{"_id":"38-203214","slug":"Kanpur-203214-38","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा नेता को ठिकाने लगाने को एक हुए दो दुश्मन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा नेता को ठिकाने लगाने को एक हुए दो दुश्मन
Kanpur
Updated Sun, 26 Oct 2014 05:32 AM IST
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कानपुर। सपा नेता पप्पू निषाद को ठिकाने लगाने के लिए उसके दो दुश्मन ग्राम प्रधान रामदास और पप्पू का चचेरा भाई सुखदेव एक हो गए थे। यह कहना है पप्पू के परिजनों का। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू की हत्या की साजिश रची और शुक्रवार को मौका पाकर उसे मौत के घाट उतार भी दिया। उनका कहना है कि पप्पू ने ग्राम प्रधान और सुखदेव की कारस्तानी की शिकायत डीएम से कर दी थी। इस मामले पर दोनों के खिलाफ जांच चल रही है तब से दोनों पप्पू से रंजिश रखने लगे थे। वहीं सपा नेता पप्पू निषाद की हत्या की एक बड़ी वजह कटरी की जमीन और क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा उसका कद था। इससे भी रामदास की खुन्नस और बढ़ गई थी।
सपा नेता पप्पू के परिजनों के मुताबिक ग्राम प्रधान रामदास ने मनरेगा और पट्टा देने में काफी घोटाला किया है। इसकी शिकायत गांव वालों ने पप्पू से की थी। करीब डेढ़ महीने पहले पप्पू ने डीएम डॉ.रोशन जैकब से इस भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत की थी। इस मामले की जांच डीएम ने पीडब्लूडी के अभिशाषी अभियंता को सौंप रखी है। इधर, नत्थापुरवा में रहने वाले सुखदेव ने कटरी के मंगलपुर गांव के एक सरकारी तालाब में कब्जा कर लिया था, इसकी भी शिकायत पप्पू ने डीएम से की थी। सुखदेव के खिलाफ भी जांच चल रही है। उधर बाढ़ खत्म होने के बाद कटरी की जमीन पर लोग कब्जा कर लेते हैं। इसके बाद जमीन किसानों को देकर सब्जी की फसल पैदा कराते हैं। अभी तक ग्राम प्रधान का कटरी की जमीन पर एक छत्रराज था। अब सत्ताधारी दल और विधायक मुनींद्र शुक्ला का करीबी होने की वजह से वह भी जमीनों पर अपने चहेतों को कब्जा दिलाने लगा था। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि जमीन पर कब्जा और पट्टा कराने को लेकर किसान खासा पैसा खर्च करते हैं। इस वजह से कटरी की जमीन को लेकर होड़ रहती है। इधर, पप्पू की गांव वालों में पैठ गहरी हो रही थी। वह गांव वालों की आर्थिक मदद भी करता था। किसी परिवार में लड़की का ब्याह होने पर हर संभव सहयोग करता था। इससे गांव वालों का उसके प्रति झुकाव बढ़ गया था। इससे रामदास को अपनी प्रधानी जाने का डर सता रहा था। परिजनों के मुताबिक इसी खुन्नस में आकर रामदास ने पप्पू को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी की और इस काम में मदद के लिए सुखदेव से दोस्ती गांठ ली। परिजनों का आरोप है कि सुखदेव और रामदास ने साजिश के तहत पप्पू, दिनेश और उनके समर्थकों पर जानलेवा हमला बोला। इसमें पप्पू और दिनेश की जान चली गई। गांव वालों का कहना है कि वारदात से पहले ही आरोपियों ने अपने परिजनों को घर से हटा दिया था। इनके घरों में ताले लटक रहे थे।
बयान:
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घटना के पीछे कटरी की जमीन पर कब्जे की रंजिश की बात भी सामने आई है। इस बिन्दु पर एसडीएम सदर योगेंद्र कुमार जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-शत्रुघ्न सिंह, एडीएम फाइनेंस
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दिनेश की पत्नी ने किया आत्मदाह का प्रयास
