{"_id":"ae43e496053e66bd55ec9a98c93d7c10","slug":"24-teachers-of-csa-get-half-salary-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएसए के 24 टीचरों का वेतन हुआ आधा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएसए के 24 टीचरों का वेतन हुआ आधा
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 08 Jan 2015 02:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 24 शिक्षकों का एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) कम कर दिया गया है। इससे शिक्षकों का वेतन आधा हो गया है। जल्द ही 50 और शिक्षकों का एजीपी कम किया जा सकता है।
इसके लिए अर्थ नियंत्रक और डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मानीटरिंग (डैम) को एक सप्ताह का समय दिया गया है। कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह की ओर से कहा गया है कि रिव्यू करके एजीपी कटौती की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ऐसे में अब तक दिए गए ज्यादा वेतन की रिकवरी की जा सकती है। नए साल की शुरूआत में ही रिसर्च एसोसिएट से असिस्टेंट प्रोफेसर बनाए गए 24 शिक्षकों को तगड़ा झटका लगा है।
विज्ञापन
कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कहते हुए कि स्क्रीनिंग कमेटी और सेलेक्शन कमेटी की अनुमति के बगैर एजीपी का लाभ दिया गया है, जो कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसको लेकर ही जून 2013 से दिया जा रहा 9000 रुपये एजीपी वापस लिया गया है।
इस कार्रवाई को शिक्षकों के डिमोशन के तौर पर देखा जा रहा है। डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मानीटरिंग डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से 4 जनवरी 2015 को जारी इस आदेश से जिन शिक्षकों को प्रतिमाह 37000 रुपये बेसिक और 9000 रुपये एजीपी (कुल 46000 रुपये वेतन) मिल रहा था, वह अब प्रतिमाह 15000 रुपये बेसिक और 8000 रुपये एजीपी (कुल 23000 रुपये वेतन) पाएंगे।
कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तर्क दिया है कि एजीपी का लाभ देने की जानकारी शासन को न थी। अर्थ नियंत्रक और कुलपति को भी गंभीर वित्तीय अनियमितता की भनक नहीं लगी। अब मामला संज्ञान में आया है तो एजीपी का लाभ खत्म किया जा रहा है।
इसको लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही एजीपी का लाभ दिया है। अब झूठे और मनगढंत तर्क देकर शिक्षकों को लाभ से वंचित किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
इसके लिए अर्थ नियंत्रक और डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मानीटरिंग (डैम) को एक सप्ताह का समय दिया गया है। कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह की ओर से कहा गया है कि रिव्यू करके एजीपी कटौती की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विज्ञापन
ऐसे में अब तक दिए गए ज्यादा वेतन की रिकवरी की जा सकती है। नए साल की शुरूआत में ही रिसर्च एसोसिएट से असिस्टेंट प्रोफेसर बनाए गए 24 शिक्षकों को तगड़ा झटका लगा है।
विज्ञापन
कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कहते हुए कि स्क्रीनिंग कमेटी और सेलेक्शन कमेटी की अनुमति के बगैर एजीपी का लाभ दिया गया है, जो कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसको लेकर ही जून 2013 से दिया जा रहा 9000 रुपये एजीपी वापस लिया गया है।
इस कार्रवाई को शिक्षकों के डिमोशन के तौर पर देखा जा रहा है। डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मानीटरिंग डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से 4 जनवरी 2015 को जारी इस आदेश से जिन शिक्षकों को प्रतिमाह 37000 रुपये बेसिक और 9000 रुपये एजीपी (कुल 46000 रुपये वेतन) मिल रहा था, वह अब प्रतिमाह 15000 रुपये बेसिक और 8000 रुपये एजीपी (कुल 23000 रुपये वेतन) पाएंगे।
कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तर्क दिया है कि एजीपी का लाभ देने की जानकारी शासन को न थी। अर्थ नियंत्रक और कुलपति को भी गंभीर वित्तीय अनियमितता की भनक नहीं लगी। अब मामला संज्ञान में आया है तो एजीपी का लाभ खत्म किया जा रहा है।
इसको लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही एजीपी का लाभ दिया है। अब झूठे और मनगढंत तर्क देकर शिक्षकों को लाभ से वंचित किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।