एक और गड़बड़झाला: कानपुर में नोटिस बोर्ड लगाए बिना 30 लाख रुपये डकार गए
ग्रामीण क्षेत्रों में गांव के विकास से संबंधित जो भी कार्य होते हैं वो सब मनरेगा के अंतर्गत कराए जाते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में गांव के विकास से संबंधित जो भी कार्य होते हैं वो सब मनरेगा के अंतर्गत कराए जाते हैं। इसके तहत नाली, खड़जा, भूमि समतलीकरण, मेड़ बंदी, तालाब सुंदरीकरण आदि के कार्य आते हैं। शासन ने ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की जानकारी ग्रामीणों को देने के लिए सिटीजन इन्फार्मेशन बोर्ड (सीआईबी) लगाने के निर्देश दिए हैं।
इसे साधारण भाषा में नोटिस बोर्ड भी कहते हैं। यह बोर्ड कार्य शुरू होने से पहले लगाया जाता है। 50 हजार रुपये से अधिक के कार्य होने पर सीआईबी लगाना अनिवार्य होता है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में 50 हजार रुपये से अधिक के 2922 मनरेगा के कार्य होने हैं।
विभाग के अफसरों ने अभी तक 2319 बोर्ड ही कार्य स्थलों पर लगाए हैं। जबकि विभाग ने 2922 बोर्डों का भुगतान 1 करोड़ 46 लाख रुपये मार्च माह में कर दिया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं समझी। ब्लॉक के समूहों को बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी देने का नियम है। एक बोर्ड पांच हजार रुपये खर्च होता है।
सीआईबी लगाने में लगातार विभाग लापरवाही बरत रहा है। जो नोटिस बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, उनकी जांच के लिए टीम गठित की जाएगी।
डॉ. महेंद्र कुमार, सीडीओ