‘बंदी करेंगे जबरदस्त, होगी सरकार पस्त’

Kanpur Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
कानपुर। बिजली महंगी करने के विरोध में गुरुवार 22 नवंबर को प्रस्तावित ‘प्रदेश औद्योगिक बंदी’ की तैयारियां पूरी हो गई हैं। बंदी को छोटी, मध्यम और बड़ी, सभी इकाइयों ने समर्थन दिया है। उद्यमियों ने कहा कि शत-प्रतिशत बंदी रखकर सरकार को चेताएंगे। उद्यमियों की कई टीमें औद्योगिक क्षेत्रों में घूम-घूमकर बंदी सुनिश्चित करेंगी। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के नेतृत्व में कानपुर सहित 11 शहरों में बंदी होगी और अन्य शहरों में विभिन्न इकाइया बंद कराएंगी। बंदी से 250 करोड़ का उत्पादन रुकने से करीब 50 करोड़ का राजस्व का नुकसान होगा। वहीं आवश्यक वस्तुओं के निर्माण से संबंधित इकाइयों को बंदी से मुक्त रखा गया है।
उद्यमियों का कहना है कि बिजली की दरें बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ेगी जिससे प्रोडक्ट का दाम बढ़ाना जरूरी होगा। ऐसी स्थिति में दूसरे राज्यों के सस्ते प्रोडक्ट यहां बिकने लगेंगे और उनका धंधा चौपट हो जाएगा। नई दरों और तमाम शुल्क मिलाकर लगभग आठ रुपए प्रति यूनिट बिल आना शुरू भी हो गया है। इसी के विरोध में दर्जन भर से ज्यादा औद्योगिक एसोसिएशन एकजुट होकर गुरुवार को बंदी करने जा रही हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के नेतृत्व में कानपुर के अलावा गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, सहारनपुर, मेरठ, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर, इलाहाबाद, बनारस आदि में बंदी की जाएगी। कानपुर में जहां पूरे दिन की बंदी होगी, वहीं अन्य शहरों में सुबह आठ से रात आठ तक औद्योगिक इकाइयां बंद रहेंगी। आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि शत प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों को बंद रखने का आह्वान किया गया है। केवल जरूरी वस्तुओं जैसे दूध, ब्रेड, ऑक्सीजन आदि से संबंधित इकाइयां खुली रहेंगी। आईआईए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तरुण खेत्रपाल ने बताया कि दादानगर, पनकी, फजलगंज, कालपी रोड, चौबेपुर, जाजमऊ के अलावा कानपुर देहात में रनिया, जैनपुर आदि में स्थित इकाइयां बंद रहेंगी। उद्यमियों के विभिन्न दल औद्योगिक इलाकों में लगातार दौरा करेंगे। उधर, आईआईए भवन में हुईबैठक में बड़ी संख्या में मौजूद उद्यमियों से बढ़ी दरों से आने वाले बिल न जमा करने की अपील की गई। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरुक करने और बंदी में शामिल करने के लिए उन्हें फोन कॉल्स, एसएमएस भी किए गए हैं।


बिजली की दरें पहले और अब

(लोवर लोड)
पूर्व अब
डिमांड चार्जेज (प्रति केवीए) 115 रुपए 225 रुपए
एनर्जी चार्ज (प्रति यूनिट) 4.95 रुपए 5.86 रुपए
इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (प्रति यूनिट) 9 पैसे 7.5 प्रतिशत
बढ़ोतरी 40-45 प्रतिशत

(हैवी लोड)
पूर्व अब
डिमांड चार्जेज (प्रति केवीए) 230 रुपए 250 रुपए
एनर्जी चार्ज (प्रति यूनिट) 4.60 रुपए 5.90 रुपए
इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (प्रति यूनिट) 9 पैसे 7.5 प्रतिशत
बढ़ोतरी 35-40 प्रतिशत
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उद्यमियों से बातचीत
(फोटो आज के फोल्डर में बिजली नाम से)

इस वृद्धि से उत्तर प्रदेश के उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा। पूरे उत्तर भारत में एक राज्य को छोड़ इतनी महंगी बिजली कहीं नहीं है। यहां लाइनलॉस भी केवल छह फीसदी है। बावजूद इसके उद्योगों को तबाह करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मैं अपने क्षेत्र की बात करूं तो बढ़ी दरों के हिसाब से डेढ़ रुपए प्रति किलो उत्पादन महंगा हो जाएगा।
ब्रजेश अवस्थी

बिजली को खरीद मूल्य से दो-तीन गुना तक बेचा जा रहा है। इतना फायदा तो किसी उद्योग-धंधे में नहीं है। सरकार को चाहिए कि अपना लाइन लॉस रोके और बकाया वसूली करे। एक ओर इंडस्ट्रियल पॉलिसी बनाई जा रही है और दूसरी ओर ऐसी स्थितियां उत्पन्न की जा रही हैं जिससे उद्योग तबाह हो जाएं। पॉलिस्टर की बात करें तो नई दरों के हिसाब से लगभग 8-10 फीसदी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
अनिल पांडेय

यह निर्णय समझ से बाहर है। 18 तारीख को मूल्य तय होते हैं और एक तारीख से बढ़ी दरों पर बिल वसूलना शुरू हो जाता है। उद्यमी जो माल बेच चुके हैं उस पर अब उन्हें नुकसान झेलना होगा। वहीं जिन उद्योगों में बिजली कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होती है, उनकी तो हालत खराब हो जाएगी। बंदी करना हमारी मजबूरी है। कच्चे लोहे से तार बनाने में सीधे दस फीसदी का खर्च बढ़ेगा।
पुष्पेंद्र अग्रवाल

यह एकतरफा निर्णय है। इसे लेने से पहले सरकार को उद्यमियों के साथ चर्चा और जागरुकता के साथ लाना चाहिए। अलग लाइनलॉस में भारी नुकसान हो रहा है तो सरकार को उसे नियंत्रित करना चाहिए, बजाए इसके उसकी रिकवरी अन्य किसी से करने का क्या मतलब। चर्म उद्योग इस बढ़ोत्तरी के बुरे असर झेलेगा। ताजा मूल्यवृद्धि से चमड़े की उत्पादन लागत 5-7 रुपए प्रति फुट बढ़ जाएगी।
आरके जालान


हम दे रहे हैं सस्ती बिजली: मंत्री
कानपुर। आकंड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर भारत में सबसे महंगी बिजली यूपी में मिल रही है। मगर प्रोटोकाल मिनिस्टर अभिषेक मिश्रा इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। विभिन्न औद्योगिक और कारोबारी एसोसिएशन के साथ मर्चेंट चेंबर हॉल में बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि वे अन्य प्रदेशों के मुकाबले सस्ती बिजली दे रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें बिजली दरों को कम करने की मांग की गई है। बैठक में सुनील वैश्य, तरुण खेत्रपाल, अतुल सेठ, मनमोहन राजपाल, ब्रजेश अवस्थी, मनोज बंका, ज्ञानेश मिश्रा आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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