सपा नेता पप्पू और प्रधान रामदास के बीच हुए संघर्ष में जान गंवाने वाले दिनेश निषाद की पत्नी राजरानी ने शनिवार को आत्मदाह का प्रयास किया। दोपहर में राजरानी ने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। शरीर पर केरोसिन डालकर आग लगाने का प्रयास किया। जब राजरानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली तो रिश्तेदारों और गांव वालों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा और राजरानी के हाथ से माचिस की डिब्बी छीन ली। उसे समझा-बुझाकर कमरे से बाहर निकाला। इसके बाद परिवार वाले राजरानी पर निगाह रखे रहे।
भीड़ ने प्रधान के घर बोला हमला, पथराव
कानपुर। सपा नेता पप्पू निषाद और दिनेश की हत्या से गुस्साए लोगों ने शनिवार को भी खूब बवाल किया। दोपहर में पप्पू सर्मथक फिर सड़क पर उतर आए और आरोपी ग्राम प्रधान रामदास के घर पर हमला बोल दिया और जमकर पथराव किया। सूचना पाकर मौके पर फोर्स और लोगों के समझाकर वहां से हटाया। इसके बाद गंगा बैराज पर कानपुर-उन्नाव रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामा देख पुलिस ने बैरियर लगाकर ट्रैफिक रोक दिया। पोस्टमार्टम के बाद दिनेश और पप्पू के शव वहां पहुंचे तो लोग सड़क के हटे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में गंगा बैराज में ही दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कराया गया। जबकि सुरेश का शव परिजन अपने घर ले गए। इसके बाद वाहनों का आवागमन शुरू हुआ।
छावनी बना गांव और पोस्टमार्टम हाउस
कानपुर। तीन लोगों की हत्या के बाद गंगा बैराज से नत्थापुरवा गांव तक का इलाका छावनी में तब्दील हो गया। क्षेत्र के केवल खादी और नीली वर्दी में जवान नजर आ रहे थे। अत्याधुनिक असलहे लेकर पुलिस, पीएसी और पैरा मिलेट्री (आरएएफ) के जवान घूम रहे थे। रात भर बैराज से नत्थापुरवा गांव तक जवान चहल-कदमी करते लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते रहे। इधर, बवाल के डर से रात में हैलट और उर्सला में भी अफसर और पुलिस कर्मी मुस्तैद रहे। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस में पुलिस, पीएसी, आरएएफ के जवानों के साथ कई सीओ, थानेदार लावलश्कर के साथ यहां मौजूद रहे। एसएसपी के. सुनील इमैनुएल, एसपी पश्चिम हरीश चंदर भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। दोपहर बाद तीनों शवों का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में शवों को मृतकों के घर ले जाया गया। वहां से अंतिम संस्कार के लिए शवों को घाट तक पुलिस सुरक्षा में ले जाया गया।
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तीन डॉक्टरों ने पैनल ने किया पोस्टमार्टम
पप्पू, दिनेश और सुरेश के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया। टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी मिश्रा, डॉ. जयप्रकाश गुप्ता और डॉ. जयप्रकाश शामिल रहे। पोस्टमार्टम में पता चला कि पप्पू और दिनेश के शरीर पर धारदार हथियार के निशान मिले हैं। पप्पू के चेहरे पर बाएं साइड पर आंख के नीचे और ऊपर तीन चोटें, बाएं हाथ की हथेली पर पीछे एक चोट, पैर पर सामने दो चोटें, दाहिने हाथ की छोटी अंगुली कटी मिली। दिनेश के शरीर में धारदार हथियार की आठ चोटें थी। वहीं ड्राइवर सुरेश सक्सेना के शरीर में पेट, सीने और हाथ में 12 बोर के 12 छर्रे मिले हैं। यह साफ नहीं हो सका है कि गोली तमंचे से चलाई गई या लाइसेंसी बंदूक से। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
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इलाके में छाया अंधेरा, गूंजी चीखें
