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पैराशूट फैक्ट्री में लाखों का कपड़ा बर्बाद
Kanpur
Updated Wed, 09 Oct 2013 05:39 AM IST
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कानपुर। मेंटिनेंस न हो पाने के कारण पैराशूट फैक्ट्री में आर्मी-एयरफोर्स जवानों के लिए बनने वाले लाखों मोजों का कपड़ा रद्दी हो गया। इससे फैक्ट्री को भारी क्षति हुई है। इसके चलते मेंटिनेंस करने वाली कंपनी को फैक्ट्री ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। फिलहाल मशीनों का मेंटिनेंस निजी क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों से कराया जा रहा है।
पैराशूट फैक्ट्री में आर्मी और एयरफोर्स के जवानों के लिए मोजे भी बनते हैं। बेहतर क्वालिटी के लिए सोलोमन कंपनी की कंप्यूटराइज्ड मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों का एनुअल मेंटिनेंस कांट्रैक्ट दिल्ली की केपलॉन नाम की कंपनी को दिया गया था। फैक्ट्री के सूत्रों के मुताबिक फर्म ने सही तरीके से मशीनों का मेंटिनेंस नहीं किया। इसके अलावा कांट्रैक्ट पूरा होने के पूर्व ही कंपनी गायब हो गई। इस वित्तीय वर्ष में आर्मी के लिए डार्क ओजी मोजा के दो लाख पीस, एयरफोर्स के लिए काले रंग के सवा दो लाख पीस सहित अन्य आर्डर मिलाकर कुल 9 लाख 22600 मोजे का आर्डर था। इस सिलसिले में जिन फर्मों से कपड़े की सप्लाई होनी थी, उन्होंने लगभग 80 फीसदी कपड़ा सप्लाई कर भी दिया मगर इस कपड़े से सिर्फ 89285 मोजे बनाकर डिसपैच किए जा सके हैं। बाकी का लाखों रुपये का कपड़ा मशीनों द्वारा सटीक उत्पादन न किए जाने के चलते बर्बाद हो गया।
मशीनों के मेंटिनेंस के मामले में खराब परफॉर्मेंस के चलते केपलॉन से चार लाख रुपये की रिकवरी की गई है। बर्बादी उतनी नहीं हुई है, जितनी आप बता रहे हैं। अभी इसका आकलन किया जा रहा है।
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आलोक दुबे, प्रभारी (मोजा सेक्शन)
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पैराशूट फैक्ट्री में आर्मी और एयरफोर्स के जवानों के लिए मोजे भी बनते हैं। बेहतर क्वालिटी के लिए सोलोमन कंपनी की कंप्यूटराइज्ड मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों का एनुअल मेंटिनेंस कांट्रैक्ट दिल्ली की केपलॉन नाम की कंपनी को दिया गया था। फैक्ट्री के सूत्रों के मुताबिक फर्म ने सही तरीके से मशीनों का मेंटिनेंस नहीं किया। इसके अलावा कांट्रैक्ट पूरा होने के पूर्व ही कंपनी गायब हो गई। इस वित्तीय वर्ष में आर्मी के लिए डार्क ओजी मोजा के दो लाख पीस, एयरफोर्स के लिए काले रंग के सवा दो लाख पीस सहित अन्य आर्डर मिलाकर कुल 9 लाख 22600 मोजे का आर्डर था। इस सिलसिले में जिन फर्मों से कपड़े की सप्लाई होनी थी, उन्होंने लगभग 80 फीसदी कपड़ा सप्लाई कर भी दिया मगर इस कपड़े से सिर्फ 89285 मोजे बनाकर डिसपैच किए जा सके हैं। बाकी का लाखों रुपये का कपड़ा मशीनों द्वारा सटीक उत्पादन न किए जाने के चलते बर्बाद हो गया।
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मशीनों के मेंटिनेंस के मामले में खराब परफॉर्मेंस के चलते केपलॉन से चार लाख रुपये की रिकवरी की गई है। बर्बादी उतनी नहीं हुई है, जितनी आप बता रहे हैं। अभी इसका आकलन किया जा रहा है।
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आलोक दुबे, प्रभारी (मोजा सेक्शन)