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कानपुर: सरकारी नौकरी के नाम पर ठगने वाले ओएफसी कर्मी समेत 6 गिरफ्तार, सचिवालय तक गिरोह की पैठ

Tue, 11 Jan 2022 08:37 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 11 Jan 2022 08:37 PM IST
सार

डीसीपी ने बताया कि बीएससी पास अंकुर गिरोह का सरगना है। वह शिकार चुनता था। महताब व अशोक साइबर कैफे चलाते हैं। जितने भी फर्जी प्रमाण पत्र व नियुक्ति पत्र तैयार करवाने होते थे वह यही दोनों करते थे।

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6 arrested including OFC employee who cheated in the name of government job
पुलिस गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का राजफाश किया है। आर्डनेंस फैक्टरी कर्मी समेत 6 शातिरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सभी आरोपी कानपुर के रहने वाले हैं।
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गिरोह ने पिछले दो सालों में सवा सौ लोगों से करीब तीन करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। गिरोह में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं। क्राइम ब्रांच अब एक-एक कर उनकी तलाश कर रही है। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि चकेरी निवासी प्रिया नाम की युवती से रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर चार लाख रुपये की ठगी की गई थी।
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जब वह नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी ज्वाइन करने पहुंची थी तब पता चला था कि यह पत्र फर्जी है। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने अंकुर वर्मा, ओएफसी कर्मी प्रदीप सिंह, महताब अहमद, धर्मेंद्र कुमार, अशोक और अक्षय सिंह को गिरफ्तार किया। गिरोह बनाकर नौकरी दिलाने के नाम पर यूपी, पंजाब, हरियाणा, बिहार, कोलकाता समेत कई अन्य प्रदेश के बेरोजगारों से ठगी को अंजाम देते थे।
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अंकुर सरगना, बाकी आरोपियों का था अलग-अलग काम
डीसीपी ने बताया कि बीएससी पास अंकुर गिरोह का सरगना है। वह शिकार चुनता था। महताब व अशोक साइबर कैफे चलाते हैं। जितने भी फर्जी प्रमाण पत्र व नियुक्ति पत्र तैयार करवाने होते थे वह यही दोनों करते थे। ओएफसी कर्मी प्रदीप सेना, ओएफसी आदि में नौकरी संबंधी लोगों को कथित ट्रेनिंग करवाता था। सरकारी परिसरों में भ्रमण भी करवाता था। वहीं धर्मेंद्र तैयार दस्तावेजों को इधर से उधर पहुंचाता था।

सचिवालय तक पैठ, शहर दर शहर एजेंट
आरोपियों ने कई शहरों में एजेंट बना रखे हैं, जो शिकार ढूंढते हैं। कोलकाता में विभू, बिहार में नरेंद्र, बिजनौर में कपिल चौहान हैं। मुंबई, चेन्नई, पटना आदि शहरों में भी कई एजेंट हैं। प्रदीप की तरह लखनऊ स्थित सचिवालय में भी गिरोह से जुड़ा भानु नाम का कर्मचारी है। जो शिकार को सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा देता था, भानु उसको सचिवालय बुलाकर परिसर घुमाता था। जिससे उनको भरोसा हो जाए।
                   
इनकी हुई गिरफ्तारी
- अंकुर वर्मा, राजपुर, काकादेव
- धर्मेंद्र कुमार, मसवानपुर, कल्याणपुर
- अशोक कुमार, टीपी नगर
- महताब अहमद, आईआईटी गेट, कल्याणपुर
-  प्रदीप सिंह, अर्मापुर
- अक्षय सिंह, नानकारी
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