गंगागंज क्षेत्र में करीब चार दर्जन प्लाट की फर्जी रजिस्ट्रियां कर डाली गईं। ये प्लाट आवंटित किसी और के नाम पर थे और रजिस्ट्रियां किसी और के नाम कर दी गई। इस खेल में केडीए के भ्रष्ट बाबुओं का रैकेट शामिल था। मामले का खुलासा होने पर छानबीन हुई लेकिन रजिस्ट्री से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिले। इस मामले में केडीए ने कोर्ट में वाद दाखिल किया है।
जुही का फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण
वर्ष 2006 में करीब तीन दर्जन प्लाट की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से कर दी गई थीं। जांच में बाबू कंचन कुमार गुप्ता की मिलीभगत सामने आई। बाबू को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए। कंचन चार साल निलंबित रहा। इस बीच केडीए से रजिस्ट्री प्रकरण की फाइल गायब कर दी गई।

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