{"_id":"6ada089fd2cabbcab00c298e","slug":"43-candidates-swindled-out-of-rs-80-lakh-on-the-pretext-of-jobs-in-the-education-commission-2026-10-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: शिक्षा आयोग में नौकरी के नाम पर 43 अभ्यर्थियों से 80 लाख रुपये की ठगी, तीन पर केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: शिक्षा आयोग में नौकरी के नाम पर 43 अभ्यर्थियों से 80 लाख रुपये की ठगी, तीन पर केस
Thu, 22 Oct 2026 06:35 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 22 Oct 2026 06:35 PM IST
सार
राज्यपाल कोटे से एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी पदों पर भर्ती का झांसा दिया। नियुक्ति पत्र की तारीख टलने पर मामला खुला।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 अभ्यर्थियों से 80 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता शरद अवस्थी के मुताबिक, नीरज मिश्रा ने खुद को आयोग के संयुक्त सचिव अरविंद नारायण शुक्ला का रिश्तेदार बताकर उनके दो बच्चों समेत अन्य अभ्यर्थियों को एलडीसी लिपिक और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया। इसके एवज में अभ्यर्थियों से रुपये लिए गए। नियुक्ति पत्र जारी होने की तारीख बार-बार टलने और इसके बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने पर सात सितंबर 2026 को पुलिस कमिश्नर से शिकायत की गई। इसके बाद मामला खुलने के बाद कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की है।
नेहरू नगर निवासी शरद अवस्थी ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि वह वर्ष 2011 से नारायन सिनेमा और सत्यम सिनेमा में प्रबंधक और प्रॉपर्टी केयरटेकर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा से हुई। नीरज ने बताया कि उसके ममिया ससुर अरविंद नारायण शुक्ला उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। नीरज ने दावा किया कि शुक्ला ने उसकी खुद की चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति कराई है और वह बेनी सिंह इंटर कॉलेज, भीतरगांव में तैनात है।
विज्ञापन
नेहरू नगर निवासी शरद अवस्थी ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि वह वर्ष 2011 से नारायन सिनेमा और सत्यम सिनेमा में प्रबंधक और प्रॉपर्टी केयरटेकर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा से हुई। नीरज ने बताया कि उसके ममिया ससुर अरविंद नारायण शुक्ला उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। नीरज ने दावा किया कि शुक्ला ने उसकी खुद की चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति कराई है और वह बेनी सिंह इंटर कॉलेज, भीतरगांव में तैनात है।
विज्ञापन
Trending Videos
नीरज ने राज्यपाल कोटे से तृतीय श्रेणी के एलडीसी लिपिक और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती कराने की बात कही। उसने भर्ती के लिए हलफनामा, जिला अस्पताल से फिटनेस मेडिकल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अंकतालिका और छह पासपोर्ट आकार की फोटो मांगीं। उसने नियुक्ति पत्र मिलने से पहले 2.5 लाख रुपये और नौकरी लगने के बाद बाकी 2.5 लाख रुपये देने की बात कही। शरद के मुताबिक, उनके बेटे यशवर्धन अवस्थी और बेटी अर्चिता अवस्थी की एलडीसी पद पर नियुक्ति कराने के लिए नीरज ने 5,00,000 लाख रुपये मांगे। उसने दोनों की नियुक्ति कराने का पूरा भरोसा दिया। इसके बाद शरद ने जुलाई से सितंबर 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में 2.5 लाख रुपये दे दिए। पीड़ित के अनुसार नीरज ने हलफनामा और उर्सला से फिटनेस मेडिकल की व्यवस्था कराई। शरद ने अपने मित्र शान अली का उल्लेख किया। आरोप है कि शान अली ने अपने भतीजे मोहम्मद सोहेल की एलडीसी पद पर नियुक्ति के लिए जून 2025 में नीरज को दो लाख रुपये दिए थे। इस पूरे प्रकरण में बाबू ज्ञानेन्द्र दुबे नाम का व्यक्ति भी शामिल बताया गया जो खुद को संयुक्त सचिव का (पर्सनल असिस्टेंट) बताता था।
विज्ञापन
लखनऊ और प्रयागराज बुलाकर कराए हस्ताक्षर
पीड़ित शरद के मुताबिक, अभ्यर्थियों को लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय और प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में बुलाया गया। वहां उनसे लिपिक पद के आवेदन पत्रों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें बताया गया कि पांच सितंबर 2025 को लोकभवन में मुख्यमंत्री की ओर से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। हालांकि, नियुक्ति पत्र वितरण की तारीख लगातार टलती रही। शिकायत में 16 मई 2026 के एक पत्र का जिक्र है। पत्रांक के तहत प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के कारण नियुक्ति पत्र वितरण की तारीख में बदलाव की बात कही गई। अभ्यर्थियों को नई तारीख की सूचना समाचार पत्रों के माध्यम से देने की बात कही गई। इसके बावजूद नियुक्ति पत्र नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। शरद अवस्थी ने तहरीर में दावा किया कि करीब 43 अभ्यर्थी इस मामले में फंसे हैं और उनसे करीब 80 लाख रुपये नकद लिए गए हैं। उन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कोतवाली इंस्पेक्टर अरुण कुमा द्विवेदी ने बताया कि पुलिस कमिश्नर के आदेश पर नीरज मिश्रा, अरविंद नारायण शुक्ला, बाबू ज्ञानेंद्र दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
पीड़ित शरद के मुताबिक, अभ्यर्थियों को लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय और प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में बुलाया गया। वहां उनसे लिपिक पद के आवेदन पत्रों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें बताया गया कि पांच सितंबर 2025 को लोकभवन में मुख्यमंत्री की ओर से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। हालांकि, नियुक्ति पत्र वितरण की तारीख लगातार टलती रही। शिकायत में 16 मई 2026 के एक पत्र का जिक्र है। पत्रांक के तहत प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के कारण नियुक्ति पत्र वितरण की तारीख में बदलाव की बात कही गई। अभ्यर्थियों को नई तारीख की सूचना समाचार पत्रों के माध्यम से देने की बात कही गई। इसके बावजूद नियुक्ति पत्र नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। शरद अवस्थी ने तहरीर में दावा किया कि करीब 43 अभ्यर्थी इस मामले में फंसे हैं और उनसे करीब 80 लाख रुपये नकद लिए गए हैं। उन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कोतवाली इंस्पेक्टर अरुण कुमा द्विवेदी ने बताया कि पुलिस कमिश्नर के आदेश पर नीरज मिश्रा, अरविंद नारायण शुक्ला, बाबू ज्ञानेंद्र दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।