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जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए बनेगा कच्चे माल का बैंक
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:02 AM IST
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उन्नाव। जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए जनपद में रॉ मैटेरियल बैंक बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सरकार कारीगरों के हुनर को विश्वस्तर पर ले जाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए सबसे पहले शासन-प्रशासन कारीगरों को काम में आ रही दिक्कतों को समाप्त करने जा रहा है।
एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के जरी-जरदोजी उत्पाद को चिह्नित किया गया है। सदर, कुरसठ, बारीथाना, मियागंज, आसीवन, हैदराबाद, मोहान, हसनगंज, सफ ीपुर आदि स्थानों में लगभग 10 से 15 हजार कारीगर कई पीढ़ियों से जरी-जरदोजी (साड़ियों में कढ़ाई का कार्य) का काम करते आ रहे हैं। हालांकि अभी कारीगरों को कच्चा माल लेने के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आर्थिक के अलावा अन्य दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा मार्केटिंग की भी बड़ी समस्या है। जबकि यहां पर बने जरी परिधानों की कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कोलकाता के साथ अरब देशों में भारी मांग है।
बड़े-बड़े व्यापारियों द्वारा जनपद के जरी वर्करों से उत्पाद तैयार करवा कर इन स्थानों पर उच्च दरों पर आपूर्ति किया जाता है। संयुक्त आयुक्त उद्योग केंद्र सुनील कुमार ने बताया कि कच्चे माल के लिए जिले में एक रॉ मैटेरियल बैंक का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बैंक का निर्माण होने के बाद कारीगरों को जिले में ही कच्चा माल मिल सकेगा। वहीं इसका भी प्रयास किया जा रहा है कि जनपदस्तर पर ही मेले लगवाकर उनके माल को यहीं पर मार्केट दिलाया जाए। मुख्य लक्ष्य जनपद के जरी जरदोजी कारीगरों को विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित करते हुए उनको उद्यमी बनाना है।
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कैसे काम करेगा कच्चे माल का बैंक
मुख्य विकास अधिकारी प्रेमरंजन सिंह ने बताया कि शहर में एक बैंक रूपी क्लस्टर (सेंटर) बनाया जाएगा। यह बाजार के रूप में काम करेगा। इसमें बाहर से कच्चा माल बेचने के लिए व्यापारी आएंगे, तो दूसरी तरफ कारीगर कच्चा माल खरीदने पहुंचेंगे। वहीं जरीदोजी कारीगर अपना फाइनल प्रोडक्ट भी यहां लाकर बेच सकेंगे। कुल मिलाकर शहर में बनने वाले इस सेंटर में कारीगर व व्यापारी आकर अपनी आवश्यकतानुसार सामान बेच और खरीद पाएंगे।
-अभी बाहर से मंगाते हैं कच्चा माल, आती हैं दिक्कतें
-जिले में 10 से 15 हजार कारीगर करते हैं जरदोजी काम
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एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के जरी-जरदोजी उत्पाद को चिह्नित किया गया है। सदर, कुरसठ, बारीथाना, मियागंज, आसीवन, हैदराबाद, मोहान, हसनगंज, सफ ीपुर आदि स्थानों में लगभग 10 से 15 हजार कारीगर कई पीढ़ियों से जरी-जरदोजी (साड़ियों में कढ़ाई का कार्य) का काम करते आ रहे हैं। हालांकि अभी कारीगरों को कच्चा माल लेने के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आर्थिक के अलावा अन्य दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा मार्केटिंग की भी बड़ी समस्या है। जबकि यहां पर बने जरी परिधानों की कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कोलकाता के साथ अरब देशों में भारी मांग है।
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बड़े-बड़े व्यापारियों द्वारा जनपद के जरी वर्करों से उत्पाद तैयार करवा कर इन स्थानों पर उच्च दरों पर आपूर्ति किया जाता है। संयुक्त आयुक्त उद्योग केंद्र सुनील कुमार ने बताया कि कच्चे माल के लिए जिले में एक रॉ मैटेरियल बैंक का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बैंक का निर्माण होने के बाद कारीगरों को जिले में ही कच्चा माल मिल सकेगा। वहीं इसका भी प्रयास किया जा रहा है कि जनपदस्तर पर ही मेले लगवाकर उनके माल को यहीं पर मार्केट दिलाया जाए। मुख्य लक्ष्य जनपद के जरी जरदोजी कारीगरों को विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित करते हुए उनको उद्यमी बनाना है।
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कैसे काम करेगा कच्चे माल का बैंक
मुख्य विकास अधिकारी प्रेमरंजन सिंह ने बताया कि शहर में एक बैंक रूपी क्लस्टर (सेंटर) बनाया जाएगा। यह बाजार के रूप में काम करेगा। इसमें बाहर से कच्चा माल बेचने के लिए व्यापारी आएंगे, तो दूसरी तरफ कारीगर कच्चा माल खरीदने पहुंचेंगे। वहीं जरीदोजी कारीगर अपना फाइनल प्रोडक्ट भी यहां लाकर बेच सकेंगे। कुल मिलाकर शहर में बनने वाले इस सेंटर में कारीगर व व्यापारी आकर अपनी आवश्यकतानुसार सामान बेच और खरीद पाएंगे।
-अभी बाहर से मंगाते हैं कच्चा माल, आती हैं दिक्कतें
-जिले में 10 से 15 हजार कारीगर करते हैं जरदोजी काम