{"_id":"598a06e34f1c1b031b8b45bd","slug":"91502217955-kanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा में गिरता नाला देख चकित रह गई एनजीटी टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा में गिरता नाला देख चकित रह गई एनजीटी टीम
Updated Wed, 09 Aug 2017 12:19 AM IST
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कानपुर। जाजमऊ में 13 करोड़ लीटर की क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोजाना 40 करोड़ लीटर सीवरेज कचरा आता है। जिसमें से 27 करोड़ लीटर हानिकारक कचरा युक्त पानी सीधे गंगा में जा रहा है। चौंकाने वाले इस दृश्य को मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की टीम के सदस्यों ने देखा।
टीम में शामिल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता और गंगा मंत्रालय के विशेषज्ञ प्रो काजमी ने यह देखकर दांतों तले उंगली दबा ली। उन्हें ताज्जुब हुआ कि नालों का कचरा इतनी अधिक मात्रा में गंगा में कैसे जाने दिया जा रहा है।
13 जुलाई 2017 को एनजीटी के आदेश के बाद एक बार फिर से सीपीसीबी, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सहित शासन और प्रशासन की टीमें गंगा में प्रदूषण की जांच में जुट गई हैं। पिछले कुछ दिनों की जांच और सर्वे में यह बात निकलकर आई है कि सीवरेज नालों से निकलने वाले कचरे से गंगा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
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मंगलवार को जब एनजीटी की टीम ने यह सब अपनी आंखों से देखा तो फिर से यह बात साबित हो गई। इससे पहले एनएमसीजी की टीम ने यहां आकर नालों की स्थित देखकर कहा था कि टेनरियों से ज्यादा कचरा तो सीवरेज नालों से गंगा में गिर रहा है। बाद में यही बात एनजीटी ने भी अपने आदेश में दिया। जिसके आधार पर टीम जांच करने आई है।
फेल हुए सीईटीपी को अपग्रेड करने के निर्देश
एनजीटी के मुताबिक गंगा में बहाया जा रहा सीईटीपी का पानी प्रदूषित
उन्नाव। प्रदूषण फैला रही जिले की औद्योगिक इकाइयों पर एनजीटी ने नजरें टिका रखी हैं। हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सीईटीपी को आउट डेटेड घोषित किए जाने के बाद मंगलवार को टेनरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता ने बंथर और दहीचौकी सीईटीपी का निरीक्षण किया।
उनके साथ सीपीसीबी और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा व मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट के अधिकारी भी शामिल रहे। बंथर औद्योगिक क्षेत्र में करीब दो घंटे तक टीम मौजूद रही। टीम ने एनजीटी के मानकों पर अनफिट हुई सीईटीपी को छह महीने में अपग्रेड करने के निर्देश दिए।
मंगलवार शाम को टेनरी प्रदूषण नियंत्र बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता के साथ सीपीसीबी और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा व मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट के अधिकारियों ने बंथर और दही चौकी में लगे सीईटीपी प्लांट का निरीक्षण किया। टीम ने टेनरियों से सीईटीपी तक पहुंच रहे पानी को देखने के साथ ही ट्रीटमेंट की प्रक्रिया और ट्रीटमेंट के बाद निकल रहे पानी का बारीकी से निरीक्षण किया।
सीईटीपी के डा. सुभाष अवस्थी ने टीम को बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 4500 किलो लीटर प्रतिदिन है। प्लांट में 25 फैक्ट्रियों का पानी ट्रीट किया जा रहा है। टीम ने प्लांट में लगे उपकरणों की जानकारी ली और एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए इसे अपग्रेड करने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए।
- जाजमऊ स्थित एसटीपी पहुंची टीम, फिर गई उन्नाव
- एसटीपी की क्षमता 13 करोड़ की, 40 करोड़ लीटर आ रहा गंदा पानी
- बाकी 27 करोड़ सीधे गंगा में जा रहा कचरा युक्त पानी
अमर उजाला ब्यूरो
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टीम में शामिल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता और गंगा मंत्रालय के विशेषज्ञ प्रो काजमी ने यह देखकर दांतों तले उंगली दबा ली। उन्हें ताज्जुब हुआ कि नालों का कचरा इतनी अधिक मात्रा में गंगा में कैसे जाने दिया जा रहा है।
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13 जुलाई 2017 को एनजीटी के आदेश के बाद एक बार फिर से सीपीसीबी, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सहित शासन और प्रशासन की टीमें गंगा में प्रदूषण की जांच में जुट गई हैं। पिछले कुछ दिनों की जांच और सर्वे में यह बात निकलकर आई है कि सीवरेज नालों से निकलने वाले कचरे से गंगा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
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मंगलवार को जब एनजीटी की टीम ने यह सब अपनी आंखों से देखा तो फिर से यह बात साबित हो गई। इससे पहले एनएमसीजी की टीम ने यहां आकर नालों की स्थित देखकर कहा था कि टेनरियों से ज्यादा कचरा तो सीवरेज नालों से गंगा में गिर रहा है। बाद में यही बात एनजीटी ने भी अपने आदेश में दिया। जिसके आधार पर टीम जांच करने आई है।
फेल हुए सीईटीपी को अपग्रेड करने के निर्देश
एनजीटी के मुताबिक गंगा में बहाया जा रहा सीईटीपी का पानी प्रदूषित
उन्नाव। प्रदूषण फैला रही जिले की औद्योगिक इकाइयों पर एनजीटी ने नजरें टिका रखी हैं। हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सीईटीपी को आउट डेटेड घोषित किए जाने के बाद मंगलवार को टेनरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता ने बंथर और दहीचौकी सीईटीपी का निरीक्षण किया।
उनके साथ सीपीसीबी और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा व मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट के अधिकारी भी शामिल रहे। बंथर औद्योगिक क्षेत्र में करीब दो घंटे तक टीम मौजूद रही। टीम ने एनजीटी के मानकों पर अनफिट हुई सीईटीपी को छह महीने में अपग्रेड करने के निर्देश दिए।
मंगलवार शाम को टेनरी प्रदूषण नियंत्र बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता के साथ सीपीसीबी और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा व मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट के अधिकारियों ने बंथर और दही चौकी में लगे सीईटीपी प्लांट का निरीक्षण किया। टीम ने टेनरियों से सीईटीपी तक पहुंच रहे पानी को देखने के साथ ही ट्रीटमेंट की प्रक्रिया और ट्रीटमेंट के बाद निकल रहे पानी का बारीकी से निरीक्षण किया।
सीईटीपी के डा. सुभाष अवस्थी ने टीम को बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 4500 किलो लीटर प्रतिदिन है। प्लांट में 25 फैक्ट्रियों का पानी ट्रीट किया जा रहा है। टीम ने प्लांट में लगे उपकरणों की जानकारी ली और एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए इसे अपग्रेड करने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए।
- जाजमऊ स्थित एसटीपी पहुंची टीम, फिर गई उन्नाव
- एसटीपी की क्षमता 13 करोड़ की, 40 करोड़ लीटर आ रहा गंदा पानी
- बाकी 27 करोड़ सीधे गंगा में जा रहा कचरा युक्त पानी
अमर उजाला ब्यूरो