कानपुर। सपा नेता पप्पू निषाद, उनके मौसेरे भाई दिनेश और ग्राम प्रधान के ड्राइवर सुरेश की हत्या से गांव में दहशत फैल गई। डर से गांव के लोग घरों में दुबक गए और घरों की लाइटें भी बंद हो गईं। देखते ही देखते रोशनी के त्योहार दीपावली पर गांव अंधेरा छा गया। वारदात की सूचना पर जब पुलिस गांव पहुंची और लोगों के घरों के दरवाजे खटखटाए तो कुछ लोगों ने दरवाजे खोले लेकिन मुंह नहीं खोला। घटना के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से इनकार कर दिया। तमाम प्रयास के बाद भी यह मालूम नहीं हुआ कि दोनों के बीच विवाद किसी बात पर शुरू हुआ था। इधर, पप्पू, दिनेश और सुरेश के घरों में इनकी मौत की खबर पहुंची तो परिजनों की खुशियां काफूर हो गईं और महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की चीखें गूंज उठी।
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सपा नेता पप्पू के परिजनों के मुताबिक ग्राम प्रधान रामदास ने मनरेगा और पट्टा देने में काफी घोटाला किया है। इसकी शिकायत गांव वालों ने पप्पू से की थी। करीब डेढ़ महीने पहले पप्पू ने डीएम डॉ.रोशन जैकब से इस भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत की थी। इस मामले की जांच डीएम ने पीडब्लूडी के अभिशाषी अभियंता को सौंप रखी है। इधर, नत्थापुरवा में रहने वाले सुखदेव ने कटरी के मंगलपुर गांव के एक सरकारी तालाब में कब्जा कर लिया था, इसकी भी शिकायत पप्पू ने डीएम से की थी। सुखदेव के खिलाफ भी जांच चल रही है। उधर बाढ़ खत्म होने के बाद कटरी की जमीन पर लोग कब्जा कर लेते हैं। इसके बाद जमीन किसानों को देकर सब्जी की फसल पैदा कराते हैं। अभी तक ग्राम प्रधान का कटरी की जमीन पर एक छत्रराज था। अब सत्ताधारी दल और विधायक मुनींद्र शुक्ला का करीबी होने की वजह से वह भी जमीनों पर अपने चहेतों को कब्जा दिलाने लगा था। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि जमीन पर कब्जा और पट्टा कराने को लेकर किसान खासा पैसा खर्च करते हैं। इस वजह से कटरी की जमीन को लेकर होड़ रहती है। इधर, पप्पू की गांव वालों में पैठ गहरी हो रही थी। वह गांव वालों की आर्थिक मदद भी करता था। किसी परिवार में लड़की का ब्याह होने पर हर संभव सहयोग करता था। इससे गांव वालों का उसके प्रति झुकाव बढ़ गया था। इससे रामदास को अपनी प्रधानी जाने का डर सता रहा था। परिजनों के मुताबिक इसी खुन्नस में आकर रामदास ने पप्पू को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी की और इस काम में मदद के लिए सुखदेव से दोस्ती गांठ ली। परिजनों का आरोप है कि सुखदेव और रामदास ने साजिश के तहत पप्पू, दिनेश और उनके समर्थकों पर जानलेवा हमला बोला। इसमें पप्पू और दिनेश की जान चली गई। गांव वालों का कहना है कि वारदात से पहले ही आरोपियों ने अपने परिजनों को घर से हटा दिया था। इनके घरों में ताले लटक रहे थे।
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घटना के पीछे कटरी की जमीन पर कब्जे की रंजिश की बात भी सामने आई है। इस बिन्दु पर एसडीएम सदर योगेंद्र कुमार जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दिनेश की पत्नी ने किया आत्मदाह का प्रयास
सपा नेता पप्पू और प्रधान रामदास के बीच हुए संघर्ष में जान गंवाने वाले दिनेश निषाद की पत्नी राजरानी ने शनिवार को आत्मदाह का प्रयास किया। दोपहर में राजरानी ने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। शरीर पर केरोसिन डालकर आग लगाने का प्रयास किया। जब राजरानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली तो रिश्तेदारों और गांव वालों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा और राजरानी के हाथ से माचिस की डिब्बी छीन ली। उसे समझा-बुझाकर कमरे से बाहर निकाला। इसके बाद परिवार वाले राजरानी पर निगाह रखे रहे।
भीड़ ने प्रधान के घर बोला हमला, पथराव
