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दुष्कर्म के बाद हत्या में दो सगे भाई गिरफ्तार
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हुसैनगंज (फतेहपुर)। दुष्कर्म के बाद छात्रा की हत्या की पहेली को पुलिस ने आखिरकार सुलझा ही लिया। घटना में पड़ोसी गांव के दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि एक ने छात्रा की हत्या की तो दूसरे भाई ने शव को ठिकाने लगाने में पूरी मदद की।
हुसैनगंज थाने के एक गांव की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा खेत में परिजनों के साथ 24 अक्तूबर को काम करने गई थी। शौचक्रिया के लिए नहर के पास गई तो वहीं उससे दुष्कर्म किया गया। उसके बाद दुपट्टे से गला घोटकर हत्या कर दी गई। लाश नहर में फेंक दी गई थी। पुलिस छानबीन में जुटी रही। पुलिस को वारदात के दिन पड़ोसी गांव बसोहनी के मनीष पटेल के देखे जाने का पता लगा। थानेदार आरके सिंह ने बताया कि छानबीन में पुष्टि हो जाने
पर पूर्व बसपा नेता जयराम पटेल के बेेटे मनीष पटेल व सत्येंद्र उर्फ मालिक को शुक्रवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही पर छात्रा का सलवार भगवान सिंह का पुरवा के सामने नहर पुलिया के पास से एक पॉलिथीन में बरामद किया गया। पुलिस की पूछताछ में आरोपी मनीष ने बताया कि घटना के दिन वह पुलिया पर बैठा था। उसे छात्रा ने पहचान लिया था। उसने शोर मचाने व सबको बताने की धमकी दी, तभी उसके ही दुपट्टे
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से गला कसकर हत्या कर दी। सरपत के बीच में शव को छिपाकर घर भाग गया। बाद में भाई सत्येंद्र उर्फ मालिक को घटना के बारे में बताया। वह दोनों रात को ही मौके पर पहुंचे। लाश को नहर में फेंका और मिट्टी डालकर दबा दिया। लौटते वक्त सलवार सरपत में छूटने का पता लगा। कुछ देर बाद पॉलीथीन में सलवार रखकर नहर किनारे मिट्टी में दबाकर चले गए थे। बरामद सलवार को पिता व मां ने पहचान लिया। आरोपियों का पुलिस ने डीएनए सैंपल सुरक्षित किया। उसके बाद जेल भेजा है।
पीड़ित परिवार की मानें तो आरोपी सत्येंद्र पटेल कानपुर के काकादेव में आईएएस की कोचिंग करता है। वह घटना के बाद कानपुर भाग निकला था। उसे पुलिस ने 2010 में एक सात साल के बच्चे से कुकर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि केस से राजनीतिक पकड़ के चलते बच निकला था। उस वक्त आरोपी का पिता जयराम पटेल सत्तारुढ़ पार्टी बसपा के नेता थे। बताते हैं कि केस में जबरदस्त दबाव पीड़ित पक्ष पर बनाकर बयान बदलाए गए थे। जिससे आरोपी को कोर्ट ने बरी किया था।
आरोपियों के पिता जयराम पटेल इलाके के अच्छे काश्तकार हैं। उनकी करीब 25 बीघा जमीन है। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाते वक्त रात को मनीष के पैर में नहर पड़े कांच में पड़ा था। जिससे मनीष घायल हुआ था। इसके बाद करीब सात आठ दिन तक घर में घाव के साथ पड़ा रहा। आरोपी मनीष ने हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पढ़ाई छोड़ने के बाद पिता का कृषि में हाथ बटाता था। वह अक्सर नहर की पटरी से जुड़े अपने खेत में आकर बैठा रहता था। घटना के बाद से उसका अचानक गायब होना ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनता चला गया। धीरे-धीरे मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंच गई।
दुष्कर्म के बाद छात्रा की हत्या में दो सगे भाई दबोचे
