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7.26 करोड़ का घपला: शादी अनुदान घोटाले में निलंबित अफसर की मलाईदार जिले में तैनाती

Fri, 22 Oct 2021 01:48 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 22 Oct 2021 01:48 AM IST
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7.26 crore scam: Deployment of suspended officer in new district in marriage grant scam
आरोपी अफसर अमरजी सिंह (सफेद शर्ट मेंं) - फोटो : amar ujala
कानपुर में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ घोटाले का सारा दोष लेखपालों पर मढ़कर अपने खेल पर पर्दा डालनेे वाले तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह को अब ज्यादा मलाईदार गाजियाबाद जिले की जिम्मेदारी मिल गई है। हालांकि, वह खुद को नहीं बचा सके थे और 18 जून को शासन ने उन्हें निलंबित कर मुख्यालय से अटैच कर दिया था।
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घोटाले की जांच पूरी होने से पहले ही शासन ने उन्हें सितंबर माह में गाजियाबाद का जिला समाज कल्याण अधिकारी बना दिया। विकास भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनकी बहाली चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया था।
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इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी, 21 लेखपाल, चार एसडीएम, तीन तहसीलदार, छह कानूनगो, पिछड़ा वर्ग के दो और जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के दो अधिकारी दोषी पाए गए थे। दोषी ठहराए जाने पर अमरजीत सिंह ने जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठा दिए थे। इस पर निदेशक समाज कल्याण ने अपने स्तर से टीम गठित कर दोबारा जांच कराई थी।

इस बीच, तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक तिवारी की संस्तुति पर शासन ने समाज कल्याण अधिकारी पद से अमरजीत सिंह को निलंबित कर दिया था। इसके बाद लेखपाल और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल को भी निलंबित किया गया था। अन्य किसी भी अधिकारी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जांच रिपोर्ट पर डाला पर्दा
18 जून को अमरजीत सिंह के निलंबन के बाद निदेशालय की टीम ने शहर आकर जांच की थी। इसमें भी ज्यादातर अपात्र ही लाभार्थी मिले थे। टीम ने जिला स्तरीय अधिकारियों की रिपोर्ट को सही बताया था। गुपचुप तरीके से विभाग द्वारा चली जांच के बाद समाज कल्याण निदेशालय के अफसरों ने जांच पर पर्दा डालकर निलंबित अमरजीत सिंह को बहाल कर दिया। प्रमुख सचिव रविंद्र नायक ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि अनुशासनिक कार्यवाही में फैसला लिए जाने में समय लगने की संभावना को देखते हुए अमरजीत सिंह को बहाल किया जाता है।
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