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92 साल के पति ने तोड़ा दम तो पांच मिनट बाद ही पत्नी भी चल बसी, एक साथ दो अर्थियां देख रो पड़े लोग
Tue, 22 Oct 2019 11:59 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 22 Oct 2019 11:59 PM IST
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घटना के बाद गमगीन बैठे परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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कन्नौज में तालग्राम क्षेत्र के गांव महानगर में मंगलवार को एक दुखद मामला सामने आया। पति की मौत की सूचना मिलते ही पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी होते ही गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। आंखों से आंसू बहने लगे।
हर किसी की जुबान पर वृद्ध दंपति के बीच रहे अथाह प्रेम का किस्सा था। बेटे ने बताया कि जब से पिता बीमार हुए, मां उनके पास ही बैठी रहती थीं। 92 वर्ष की अवस्था में भी उनकी एक आवाज पर उठकर उनके पास पहुंच जाती थीं। गांव में यह दंपति जय गुरुदेव ककुआ व काकी के नाम से विख्यात थे।
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हर किसी की जुबान पर वृद्ध दंपति के बीच रहे अथाह प्रेम का किस्सा था। बेटे ने बताया कि जब से पिता बीमार हुए, मां उनके पास ही बैठी रहती थीं। 92 वर्ष की अवस्था में भी उनकी एक आवाज पर उठकर उनके पास पहुंच जाती थीं। गांव में यह दंपति जय गुरुदेव ककुआ व काकी के नाम से विख्यात थे।
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परिजन
- फोटो : अमर उजाला
शाम को दोनों की एक साथ अर्थियां उठीं। महानगर गांव निवासी चोखेलाल वर्मा (95) पुत्र खुशालीलाल करवाचौथ के दिन से अस्वस्थ थे। मंगलवार शाम पांच बजे के करीब निधन हो गया। पांच मिनट के बाद इनकी पत्नी नंदरानी (92) को जैसे ही पति की मौत की जानकारी हुई, उन्होंने भी गम में प्राण त्याग दिए।
बडे़ पुत्र राम बहादुर ने बताया कि पिता कई दिनों से अस्वस्थ होने के कारण दो दिन से खाना छोड़े थे। इलाज भी कराया, लाभ नहीं हुआ। ठीक न होने के कारण मां ने गम में खाना छोड़ दिया। मंगलवार शाम को पिता की मौत के बाद मां की मौत हो गई।
परिवार में पांच बीघा के करीब खेती है। इससे परिवार चलता है। मजदूरी पर बटाई भी कर लेते हैं। तीन भाइयों में वह सबसे बड़ा है। मलिखान व हीरालाल दो और भाई हैं। दो बहने हैं। इनका विवाह हो चुका है। वहीं गांव के पृथ्वीराज बताते हैं कि चोखेलाल को गांव में लोग जयगुरुदेव ककुआ के नाम से पुकारते थे। बुजुर्ग होने के कारण नंदरानी को काकी कहते थे। परिवार को सांत्वना देने वालों की भीड़ लगी रही।
बडे़ पुत्र राम बहादुर ने बताया कि पिता कई दिनों से अस्वस्थ होने के कारण दो दिन से खाना छोड़े थे। इलाज भी कराया, लाभ नहीं हुआ। ठीक न होने के कारण मां ने गम में खाना छोड़ दिया। मंगलवार शाम को पिता की मौत के बाद मां की मौत हो गई।
परिवार में पांच बीघा के करीब खेती है। इससे परिवार चलता है। मजदूरी पर बटाई भी कर लेते हैं। तीन भाइयों में वह सबसे बड़ा है। मलिखान व हीरालाल दो और भाई हैं। दो बहने हैं। इनका विवाह हो चुका है। वहीं गांव के पृथ्वीराज बताते हैं कि चोखेलाल को गांव में लोग जयगुरुदेव ककुआ के नाम से पुकारते थे। बुजुर्ग होने के कारण नंदरानी को काकी कहते थे। परिवार को सांत्वना देने वालों की भीड़ लगी रही।