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‘जब तक सूरज-चांद रहे, तब तक मेरा सुहाग रहे’
Kanpur
Updated Sun, 09 Jun 2013 05:30 AM IST
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कानपुर। पति की सलामती और दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाओं ने शनिवार को वट सावित्री व्रत (बरगदाई) किया। व्रत के दौरान सुहागिनों ने बरगद के सामने पूजा-अर्चना की। कई महिलाओं ने घरों और पार्कों में पूजन-अर्चन किया।
वनखंडेश्वर, रामबाग पार्क, स्वरूप नगर घंटाघर में, शास्त्री नगर, परमपुरवा, किदवई नगर, बर्रा, नानाराव पार्क, तपेश्वरी मंदिर बिरहाना रोड, गुमटी, दर्शन पुरवा समेत शहर के कई इलाकों में सुबह से ही महिलाएं बरगदाई का पूजन करते दिखी। सुबह से ही शृंगार कर घर निकली महिलाएं आटा, रवा, घी, मीठे बरगद, पुएं, आटे की पूड़ी, रोली, पीला सिंदूर, चावल और पिसी हल्दी मिला कर तैयार अयपन, चावल, सुपाड़ी, पान, लौंग, घी दीपक, लाल पीले फूल, समूचे फल, सात या भीगे 108 चने, कच्चे सूत की सात बार गूंथी माला, कच्चे सूत की अडिया, लाल चूड़ियां और बिंदी लेकर बरगद की पूजा करने पहुंचने लगीं। महिलाओं ने सबसे पहले अयपन से रंगोली बनाकर फूल, फल, पूड़ी और मीठे बरगद, पुए आदि चढ़ाएं। सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि चढ़ा कर घी के दिए जलाएं। पांच-सात पूड़ी और मीठे बरगद लेकर कोछ (साड़ी के पल्लू में) में रख लें। इसके बाद कच्चे सूत की अड़िया लेकर सात बार गोल माला की तरह लपेट कर गूंथा। इस माला में हल्दी लगाकर गले में पहन ली। इसके बाद कच्चे धागे के साथ बरगद की 108 बार परिक्रमा कर अखंड सुहाग की प्रार्थना की। जो महिलाएं बरगद पूजने नहीं जा सकी तो उन्होंने घर में ही बरगद की टहनी लेकर पूजन-अर्चन किया। उधर, बर्रा की मेघा मिश्रा पहली बरगदाई पर काफी उत्साहित नजर आई। वहीं, मेरठ की पारो मित्रा भी बरगदाई के रीति-रिवाजों को लेकर काफी उत्सुक नजर आई। ज्योति और आभा सिंह भी पूजन के बाद काफी खुश नजर आईं।
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वनखंडेश्वर, रामबाग पार्क, स्वरूप नगर घंटाघर में, शास्त्री नगर, परमपुरवा, किदवई नगर, बर्रा, नानाराव पार्क, तपेश्वरी मंदिर बिरहाना रोड, गुमटी, दर्शन पुरवा समेत शहर के कई इलाकों में सुबह से ही महिलाएं बरगदाई का पूजन करते दिखी। सुबह से ही शृंगार कर घर निकली महिलाएं आटा, रवा, घी, मीठे बरगद, पुएं, आटे की पूड़ी, रोली, पीला सिंदूर, चावल और पिसी हल्दी मिला कर तैयार अयपन, चावल, सुपाड़ी, पान, लौंग, घी दीपक, लाल पीले फूल, समूचे फल, सात या भीगे 108 चने, कच्चे सूत की सात बार गूंथी माला, कच्चे सूत की अडिया, लाल चूड़ियां और बिंदी लेकर बरगद की पूजा करने पहुंचने लगीं। महिलाओं ने सबसे पहले अयपन से रंगोली बनाकर फूल, फल, पूड़ी और मीठे बरगद, पुए आदि चढ़ाएं। सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि चढ़ा कर घी के दिए जलाएं। पांच-सात पूड़ी और मीठे बरगद लेकर कोछ (साड़ी के पल्लू में) में रख लें। इसके बाद कच्चे सूत की अड़िया लेकर सात बार गोल माला की तरह लपेट कर गूंथा। इस माला में हल्दी लगाकर गले में पहन ली। इसके बाद कच्चे धागे के साथ बरगद की 108 बार परिक्रमा कर अखंड सुहाग की प्रार्थना की। जो महिलाएं बरगद पूजने नहीं जा सकी तो उन्होंने घर में ही बरगद की टहनी लेकर पूजन-अर्चन किया। उधर, बर्रा की मेघा मिश्रा पहली बरगदाई पर काफी उत्साहित नजर आई। वहीं, मेरठ की पारो मित्रा भी बरगदाई के रीति-रिवाजों को लेकर काफी उत्सुक नजर आई। ज्योति और आभा सिंह भी पूजन के बाद काफी खुश नजर आईं।
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