- एक ने वारदात की, दूसरे ने शव को ठिकाने लगाने में की मदद
- एक माह 27 दिन बाद मामले का हुआ खुलासा
- आरोपियों के पिता बसपा में लंबे समय रहे नेता
अमर उजाला ब्यूरो
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हुसैनगंज थाने के एक गांव की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा खेत में परिजनों के साथ 24 अक्तूबर को काम करने गई थी। शौचक्रिया के लिए नहर के पास गई तो वहीं उससे दुष्कर्म किया गया। उसके बाद दुपट्टे से गला घोटकर हत्या कर दी गई। लाश नहर में फेंक दी गई थी। पुलिस छानबीन में जुटी रही। पुलिस को वारदात के दिन पड़ोसी गांव बसोहनी के मनीष पटेल के देखे जाने का पता लगा। थानेदार आरके सिंह ने बताया कि छानबीन में पुष्टि हो जाने
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पर पूर्व बसपा नेता जयराम पटेल के बेेटे मनीष पटेल व सत्येंद्र उर्फ मालिक को शुक्रवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही पर छात्रा का सलवार भगवान सिंह का पुरवा के सामने नहर पुलिया के पास से एक पॉलिथीन में बरामद किया गया। पुलिस की पूछताछ में आरोपी मनीष ने बताया कि घटना के दिन वह पुलिया पर बैठा था। उसे छात्रा ने पहचान लिया था। उसने शोर मचाने व सबको बताने की धमकी दी, तभी उसके ही दुपट्टे
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से गला कसकर हत्या कर दी। सरपत के बीच में शव को छिपाकर घर भाग गया। बाद में भाई सत्येंद्र उर्फ मालिक को घटना के बारे में बताया। वह दोनों रात को ही मौके पर पहुंचे। लाश को नहर में फेंका और मिट्टी डालकर दबा दिया। लौटते वक्त सलवार सरपत में छूटने का पता लगा। कुछ देर बाद पॉलीथीन में सलवार रखकर नहर किनारे मिट्टी में दबाकर चले गए थे। बरामद सलवार को पिता व मां ने पहचान लिया। आरोपियों का पुलिस ने डीएनए सैंपल सुरक्षित किया। उसके बाद जेल भेजा है।
पीड़ित परिवार की मानें तो आरोपी सत्येंद्र पटेल कानपुर के काकादेव में आईएएस की कोचिंग करता है। वह घटना के बाद कानपुर भाग निकला था। उसे पुलिस ने 2010 में एक सात साल के बच्चे से कुकर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि केस से राजनीतिक पकड़ के चलते बच निकला था। उस वक्त आरोपी का पिता जयराम पटेल सत्तारुढ़ पार्टी बसपा के नेता थे। बताते हैं कि केस में जबरदस्त दबाव पीड़ित पक्ष पर बनाकर बयान बदलाए गए थे। जिससे आरोपी को कोर्ट ने बरी किया था।
आरोपियों के पिता जयराम पटेल इलाके के अच्छे काश्तकार हैं। उनकी करीब 25 बीघा जमीन है। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाते वक्त रात को मनीष के पैर में नहर पड़े कांच में पड़ा था। जिससे मनीष घायल हुआ था। इसके बाद करीब सात आठ दिन तक घर में घाव के साथ पड़ा रहा। आरोपी मनीष ने हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पढ़ाई छोड़ने के बाद पिता का कृषि में हाथ बटाता था। वह अक्सर नहर की पटरी से जुड़े अपने खेत में आकर बैठा रहता था। घटना के बाद से उसका अचानक गायब होना ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनता चला गया। धीरे-धीरे मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंच गई।
दुष्कर्म के बाद छात्रा की हत्या में दो सगे भाई दबोचे
- एक ने वारदात की, दूसरे ने शव को ठिकाने लगाने में की मदद
- एक माह 27 दिन बाद मामले का हुआ खुलासा
- आरोपियों के पिता बसपा में लंबे समय रहे नेता
अमर उजाला ब्यूरो