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संसद के दोनों सदनों में गूंजा बुंदेलखंड का मुद्दा
Updated Fri, 09 Feb 2018 11:37 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। लोकसभा और राज्यसभा में आम बजट पर हो रही चर्चा के दौरान बुंदेलखंड भी अछूता नहीं रहा। यहां के सत्ता और विपक्ष दोनों ही दलों के सांसदों ने अपने-अपने अंदाज में आम बजट में बुंदेलखंड के लिए भी झोली फैलाई।
किसान आत्महत्या, पलायन और अन्ना गायों का मुद्दा दोनों सदनों में गूंजा। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन और विशेष पैकेज की मांग की गई। बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद (लोकसभा) भैरो प्रसाद मिश्र और सपा के सांसद (राज्यसभा) विशंभर प्रसाद निषाद ने गुरुवार को दोनों सदनों में चर्चा में भाग लेकर बुंदेलखंड का मुद्दा उठाया।
बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण और विशेष पैकेज की पैरवी
बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने लोकसभा में बोलते हुए बजट की सराहना की। साथ ही कहा कि बुंदेलखंड में अन्ना गायों की गंभीर समस्या है। बजट में पशु पालन के लिए की गई 10 हजार करोड़ की व्यवस्था से बुंदेलखंड क्षेत्र में अन्ना प्रथा पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने मांग की कि इस बजट से अन्ना गायों के चारा-पानी की व्यवस्था की जाए। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन करके विशेष पैकेज दिया जाए।
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बजट में बुंदेलखंड की अन्ना गायें और किसान आत्महत्याएं नदारद
सपा के सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने राज्यसभा में बजट पर बोलते हुए कहा कि गाय और गोबर की बात करने वाली भाजपा सरकार ने बजट में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खास प्रावधान नहीं किया है।
बुंदेलखंड समेत प्रदेश में लाखों अन्ना गायें घूम रही हैं और किसानों की फसल बर्बाद कर रही हैं। कोई अपनी गायें बाजार या गांव लेकर जाता है तो कुछ कथित संगठन के लोग उन पर हमला और हत्या का प्रयास करते हैं। उन्होंने शायर अदम गोंडवी का शेर पढ़ा कि - ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये दावा फरेबी है और किताबी है’। बालू के दाम 10 गुना बढ़ गए हैं।
बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बड़ी तादाद में पलायन हुआ है। फसलें सूख गई हैं। बुंदेलखंड में भुखमरी और गरीबी के हालात हैं। इसके लिए आम बजट में कुछ नहीं किया गया है।
बांदा कृषि विद्यालय में अब तक मानक पूरे नहीं किए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा कंपनियों में केवल बीमा कंपनियों का लाभ मिल रहा है। बैंकों में बिना कमीशन काम नहीं हो रहा। नदी जोड़ो योजना के लिए बजट में कोई बजट नहीं है।
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बांदा। लोकसभा और राज्यसभा में आम बजट पर हो रही चर्चा के दौरान बुंदेलखंड भी अछूता नहीं रहा। यहां के सत्ता और विपक्ष दोनों ही दलों के सांसदों ने अपने-अपने अंदाज में आम बजट में बुंदेलखंड के लिए भी झोली फैलाई।
किसान आत्महत्या, पलायन और अन्ना गायों का मुद्दा दोनों सदनों में गूंजा। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन और विशेष पैकेज की मांग की गई। बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद (लोकसभा) भैरो प्रसाद मिश्र और सपा के सांसद (राज्यसभा) विशंभर प्रसाद निषाद ने गुरुवार को दोनों सदनों में चर्चा में भाग लेकर बुंदेलखंड का मुद्दा उठाया।
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बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण और विशेष पैकेज की पैरवी
बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने लोकसभा में बोलते हुए बजट की सराहना की। साथ ही कहा कि बुंदेलखंड में अन्ना गायों की गंभीर समस्या है। बजट में पशु पालन के लिए की गई 10 हजार करोड़ की व्यवस्था से बुंदेलखंड क्षेत्र में अन्ना प्रथा पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने मांग की कि इस बजट से अन्ना गायों के चारा-पानी की व्यवस्था की जाए। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन करके विशेष पैकेज दिया जाए।
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बजट में बुंदेलखंड की अन्ना गायें और किसान आत्महत्याएं नदारद
सपा के सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने राज्यसभा में बजट पर बोलते हुए कहा कि गाय और गोबर की बात करने वाली भाजपा सरकार ने बजट में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खास प्रावधान नहीं किया है।
बुंदेलखंड समेत प्रदेश में लाखों अन्ना गायें घूम रही हैं और किसानों की फसल बर्बाद कर रही हैं। कोई अपनी गायें बाजार या गांव लेकर जाता है तो कुछ कथित संगठन के लोग उन पर हमला और हत्या का प्रयास करते हैं। उन्होंने शायर अदम गोंडवी का शेर पढ़ा कि - ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये दावा फरेबी है और किताबी है’। बालू के दाम 10 गुना बढ़ गए हैं।
बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बड़ी तादाद में पलायन हुआ है। फसलें सूख गई हैं। बुंदेलखंड में भुखमरी और गरीबी के हालात हैं। इसके लिए आम बजट में कुछ नहीं किया गया है।
बांदा कृषि विद्यालय में अब तक मानक पूरे नहीं किए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा कंपनियों में केवल बीमा कंपनियों का लाभ मिल रहा है। बैंकों में बिना कमीशन काम नहीं हो रहा। नदी जोड़ो योजना के लिए बजट में कोई बजट नहीं है।