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नाबालिग के अपहरण में साढ़े तीन साल की कैद
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। किशोरी के अपहरण मामले में आरोपी युवक को दोषी पाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम के न्यायाधीश ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। मौरावां थानांतर्गत एक गांव में जून-2014 को हुई थी घटना। शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिया फैसला।
मौरावां थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने छह जून 2014 को थाने में दिए गए शिकायतीपत्र में बताया कि वह अपने घर पर थी। उसकी दो नातिन जिसमें एक 16 वर्षीय और दूसरी 14 साल की है, बाग में आम ताकने गई थी। इस दौरान उसकी बड़ी नातिन को हरदी गांव निवासी वीरेंद्र पुत्र राजाराम सिंह अपने दो साथियों के साथ कार में बैठाकर ले गया।
इसकी जानकारी उसके साथ मौजूद छोटी नातिन ने दी। इस पर वह अपने बेटों के साथ आरोपी के घर गई तो परिजनों गालीगलौज कर भगा दिया। इसके बाद वह थाने पहुंची और इसकी शिकायत की। पीड़ित महिला की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। तभी से इसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम में चल रही थी।
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शनिवार को हुई मामले की अंतिम सुनवाई में एचजेएस मोहम्मद राशिद ने सहायक शासकीय अधिवक्ता रामसजीवन यादव की दलीलों व गवाहों पर गौर करते हुए आरोपी को दोषी पाया। इस पर न्यायाधीश ने आरोपी को साढ़े तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
शनिवार को हुई अंतिम सुनवाई में फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम ने दिया फैसला
घटना जून-2014 को मौरावां थानाक्षेत्र के एक गांव में हुई थी
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उन्नाव। किशोरी के अपहरण मामले में आरोपी युवक को दोषी पाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम के न्यायाधीश ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। मौरावां थानांतर्गत एक गांव में जून-2014 को हुई थी घटना। शनिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिया फैसला।
मौरावां थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने छह जून 2014 को थाने में दिए गए शिकायतीपत्र में बताया कि वह अपने घर पर थी। उसकी दो नातिन जिसमें एक 16 वर्षीय और दूसरी 14 साल की है, बाग में आम ताकने गई थी। इस दौरान उसकी बड़ी नातिन को हरदी गांव निवासी वीरेंद्र पुत्र राजाराम सिंह अपने दो साथियों के साथ कार में बैठाकर ले गया।
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इसकी जानकारी उसके साथ मौजूद छोटी नातिन ने दी। इस पर वह अपने बेटों के साथ आरोपी के घर गई तो परिजनों गालीगलौज कर भगा दिया। इसके बाद वह थाने पहुंची और इसकी शिकायत की। पीड़ित महिला की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। तभी से इसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम में चल रही थी।
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शनिवार को हुई मामले की अंतिम सुनवाई में एचजेएस मोहम्मद राशिद ने सहायक शासकीय अधिवक्ता रामसजीवन यादव की दलीलों व गवाहों पर गौर करते हुए आरोपी को दोषी पाया। इस पर न्यायाधीश ने आरोपी को साढ़े तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
शनिवार को हुई अंतिम सुनवाई में फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम ने दिया फैसला
घटना जून-2014 को मौरावां थानाक्षेत्र के एक गांव में हुई थी