कानपुर। सपा नेता पप्पू निषाद और दिनेश की हत्या से गुस्साए लोगों ने शनिवार को भी खूब बवाल किया। दोपहर में पप्पू सर्मथक फिर सड़क पर उतर आए और आरोपी ग्राम प्रधान रामदास के घर पर हमला बोल दिया और जमकर पथराव किया। सूचना पाकर मौके पर फोर्स और लोगों के समझाकर वहां से हटाया। इसके बाद गंगा बैराज पर कानपुर-उन्नाव रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामा देख पुलिस ने बैरियर लगाकर ट्रैफिक रोक दिया। पोस्टमार्टम के बाद दिनेश और पप्पू के शव वहां पहुंचे तो लोग सड़क के हटे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में गंगा बैराज में ही दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कराया गया। जबकि सुरेश का शव परिजन अपने घर ले गए। इसके बाद वाहनों का आवागमन शुरू हुआ।
छावनी बना गांव और पोस्टमार्टम हाउस
कानपुर। तीन लोगों की हत्या के बाद गंगा बैराज से नत्थापुरवा गांव तक का इलाका छावनी में तब्दील हो गया। क्षेत्र के केवल खादी और नीली वर्दी में जवान नजर आ रहे थे। अत्याधुनिक असलहे लेकर पुलिस, पीएसी और पैरा मिलेट्री (आरएएफ) के जवान घूम रहे थे। रात भर बैराज से नत्थापुरवा गांव तक जवान चहल-कदमी करते लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते रहे। इधर, बवाल के डर से रात में हैलट और उर्सला में भी अफसर और पुलिस कर्मी मुस्तैद रहे। शनिवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस में पुलिस, पीएसी, आरएएफ के जवानों के साथ कई सीओ, थानेदार लावलश्कर के साथ यहां मौजूद रहे। एसएसपी के. सुनील इमैनुएल, एसपी पश्चिम हरीश चंदर भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। दोपहर बाद तीनों शवों का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में शवों को मृतकों के घर ले जाया गया। वहां से अंतिम संस्कार के लिए शवों को घाट तक पुलिस सुरक्षा में ले जाया गया।
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तीन डॉक्टरों ने पैनल ने किया पोस्टमार्टम
पप्पू, दिनेश और सुरेश के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया। टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी मिश्रा, डॉ. जयप्रकाश गुप्ता और डॉ. जयप्रकाश शामिल रहे। पोस्टमार्टम में पता चला कि पप्पू और दिनेश के शरीर पर धारदार हथियार के निशान मिले हैं। पप्पू के चेहरे पर बाएं साइड पर आंख के नीचे और ऊपर तीन चोटें, बाएं हाथ की हथेली पर पीछे एक चोट, पैर पर सामने दो चोटें, दाहिने हाथ की छोटी अंगुली कटी मिली। दिनेश के शरीर में धारदार हथियार की आठ चोटें थी। वहीं ड्राइवर सुरेश सक्सेना के शरीर में पेट, सीने और हाथ में 12 बोर के 12 छर्रे मिले हैं। यह साफ नहीं हो सका है कि गोली तमंचे से चलाई गई या लाइसेंसी बंदूक से। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
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इलाके में छाया अंधेरा, गूंजी चीखें
कानपुर। सपा नेता पप्पू निषाद, उनके मौसेरे भाई दिनेश और ग्राम प्रधान के ड्राइवर सुरेश की हत्या से गांव में दहशत फैल गई। डर से गांव के लोग घरों में दुबक गए और घरों की लाइटें भी बंद हो गईं। देखते ही देखते रोशनी के त्योहार दीपावली पर गांव अंधेरा छा गया। वारदात की सूचना पर जब पुलिस गांव पहुंची और लोगों के घरों के दरवाजे खटखटाए तो कुछ लोगों ने दरवाजे खोले लेकिन मुंह नहीं खोला। घटना के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से इनकार कर दिया। तमाम प्रयास के बाद भी यह मालूम नहीं हुआ कि दोनों के बीच विवाद किसी बात पर शुरू हुआ था। इधर, पप्पू, दिनेश और सुरेश के घरों में इनकी मौत की खबर पहुंची तो परिजनों की खुशियां काफूर हो गईं और महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की चीखें गूंज उठी।