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आसान नहीं है गंगा की स्वच्छता बनाए रखना
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उन्नाव। गंगा के पानी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए कुंभ के दौरान प्रदूषण फैलाने वाली टेनरियों के तीन महीने बंद रहने से गंगाजल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। पर यह बरकरार रहेगा, इस पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर करें तो गंगा में पहले बीओडी (बायो डिजाल्व ऑक्सीजन) की मात्रा 5 मिलीग्राम प्रति लीटर थी, वहीं टेनरियों के बंद रहने के दौरान यह 9.8 मिलीग्राम प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि टेनरियों के चालू होने के बाद बीओडी की इस मात्रा को बरकरार रखना बड़ी चुनौती होगी। वजह साफ है कि टेनरियों के चालू होने से दोबारा बीओडी का स्तर गिरने का खतरा बढ़ेगा।
शासन ने कुंभ स्नान के दौरान गंगा के पानी को स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को 15 दिसंबर से 15 मार्च तक बंद करने के आदेश दिए थे। शासन के आदेश पर जिले में लोनी ड्रेन से जुड़ी 52 इकाइयों को बंद कर दिया गया था। ये टेनरियां बंथर, अकरमपुर व मगरवारा में है। इसके अलावा दही चौकी की 21 व कुछ अन्य इक्का-दुक्का टेनरियों को चेतावनी दी गई थी। साथ ही गंगा में गिरने वाले नालों की टेपिंग भी कर दी गई थी। नालों की टेपिंग करने के बाद शासन स्तर से लगातार गंगा के पानी की जांच की जा रही थी। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 1 जनवरी से 10 मार्च तक कराई गई जांच रिपोर्ट के अनुसार गंगा के पानी की गुणवत्ता अब पहले से बेहतर हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार 21 से 24 जनवरी के बीच गंगा में बीओडी की मात्रा 9.2 से 9.8 मिलीग्राम प्रति लीटर तक रही। इसके अलावा पानी का रंग भी 15 हैजन हो गया है। गंगा का पानी अब स्नान के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है, जबकि 15 दिसंबर से पहले गंगा में बीओडी की मात्रा का स्तर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर रहा था। पानी का रंग 20 हैजन के आसपास था।
स्वच्छ रखना इसलिए चुनौती
बंथर, अकरमपुर, मगरवारा व दही चौकी को मिलाकर जिले में छोटी-बड़ी तकरीबन एक सैकड़ा टेनरियां हैं। जानकारी करने पर पता चला कि इनमें से कुछ ने तो अपना ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है, ज्यादातर कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का इस्तेमाल करते हैं। सूत्र बताते हैं कि इतना सब होने के बाद भी गंगा को स्वच्छ रखना चुनौती इसलिए हो सकती है कि कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट में प्रदूषित जल बहाने का कम खर्च देना पड़े, इसके लिए टेनरी मालिक खेल करते हैं। इसके तहत ज्यादातर प्रदूषित जल वे लोनी नाला व सिटी ड्रेन के जरिए बहाते हैं। इसके अलावा सीवर का पानी भी गंगा में गिरता है। जानकारी करने पर पता चला कि बंदी का आदेश खत्म होने के बाद निजी ट्रीटमेंट प्लांट वाली टेनरियां चालू हो गई हैं, इनका पानी गंगा में जा रहा है।
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दोबारा बीओडी का स्तर गिरने का खतरा
गंगाजल में बीओडी हानिकारक तत्व बढ़ने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। हानिकारक केमिकल व गंदगी से गंगाजल में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। कुंभ स्नान के दौरान गंगा में गिरने वाले नालों की टेपिंग कर दी गई थी, जिससे गंगा में बीओडी का स्तर बढ़ गया था। हालांकि अब नाले खुलते ही दोबारा बीओडी का स्तर गिरने का खतरा बढ़ गया है।
पानी के रंग का मानक
सबसे अच्छा-10 हैजन
औसत सामान्य 20 हैजन
चेतावनी बिंदु 30 हैजन
