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3800 लोग खुद का मकान खाली कराने को परेशान

Kanpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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आशुतोष मिश्र
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कानपुर। अपने प्रयोग के लिए अपना ही मकान पाने के लिए शहर के 3800 लोग कई साल से मुकदमा लड़ रहे हैं। एक मामले में तो बाबा ने दुकानें खाली कराने के लिए दाखिल किया मुकदमा नाती लड़ रहा है। यह हाल जब है तब इस तरह के मुकदमे 60 दिन में निस्तारित होने चाहिए। तारीख पर तारीख और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण ही लोग टूटने लगते है। इसी का नतीजा रहा कि बुधवार को मां और बेटी को आत्म दाह के प्रयास के लिए मजबूर होना पड़ा।
सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में श्रवण कुमार बनाम जवाहर लाल का मुकदमा 1965 से चल रहा है। न्यू बसंत टाकीज बिल्डिंग की 6 दुकानें खाली कराने के लिए यह मुकदमा दायर किया गया था। श्रवण कुमार की मौत होने के बाद अब नाती आशीष जैन यह मुकदमा लड़ रहे हैं। अब यह मुकदमा बहस की स्थिति में है। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई रोज हो रही है। यह तो बानगीभर है। जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल पीयूष शुक्ला के मुताबिक सिविल कोर्ट में मकान मालिक और किराएदारों के बीच 3800 मुकदमे चल रहे हैं। अपना ही मकान खाली कराने के लिए लोगों को लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदीवर वाजपेयी का कहना है कि उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम 13 सन 1972 की धारा 21 अ के तहत खुद के प्रयोग के लिए मकान या दुकान खाली कराने के लिए मकान मालिक मुकदमा दायर करता है। धारा 21 ब के तहत अगर मकान या दुकान गिराऊ है तो खाली कराकर बनवाने केलिए मुकदमा दायर किया जाता है। धारा 20 के तहत समय से किराया न देने, अपने स्थान पर दूसरे को काबिज करने और मकान मालिक की बिना रजामंदी के तोड़फोड़ कराने पर मुकदमा दायर किया जाता है। इन मुकदमों का निस्तारण 60 दिन के अंदर होना चाहिए। पर कई तरह की दिक्कतों से समय से यह मुकदमें निस्तारित नहीं हो पाते हैं। मकान मालिकों को अनावश्यक मानसिक परेशानी के साथ अन्य तरह की परेशानी झेलनी पड़ती हैं।

इनसेट-
निस्तारण में इसलिए देरी
-जिस पक्ष को लाभ हो रहा होता है वह निस्तारण नहीं चाहता
-न्यायिक अफसरों का जल्द ट्रांसफर, नए अफसर को फिर समझना होता
-सिविल के मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट्र ट्रैक कोर्ट नहीं
-वकीलों द्वारा सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण की पहल नहीं
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उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम 13 सन 1972 के तहत इस तरह के मुकदमे के निस्तारण के लिए 60 दिन का समय तो तय है पर यह व्यावहारिक नहीं है। न्यायालयों में मुकदमों का बोझ और अन्य कारणों से मुकदमे लंबे खिंचते हैं।
-पीयूष शुक्ला, जिला शासकीय अधिवक्ता
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थाने नहीं खाली कर रही पुलिस
105/668 डिप्टी का पड़ाव निवासी दिलीप साहू मकान नंबर 85 धरी का पुरवा नौबस्ता में 13 विस्वा जमीन (इस समय कीमत करीब एक करोड़ रुपए) पर पुलिस ने कब्जा कर चौकी बना ली थी। अब यहां पर नौबस्ता थाना है। 1987 में
पिता रामपाल ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। कोर्ट ने दिलीप साहू के पक्ष में फैसला देते हुए थाना खाली करने को कहा पर अमल नहीं हो सका। इसी तरह किदवई नगर थाने खाली करने के कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं हो रहा है। यह जमीन राम औतार की थी। उनसे राधेश्याम अग्रवाल ने खरीद ली थी। जज खफीफा की कोर्ट ने 2008 में थाना खाली करने का आदेश दिया था।

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