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शताब्दी एक्सप्रेस से 294 और वंदे भारत से 34 यात्री दिल्ली गए, आज अनवरगंज से चलेंगी दो ट्रेनें
Sun, 13 Sep 2020 02:07 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 13 Sep 2020 02:07 PM IST
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कानपुर सेंट्रल
- फोटो : amar ujala
कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर शनिवार से गुजरने वाली 11 जोड़ी ट्रेनों में नौ जोड़ी ट्रेनों का संचालन हुआ। इन ट्रेनों में नई दिल्ली जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस और स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस शामिल रही। स्वर्ण शताब्दी से कानपुर सेंट्रल पर 204 यात्री उतरे और 294 यात्री चढ़े और वंदे भारत एक्सप्रेस से 34 यात्री उतरे और 34 यात्री चढ़े।
शताब्दी में 1050 और वंदे भारत में 1128 सीटें हैं। दोनों ही ट्रेनों की सीटें फुल रही। वहीं, पहले से चल रहीं 32 जोड़ी ट्रेनों सहित शनिवार को 41 जोड़ी ट्रेनों से कानपुर से करीब 33 हजार यात्री चढ़े और 15 हजार यात्री उतरे।
दिल्ली-मुंबई से आना नहीं जाना चाहते हैं यात्री
ट्रेनों के चलने से सीटों की बुकिंग के आधार पर इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि लोग अब काम धंधे की तलाश में यूपी, बिहार आना नहीं बल्कि वापस दिल्ली-मुंबई जाना चाहते हैं। शताब्दी, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से लेकर एक्सप्रेस मेल ट्रेनों में यात्रियों के यहां से दिल्ली-मुंबई जाने वालों की संख्या आने की अपेक्षा दोगुनी से ज्यादा है। प्रीमियम ट्रेनों से नौकरीपेशा, संपन्न वर्ग तो आम एक्सप्रेस, मेल ट्रेनों से व्यापार करने वाले छोटे दुकानदार, कारीगर तबका वापसी कर रहा है।
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एक नजर
- दिल्ली से कानपुर आने में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस में 13 सितंबर से 18 सितंबर तक 850 से 1050 तक सीटें और वंदे भारत एक्सप्रेस में 730 से 865 सीटें खाली हैं।
- कानपुर से दिल्ली जाने में 13 से 18 सितंबर के बीच स्वर्ण शताब्दी में 43 से 108 सीटें और वंदे भारत एक्सप्रेस में नौ से 700 तक सीटें खाली हैं।
- कानपुर से मुंबई जाने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में वेटिंग चल रही है। यही हाल मुजफ्फरपुर-बांद्रा एक्सप्रेस समेत मुंबई जाने वाली दूसरी ट्रेनों में हैं।
- मुंबई से कानपुर आने में भी वेटिंग है लेकिन पुष्पक एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में अगले एक सप्ताह तक आरएसी सीटें खाली हैं, जो कन्फर्म हो सकती हैं। आने वालों से ज्यादा जाने वालों की मारामारी है।
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शताब्दी में 1050 और वंदे भारत में 1128 सीटें हैं। दोनों ही ट्रेनों की सीटें फुल रही। वहीं, पहले से चल रहीं 32 जोड़ी ट्रेनों सहित शनिवार को 41 जोड़ी ट्रेनों से कानपुर से करीब 33 हजार यात्री चढ़े और 15 हजार यात्री उतरे।
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दिल्ली-मुंबई से आना नहीं जाना चाहते हैं यात्री
ट्रेनों के चलने से सीटों की बुकिंग के आधार पर इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि लोग अब काम धंधे की तलाश में यूपी, बिहार आना नहीं बल्कि वापस दिल्ली-मुंबई जाना चाहते हैं। शताब्दी, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से लेकर एक्सप्रेस मेल ट्रेनों में यात्रियों के यहां से दिल्ली-मुंबई जाने वालों की संख्या आने की अपेक्षा दोगुनी से ज्यादा है। प्रीमियम ट्रेनों से नौकरीपेशा, संपन्न वर्ग तो आम एक्सप्रेस, मेल ट्रेनों से व्यापार करने वाले छोटे दुकानदार, कारीगर तबका वापसी कर रहा है।
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- दिल्ली से कानपुर आने में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस में 13 सितंबर से 18 सितंबर तक 850 से 1050 तक सीटें और वंदे भारत एक्सप्रेस में 730 से 865 सीटें खाली हैं।
- कानपुर से दिल्ली जाने में 13 से 18 सितंबर के बीच स्वर्ण शताब्दी में 43 से 108 सीटें और वंदे भारत एक्सप्रेस में नौ से 700 तक सीटें खाली हैं।
- कानपुर से मुंबई जाने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में वेटिंग चल रही है। यही हाल मुजफ्फरपुर-बांद्रा एक्सप्रेस समेत मुंबई जाने वाली दूसरी ट्रेनों में हैं।
- मुंबई से कानपुर आने में भी वेटिंग है लेकिन पुष्पक एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में अगले एक सप्ताह तक आरएसी सीटें खाली हैं, जो कन्फर्म हो सकती हैं। आने वालों से ज्यादा जाने वालों की मारामारी है।