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इंसानियत जिंदाबाद, मां की गोद आबाद
Kanpur
Updated Sat, 10 May 2014 05:31 AM IST
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कानपुर। ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा।’ ढकनापुरवा की कुछ महिलाओं ने यह पैगाम देकर इंसानियत की लाज रही। हुआ यूं कि ढकनापुरवा की एक गरीब गर्भवती महिला कविता को उसका शराबी पति मारपीट कर बेसहारा छोड़कर भाग गया। बेचारी कविता दो छोटे-छोटे बच्चों को लेकर रात-दिन आंसू बहाती रही इस चिंता में कि गर्भ में पल रहे बच्चे का क्या होगा, कैसे जन्म होगा कौन अस्पताल ले जाएगा, खर्चा-पानी कहां से आएगा? इसी सोच में डूबी कविता को 8 मई की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हो गई तो उसके घरवाले तो नहीं पसीजे लेकिन पड़ोस की महिलाएं आगे आ गईं। उसे अस्पताल पहुंचाया, चंदा करके डिलीवरी का खर्च उठाया। शुक्रवार को ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने उसे ब्लड दिलाया और गुरुनानक मोदीखाना संस्था ने हर महीने राशन देने का बीड़ा भी उठा लिया। गोद में नवजात बच्चा लिए कविता इन सभी को दुआएं देते नहीं थक रही।
शुक्रवार को जच्चा-बच्चा अस्पताल के एकलैम्पशिया रूम के बेड नंबर-दो पर भर्ती कविता की डबडबाती आंखें, रूंधा गला और जुंबिश करते होंठ उसकी पीड़ा बयां करते नजर आ रहे थे। गोद में नवजात शिशु की किलकारियां गूंज रही थीं। कविता ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के झरिया (मुंगेर) की निवासी है। पति मदन के साथ ढकनापुरवा में पांच साल से किराए का कमरा लेकर रहती है। दो बच्चे सूरज (7) और नंदनी (4) हैं। मदन कलक्टरगंज में पल्लेदारी करता है। कविता के मुताबिक पति शराबी है और उसने तीन महीने से मकान का किराया नहीं दिया। उसने बताया कि हफ्ते भर पहले उसने पति से मकान का किराया और डिलीवरी के लिए रुपयों का इंतजाम करने को कहा तो वह झगड़ा करने लगा और उसे पीटकर भाग गया। तब से उसका पता नहीं है। कविता ने बताया कि आठ मई की सुबह उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उसकी चीखें सुनकर पड़ोसन पूनम कनौजिया दौड़ी-दौड़ी आईं। उसे रिक्शे से डफरिन ले गईं। वहां आपरेशन की बात कहते हुए खून लाने को कहा गया। उसके आगे-पीछे कोई न होने की वजह से खून की व्यवस्था नहीं हो पाई तो वहां भर्ती करने के बजाय टरका दिया गया। घर वापस आई तो दूसरी पड़ोसन पूनम पटेल, बीना, पूजा और उनके पति संतोष पांडे ने 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस बुलाई। फिर दोपहर ढाई बजे अपर इंडिया जच्चा बच्चा अस्पताल ले जाकर उसे भर्ती कराया। वहां रात सवा ग्यारह बजे कविता की डिलीवरी हुई। पूनम और पूजा ने बताया कि कल से वे आपस में चंदा कर ढाई हजार रुपये की दवाएं ला चुके हैं। शुक्रवार को सुबह डॉक्टर डॉ. नीना गुप्ता ने कविता की कमजोरी का हवाला देकर एक यूनिट रक्त का तुरंत इंतजाम करने को कहा। बकौल पूनम पटेल उस समय रक्त देने के लिए कोई नजर नहीं आ रहा था। वे परेशान थीं। रोते-रोते वह बाहर निकलीं, जहां उन्हें चाय की दुकान में रखे ‘अमर उजाला’ अखबार पर नजर पड़ी। उसमें लिखा नंबर मिलाने से रक्त की व्यवस्था हुई।