कुंभ स्नान के लिए 15 दिसंबर 2018 से 15 मार्च 2019 तक टेनरियों को बंद करने का आदेश था। खोलने के संबंध में उन्हें अभी आदेश नहीं मिला है। शासन स्तर से गठित कमेटी निरीक्षण करेगी। इसके बाद सील नाले खोले जाएंगे। प्रदूषण न फैले इस पर भी नजर रखी जाएगी। अगर कोई टेनरी बिना अनुमति चालू मिली तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-विमल कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी
शासन ने कुंभ स्नान के दौरान गंगा के पानी को स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को 15 दिसंबर से 15 मार्च तक बंद करने के आदेश दिए थे। शासन के आदेश पर जिले में लोनी ड्रेन से जुड़ी 52 इकाइयों को बंद कर दिया गया था। ये टेनरियां बंथर, अकरमपुर व मगरवारा में है। इसके अलावा दही चौकी की 21 व कुछ अन्य इक्का-दुक्का टेनरियों को चेतावनी दी गई थी। साथ ही गंगा में गिरने वाले नालों की टेपिंग भी कर दी गई थी। नालों की टेपिंग करने के बाद शासन स्तर से लगातार गंगा के पानी की जांच की जा रही थी। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 1 जनवरी से 10 मार्च तक कराई गई जांच रिपोर्ट के अनुसार गंगा के पानी की गुणवत्ता अब पहले से बेहतर हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार 21 से 24 जनवरी के बीच गंगा में बीओडी की मात्रा 9.2 से 9.8 मिलीग्राम प्रति लीटर तक रही। इसके अलावा पानी का रंग भी 15 हैजन हो गया है। गंगा का पानी अब स्नान के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है, जबकि 15 दिसंबर से पहले गंगा में बीओडी की मात्रा का स्तर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर रहा था। पानी का रंग 20 हैजन के आसपास था।
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स्वच्छ रखना इसलिए चुनौती
बंथर, अकरमपुर, मगरवारा व दही चौकी को मिलाकर जिले में छोटी-बड़ी तकरीबन एक सैकड़ा टेनरियां हैं। जानकारी करने पर पता चला कि इनमें से कुछ ने तो अपना ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है, ज्यादातर कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का इस्तेमाल करते हैं। सूत्र बताते हैं कि इतना सब होने के बाद भी गंगा को स्वच्छ रखना चुनौती इसलिए हो सकती है कि कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट में प्रदूषित जल बहाने का कम खर्च देना पड़े, इसके लिए टेनरी मालिक खेल करते हैं। इसके तहत ज्यादातर प्रदूषित जल वे लोनी नाला व सिटी ड्रेन के जरिए बहाते हैं। इसके अलावा सीवर का पानी भी गंगा में गिरता है। जानकारी करने पर पता चला कि बंदी का आदेश खत्म होने के बाद निजी ट्रीटमेंट प्लांट वाली टेनरियां चालू हो गई हैं, इनका पानी गंगा में जा रहा है।
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दोबारा बीओडी का स्तर गिरने का खतरा
गंगाजल में बीओडी हानिकारक तत्व बढ़ने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। हानिकारक केमिकल व गंदगी से गंगाजल में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। कुंभ स्नान के दौरान गंगा में गिरने वाले नालों की टेपिंग कर दी गई थी, जिससे गंगा में बीओडी का स्तर बढ़ गया था। हालांकि अब नाले खुलते ही दोबारा बीओडी का स्तर गिरने का खतरा बढ़ गया है।
पानी के रंग का मानक
सबसे अच्छा-10 हैजन
औसत सामान्य 20 हैजन
चेतावनी बिंदु 30 हैजन
कुंभ स्नान के लिए 15 दिसंबर 2018 से 15 मार्च 2019 तक टेनरियों को बंद करने का आदेश था। खोलने के संबंध में उन्हें अभी आदेश नहीं मिला है। शासन स्तर से गठित कमेटी निरीक्षण करेगी। इसके बाद सील नाले खोले जाएंगे। प्रदूषण न फैले इस पर भी नजर रखी जाएगी। अगर कोई टेनरी बिना अनुमति चालू मिली तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-विमल कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी