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गुजरात से जान बचाकर लौटा जसवंतनगर का मीनेश
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:53 PM IST
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जसवंतनगर (इटावा)। गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हो रही हिंसा से डरकर एक युवक कामकाज छोड़कर जसवंतनगर आ गया है।
जसवंतनगर के जनकपुर के रहने वाले मीनेश कुमार ने बताया कि वह चार दिन पूर्व ही अपने भाई व 22 लोगों के साथ गुजरात से जान बचाकर आया है। वह कलौल शहर में मीटर बॉक्स बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री के कैंपस में ही भाई मुन्नालाल व चचेरा भाई जीनेश भी रहता था। मामला 28 सितंबर से बिगड़ा जब अफवाह फैल गई कि 14 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया है। उसके बाद वहां के लोग उत्तर भारतीयों को 24 घंटे में जगह छोड़कर जाने का अल्टीमेटम देने लगे, जो नहीं गए उनकी पिटाई की गई। पुलिस भी मूकदर्शक बनकर देखती रही। उन्होंने बताया वहां भय व आतंक का माहौल है।
उसे भी चार अक्तूबर को अल्टीमेटम दिया गया था कि 24 घंटे में इलाके को छोड़ दें। वह रेलवे स्टेशन पहुंचा परंतु वहां भीड़ थी। ऐसे में भाई मुन्नालाल के साथ बस स्टैंड पर पहुंचा वहां से जयपुर होते हुए गांव लौटा है। उसने बताया कि उसे वेतन भी नहीं मिला है। अब जाने की इच्छा नहीं है। मीनेश ने बताया कि उनके मामा ईश्वर दयाल भी इसी कंपनी में सुपरवाइजर हैं। उनका कंपनी पर काफी रुपया बकाया है इसलिए वह अभी नहीं आए हैं। पास के ही गांव झलोखर के रमेश सिंह, जैकी, हरिश्चन्द्र, राजकुमार भी वहां से भाग आए हैं।
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जसवंतनगर के जनकपुर के रहने वाले मीनेश कुमार ने बताया कि वह चार दिन पूर्व ही अपने भाई व 22 लोगों के साथ गुजरात से जान बचाकर आया है। वह कलौल शहर में मीटर बॉक्स बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री के कैंपस में ही भाई मुन्नालाल व चचेरा भाई जीनेश भी रहता था। मामला 28 सितंबर से बिगड़ा जब अफवाह फैल गई कि 14 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया है। उसके बाद वहां के लोग उत्तर भारतीयों को 24 घंटे में जगह छोड़कर जाने का अल्टीमेटम देने लगे, जो नहीं गए उनकी पिटाई की गई। पुलिस भी मूकदर्शक बनकर देखती रही। उन्होंने बताया वहां भय व आतंक का माहौल है।
उसे भी चार अक्तूबर को अल्टीमेटम दिया गया था कि 24 घंटे में इलाके को छोड़ दें। वह रेलवे स्टेशन पहुंचा परंतु वहां भीड़ थी। ऐसे में भाई मुन्नालाल के साथ बस स्टैंड पर पहुंचा वहां से जयपुर होते हुए गांव लौटा है। उसने बताया कि उसे वेतन भी नहीं मिला है। अब जाने की इच्छा नहीं है। मीनेश ने बताया कि उनके मामा ईश्वर दयाल भी इसी कंपनी में सुपरवाइजर हैं। उनका कंपनी पर काफी रुपया बकाया है इसलिए वह अभी नहीं आए हैं। पास के ही गांव झलोखर के रमेश सिंह, जैकी, हरिश्चन्द्र, राजकुमार भी वहां से भाग आए हैं।
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