इसी बीच कविता की हालत का पता चलने पर गुरुनानक मोदीखाना कमेटी के जुगल सिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उसे हर महीने नि:शुल्क राशन देने का ऐलान किया। लाजपत नगर गुरुद्वारा से जुड़े जुगल सिंह ने बताया कि उनकी संस्था 125 जरूरतमंद महिलाओं को हर महीने के पहले रविवार को एक-एक महीने का राशन मुफ्त देती है। कोई भी जरूरतमंद विधवा या परेशान महिला नजर आती है तो उसे भी इसी तरह राशन दिया जाएगा।
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शुक्रवार को जच्चा-बच्चा अस्पताल के एकलैम्पशिया रूम के बेड नंबर-दो पर भर्ती कविता की डबडबाती आंखें, रूंधा गला और जुंबिश करते होंठ उसकी पीड़ा बयां करते नजर आ रहे थे। गोद में नवजात शिशु की किलकारियां गूंज रही थीं। कविता ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के झरिया (मुंगेर) की निवासी है। पति मदन के साथ ढकनापुरवा में पांच साल से किराए का कमरा लेकर रहती है। दो बच्चे सूरज (7) और नंदनी (4) हैं। मदन कलक्टरगंज में पल्लेदारी करता है। कविता के मुताबिक पति शराबी है और उसने तीन महीने से मकान का किराया नहीं दिया। उसने बताया कि हफ्ते भर पहले उसने पति से मकान का किराया और डिलीवरी के लिए रुपयों का इंतजाम करने को कहा तो वह झगड़ा करने लगा और उसे पीटकर भाग गया। तब से उसका पता नहीं है। कविता ने बताया कि आठ मई की सुबह उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उसकी चीखें सुनकर पड़ोसन पूनम कनौजिया दौड़ी-दौड़ी आईं। उसे रिक्शे से डफरिन ले गईं। वहां आपरेशन की बात कहते हुए खून लाने को कहा गया। उसके आगे-पीछे कोई न होने की वजह से खून की व्यवस्था नहीं हो पाई तो वहां भर्ती करने के बजाय टरका दिया गया। घर वापस आई तो दूसरी पड़ोसन पूनम पटेल, बीना, पूजा और उनके पति संतोष पांडे ने 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस बुलाई। फिर दोपहर ढाई बजे अपर इंडिया जच्चा बच्चा अस्पताल ले जाकर उसे भर्ती कराया। वहां रात सवा ग्यारह बजे कविता की डिलीवरी हुई। पूनम और पूजा ने बताया कि कल से वे आपस में चंदा कर ढाई हजार रुपये की दवाएं ला चुके हैं। शुक्रवार को सुबह डॉक्टर डॉ. नीना गुप्ता ने कविता की कमजोरी का हवाला देकर एक यूनिट रक्त का तुरंत इंतजाम करने को कहा। बकौल पूनम पटेल उस समय रक्त देने के लिए कोई नजर नहीं आ रहा था। वे परेशान थीं। रोते-रोते वह बाहर निकलीं, जहां उन्हें चाय की दुकान में रखे ‘अमर उजाला’ अखबार पर नजर पड़ी। उसमें लिखा नंबर मिलाने से रक्त की व्यवस्था हुई।
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इसी बीच कविता की हालत का पता चलने पर गुरुनानक मोदीखाना कमेटी के जुगल सिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उसे हर महीने नि:शुल्क राशन देने का ऐलान किया। लाजपत नगर गुरुद्वारा से जुड़े जुगल सिंह ने बताया कि उनकी संस्था 125 जरूरतमंद महिलाओं को हर महीने के पहले रविवार को एक-एक महीने का राशन मुफ्त देती है। कोई भी जरूरतमंद विधवा या परेशान महिला नजर आती है तो उसे भी इसी तरह राशन दिया जाएगा।
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