मंत्री-विधायक के रिश्तेदार बन गए मैनेजर

Kanpur Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) की बैकलॉग भर्ती (2008-09) में भारी धांधली का खुलासा हुआ है। महालेखाकार इलाहाबाद के वरिष्ठ ऑडिट ऑफीसर जयप्रकाश के ऑडिटआब्जेक्शन में यह मामला सामने आया है। इसमें कहा गया है कि नियुक्ति पाने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी मंत्री, विधायक, आईएएस के बेटे, बेटियां या फिर उनके रिश्तेदार हैं। इनके शैक्षिक दस्तावेज, जाति प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र का सत्यापन नहीं कराया गया। सर्विस बुक और व्यक्तिगत पत्रावलियां भी दुरुस्त नही हैं। आठ मैनेजर, डिप्टी मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट ऑफिसर ने आपत्ति दर्ज कराते हुए नियुक्ति, जाति, अनुभव प्रमाणपत्र, शैक्षिक दस्तावेज के सत्यापन की सिफारिश की है। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है। यूपीएसआईडीसी कर्मचारी संयुक्त संघ के महामंत्री बीके सिंह और देवेन्द्र सिंह, चंद्रदीप श्रीवास्तव ने इस मामले की शिकायत शासन से भी की है।
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यूपीएसआईडीसी की बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया 2008 से शुरू हुई, जो 2009 तक चली। ग्रुप ए, बी और डी के करीब 176 पदों के विज्ञापन निकाले गए। महालेखाकार की जांच में पता चला है कि इनमें से ज्यादातर पदों पर मंत्री, विधायक, आईएएस के बेटे, बेटियों या फिर उनके करीबी रिश्तेदारों की भर्ती की गई। सभी को एक साल बाद ही स्थायी कर दिया गया, जो गलत है। क्षेत्रीय प्रबंधक सहित तमाम महत्वपूर्ण पदों पर भी तैनाती दे दी गई। इसमें भी नियम, कानून का पालन नहीं किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यूपीएसआईडीसी के अध्यक्ष रहे पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सगे भतीजे रामेंद्र कुशवाहा को डिप्टी मैनेजर बनाया गया है। इनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि रामेंद्र ने ओबीसी सर्टिफिकेट का गलत लाभ लिया है। उनका जाति प्रमाण पत्र (संख्या 340 ) 16 जुलाई, 2008 को जारी किया गया है, जो केन्द्रीय नौकरियों के लिए मान्य था। फिर भी राज्य सरकार की नौकरी का लाभ लिया गया है। कुशवाहा के ही रिश्तेदार रमाकांत कुशवाहा की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। असिस्टेंट मैनेजर पद पर नियुक्ति पाने वाले रमाकांत ने बांदा के बबेरू तहसील से 2 दिसंबर 2003 को जारी जाति प्रमाणपत्र का लाभ लिया है, जो गलत है क्योंकि नौकरी में छह माह पहले का जाति प्रमाणपत्र ही मान्य होता है। उन्नाव के भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से बसपा विधायक रहे कृपाशंकर सिंह की बेटी छाया सिंह को भी असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया है। छाया केजाति प्रमाणपत्र, टेनरी के अनुभव प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। 22 फरवरी 2002 को जारी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर ही नौकरी दे दी है। यह प्रमाण पत्र शपथ पत्र के आधार पर जमा हुआ है। यूपीएसआईडीसी के तत्कालीन एमडी एसके वर्मा के रिश्तेदार तेजवीर सिंह को मैनेजर बनाया गया है। उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठे हैं। ऑडिट आफिसर ने कहा है कि तेजवीर सिंह को इंटरमीडिएट के प्रोविजनल अंकपत्र के सहारे नौकरी दी गई है, जो गलत है। इसके अलावा आरक्षित पद के विपरीत नियुक्ति दी गई है। एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के बेटे, बसपा सरकार के कई अन्य मंत्री, आईएएस के रिश्तेदार, और संबंधी भी डिप्टी मैनेजर, क्लर्क की नौकरी पाने में सफल रहे हैं।
इनसेट

जांच की आंच

सचिन सिंह, डिप्टी मैनेजर (नियुक्ति 20 नवंबर 2009)
आपत्ति- ओबीसी के प्रमाण पत्र का गलत लाभ लिया

गिरीश कुमार शाक्य, मैनेजर (नियुक्ति 20 अगस्त 2008)
आपत्ति- क्रीमीलेयर में आने के बाद भी आगरा से बने ओबीसी प्रमाण पत्र का लाभ

छाया सिंह, डिप्टी मैनेजर (नियुक्ति 12 अगस्त 2008)
आपत्ति- अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी, प्रमाण पत्र का गलत लाभ

रमाकांत कुशवाहा, असिस्टेंट मैनेजर (नियुक्ति 18 अगस्त 2008)
आपत्ति--12 दिसंबर 2003 को बांदा से जाति प्रमाणपत्र जारी कराया, जो छह माह पहले का होना चाहिए।

मंसूर कटियार, असिस्टेंट मैनेजर (नियुक्ति 28 जनवरी 2009)
आपत्ति-- केन्द्रीय नौकरी के लिए मान्य जाति प्रमाण को राज्य सरकार की नौकरी में लगाया, जो गलत है

तेज वीर सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक (नियुक्ति 29 अगस्त 2008)
आपत्ति-- इंटरमीडिएट का प्रोविजनल सर्टिफिकेट लगाया, जो मान्य नहीं, एमबीए सहित अन्य किसी डिग्री का जिक्र नहीं

रामेन्द्र कुशवाहा, डिप्टी मैनेजर (नियुक्ति 12 अगस्त 2008)
आपत्ति-- ओबीसी प्रमाणपत्र का गलत इस्तेमाल

सलीम अहमद, मैनेजर (नियुक्ति 5 अक्तूबर 2009)
आपत्ति- फार्म भरने में क्रीमीलेयर का जिक्र न करना


कोट--

ऑडिट आब्जेक्शन रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा। फिर नोटिस जारी करके संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला या सही दस्तावेज नहीं पेश किया गया तो अनुशासनात्मक, विभागीय कार्रवाई की जाएगी। नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले भी दंडित किए जाएंगे।
मो. इफ्तिखारुद्दीन, प्रबंध निदेशक यूपीएसआईडीसी
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