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कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बाद ही ‘गृह प्रवेश’
Kanpur
Updated Fri, 25 Jan 2013 05:31 AM IST
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कानपुर। बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए केडीए ने अपार्टमेंट में ‘गृह प्रवेश’ कराने से पहले बिल्डरों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने का आदेश दिया है। इस आदेश ने शहर के सभी छोटे-बड़े बिल्डरों के पसीने छुड़ा दिए हैं। वजह यह है कि शहर में शायद ही कोई ऐसी बिल्डिंग हो जो नक्शे के मुताबिक बनी हो।
‘अमर उजाला’ ने अभियान चलाकर बिल्डरों की मनमानी उजागर की थी। जांच-पड़ताल में पता चला था कि केडीए से नक्शा पास कराने के बाद बिल्डर मनमाना निर्माण कार्य कराते हैं। नक्शे में जहां गेट, पार्क या ओपन एरिया अंकित हैं, वास्तव में वहां कुछ और निर्माण मिलता है। केडीए के जानकार बताते हैं बिल्डरों की इसी मनमानी के चलते वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 में एक धारा 15 ए जोड़ी गई थी। इस धारा के तहत 300 वर्ग मीटर से ऊपर रिहायशी निर्माण कराने वालों के लिए प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। केडीए सचिव राकेश कुमार ने बताया कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए फार्म भरना होता है जिसमें कितना नक्शा पास है, कितने हिस्से में निर्माण कार्य कराया गया है, कितना अवैध है और कितना कंपाउंडेबल (जुर्माना योग्य) है, आदि कालम भरने पड़ते हैं। आवेदन मिलने के बाद जेई-एई मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे, जो हिस्सा अवैध होगा उस पर कंपाउंडिंग या डिमॉलिशन की कार्रवाई करने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। सचिव ने कहा सर्टिफिकेट लेने से पहले कोई बिल्डर अपनी इमारतों का प्रयोग करता है तो बिल्डिंग सील करने के साथ ही बिल्डर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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‘अमर उजाला’ ने अभियान चलाकर बिल्डरों की मनमानी उजागर की थी। जांच-पड़ताल में पता चला था कि केडीए से नक्शा पास कराने के बाद बिल्डर मनमाना निर्माण कार्य कराते हैं। नक्शे में जहां गेट, पार्क या ओपन एरिया अंकित हैं, वास्तव में वहां कुछ और निर्माण मिलता है। केडीए के जानकार बताते हैं बिल्डरों की इसी मनमानी के चलते वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 में एक धारा 15 ए जोड़ी गई थी। इस धारा के तहत 300 वर्ग मीटर से ऊपर रिहायशी निर्माण कराने वालों के लिए प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। केडीए सचिव राकेश कुमार ने बताया कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए फार्म भरना होता है जिसमें कितना नक्शा पास है, कितने हिस्से में निर्माण कार्य कराया गया है, कितना अवैध है और कितना कंपाउंडेबल (जुर्माना योग्य) है, आदि कालम भरने पड़ते हैं। आवेदन मिलने के बाद जेई-एई मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे, जो हिस्सा अवैध होगा उस पर कंपाउंडिंग या डिमॉलिशन की कार्रवाई करने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। सचिव ने कहा सर्टिफिकेट लेने से पहले कोई बिल्डर अपनी इमारतों का प्रयोग करता है तो बिल्डिंग सील करने के साथ ही बिल्डर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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