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बेहमई में बेरहमी के 40 बरस... घंटे की गूंज, इंसाफ अभी बाकी, फूलन देवी ने 20 लोगों को मारी थी गोली
Sun, 14 Feb 2021 09:21 AM IST
शिखा पांडेय
शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर देहात
शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर देहात
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 14 Feb 2021 09:21 AM IST
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बेहमई कांड
- फोटो : अमर उजाला
साठ साल की गुटकन देवी बेहमई गांव की उस डगर से गुजरते हुए डगमगाकर ठिठक जाती हैं, जहां फूलनदेवी ने उनका सुहाग उजाड़ दिया था। वहां मृतकों के स्मारक के शिलापट पर नजर डालते ही उनकी आंखें डबडबा जाती हैं, जिस पर उनके पति के साथ 20 उन लोगों के नाम अंकित हैं, जिन्हें फूलनदेवी और उसके गैंग ने मौत की नींद सुला दिया था।
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गोलियों की बौछार के बीच बच निकले जेंटर सिंह ने स्मारक में एक घंटा लगवाया है और गांव वाले इसे बजाकर याद रखना चाहते हैं कि इंसाफ की लड़ाई अभी बाकी है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक चालीस साल पहले 14 फरवरी को दिन में लगभग तीन बजे डाकू फूलन ने गिरोह के साथ बेहमई गांव को घेर लिया था।
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वह अपने जानी दुश्मन डाकू लालाराम और श्रीराम को पूछ रही थी। उसे यकीन था कि ऊंची जाति बहुल इसी गांव में इन दोनों डकैतों को उनकी बिरादरी के लोग शरण देते हैं। फूलन ने घर-घर तलाशी ली पर लालाराम, श्रीराम नहीं मिले तो उसने गांव के एक-एक पुरुष को खींचकर निकाला और पहले कुएं और फिर गांव किनारे इकट्ठा कर उन्हें गोली से उड़ा दिया।
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इसमें 20 की मौत हो गई, पर जेंटर सिंह (चंदर सिंह) सहित दो लोग बच गए। मारे गए लोगों की याद में घटनास्थल पर ही एक स्मारक बना दिया गया है। जेंटर सिंह ने वहीं स्मारक में पीतल का घंटा लगवाया, जिसेे बजाकर याद दिलाया जाता है कि इंसाफ अभी बाकी है।
जल्द फैसले की उम्मीद
मुकदमा बहस पर लगा है। मामला इतना लंबा खिंचने की वजह अभियुक्तों की तरफ से रही। अब सभी गवाहों के बयान हो चुके हैं। चार अभियुक्त अभी जिंदा हैं। 17 फरवरी को फिर सुनवाई है। उम्मीद है कि फैसला जल्द आएगा।
- राजीव पोरवाल, शासकीय अधिवक्ता