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कानपुर: एटीएम में कैश लोड करने वाली कंपनी को 44 लाख का चूना, सात कर्मचारियों ने की धोखाधड़ी
Mon, 21 Jun 2021 09:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:35 PM IST
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शहर के अधिकांश एटीएम में लगा है नो कैश का बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में बैंकों के एटीएम में कैश लोड करने वाली सीएमएस इंफोसिस्टम कंपनी के सात कर्मचारियों ने कंपनी को 44 लाख रुपये का चूना लगा दिया। दो कस्टोडियन (रक्षक) ने ऑफिस में तैनात एक कर्मचारी की मदद से कंपनी के वॉल्ट (कक्ष) से 10 लाख रुपये पार कर दिए। इसके साथ ही दो कस्टोडियन ने 12 लाख तो दो कस्टोडियन ने 22.13 लाख रुपये अलग-अलग एटीएम में लोड ही नहीं किए।
ऑडिट में मामला पकड़े जाने के बाद इन सातों कर्मचारियों समेत आठ के खिलाफ कोहना थाने में रविवार रात को दो रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। सभी आरोपी नौकरी छोड़कर फरार हैं। नवाबगंज विष्णुपुरी स्थित कंपनी शाखा के वॉल्ट इंचार्ज संकल्प श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ माह पूर्व बिधनू यशोदा नगर निवासी जितेंद्र राजपूत और बिरहाना रोड निवासी अजय कुमार गुप्ता वॉल्ट कस्टोडियन थे।
इसके अलावा ऑफिस में शुक्लागंज ऋषिनगर निवासी सूरज तिवारी की तैनाती थी। चार माह पहले एक्सिस बैंक ने कैश कम होने की सूचना दी तो कंपनी ने जांच कराई। इसमें पता चला कि जितेंद्र व अजय कर्मी सूरज की मदद से वॉल्ट रजिस्टर में ओवरराइटिंग कर पैसा गायब करते थे। 28 अगस्त से 30 सितंबर के बीच इन्होंने वॉल्ट से 10 लाख रुपये का गबन किया।
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इसके अलावा सरोजिनी नगर लखनऊ निवासी हरिशंकर और फतेहपुर के धींगरवा बाबूपुर निवासी अमन सिंह ने 12 लाख रुपये एडीएम में नहीं डाले। कंपनी के ब्रांच मैनेजर मनीष दीक्षित ने भी दो कस्टोडियन उन्नाव के आदर्श नगर निवासी यश पांडेय व फतेहपुर के मुंतोर ललौली निवासी निर्मल कुमार और यश के पिता अनिल के खिलाफ गबन का मुकदमा लिखवाया।
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ऑडिट में मामला पकड़े जाने के बाद इन सातों कर्मचारियों समेत आठ के खिलाफ कोहना थाने में रविवार रात को दो रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। सभी आरोपी नौकरी छोड़कर फरार हैं। नवाबगंज विष्णुपुरी स्थित कंपनी शाखा के वॉल्ट इंचार्ज संकल्प श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ माह पूर्व बिधनू यशोदा नगर निवासी जितेंद्र राजपूत और बिरहाना रोड निवासी अजय कुमार गुप्ता वॉल्ट कस्टोडियन थे।
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इसके अलावा ऑफिस में शुक्लागंज ऋषिनगर निवासी सूरज तिवारी की तैनाती थी। चार माह पहले एक्सिस बैंक ने कैश कम होने की सूचना दी तो कंपनी ने जांच कराई। इसमें पता चला कि जितेंद्र व अजय कर्मी सूरज की मदद से वॉल्ट रजिस्टर में ओवरराइटिंग कर पैसा गायब करते थे। 28 अगस्त से 30 सितंबर के बीच इन्होंने वॉल्ट से 10 लाख रुपये का गबन किया।
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इसके अलावा सरोजिनी नगर लखनऊ निवासी हरिशंकर और फतेहपुर के धींगरवा बाबूपुर निवासी अमन सिंह ने 12 लाख रुपये एडीएम में नहीं डाले। कंपनी के ब्रांच मैनेजर मनीष दीक्षित ने भी दो कस्टोडियन उन्नाव के आदर्श नगर निवासी यश पांडेय व फतेहपुर के मुंतोर ललौली निवासी निर्मल कुमार और यश के पिता अनिल के खिलाफ गबन का मुकदमा लिखवाया।
मनीष के मुताबिक दोनों आरोपियों के पास 29 एटीएम हैं। अप्रैल में दोनों एटीएम का ऑडिट कराने नहीं आए और न ही बचा हुआ कैश लौटाया। फोन भी बंद कर लिए। एटीएम का ऑडिट किया गया तो पता चला कि पीरोड, हर्ष नगर, श्यामनगर, हालसी रोड, आर्यनगर, रतनलाल नगर, स्वरूप नगर आदि स्थानों के एटीएम में 22.13 लाख रुपये कम डाले गए हैं।
लिखापढ़ी में पूरा दिखाया कैश
गबन का पता न चले, इसलिए सूरज ने कैश मूवमेंट ऑर्डर अपने व कस्टोडियन अभय गौतम के नाम से बनाया। इसमें पहले 10 लाख रुपये एक्सिस हिटाची से एसबीआई में और 11 लाख रुपये आईसीआईसीआई के एटीएम में ट्रांसफर दिखाया। हरीशंकर व अमन ने जो 10 लाख रुपये का गबन किया था, लिखापढ़ी में वह भी कैश पूरा दिखा दिया।
गबन की रकम देने से पहले छोड़ी नौकरी
ब्रांच मैनेजर, ऑपरेशन मैनेजर के मुताबिक सूरज तिवारी ने जितेंद्र राजपूत, अजय, अमन, हरिशंकर के साथ मिलकर गबन की बात कुबूल की है। तीन लाख रुपये वॉल्ट में जमा भी कराए, लेकिन बाकी पैसा देने से पहले ही नौकरी छोड़कर फरार हो गया। बाकी आरोपियों ने भी नौकरी छोड़ दी है।
लिखापढ़ी में पूरा दिखाया कैश
गबन का पता न चले, इसलिए सूरज ने कैश मूवमेंट ऑर्डर अपने व कस्टोडियन अभय गौतम के नाम से बनाया। इसमें पहले 10 लाख रुपये एक्सिस हिटाची से एसबीआई में और 11 लाख रुपये आईसीआईसीआई के एटीएम में ट्रांसफर दिखाया। हरीशंकर व अमन ने जो 10 लाख रुपये का गबन किया था, लिखापढ़ी में वह भी कैश पूरा दिखा दिया।
गबन की रकम देने से पहले छोड़ी नौकरी
ब्रांच मैनेजर, ऑपरेशन मैनेजर के मुताबिक सूरज तिवारी ने जितेंद्र राजपूत, अजय, अमन, हरिशंकर के साथ मिलकर गबन की बात कुबूल की है। तीन लाख रुपये वॉल्ट में जमा भी कराए, लेकिन बाकी पैसा देने से पहले ही नौकरी छोड़कर फरार हो गया। बाकी आरोपियों ने भी नौकरी छोड़ दी है।